एसआईआर: अब मध्य प्रदेश के दो ज़िलों में दो बीएलओ की मौत, परिजनों का काम के दबाव का आरोप

देशभर के कई राज्यों में मतदाता सूची का एसआईआर हो रहा है, जिसका जिम्मा बीएलओ पर है और जिनकी मृत्यु की ख़बरें विभिन्न राज्यों से आ रही हैं. ताज़ा मामला मध्य प्रदेश का है, जहां रायसेन और दमोह ज़िलों में दो बीएलओ की मौत हो गई. मृतकों के परिजनों ने एसआईआर के ज़्यादा काम के दबाव को मौत का कारण बताया है.

बूथ लेवल ऑफिसर मतदाता को वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) फॉर्म भरने में मदद करते हुए. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: देश के कई राज्यों में हो रहे मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) बीच मध्य प्रदेश में वोटर लिस्ट सर्वे करने वाले दो शिक्षक -बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) की शुक्रवार (21 नवंबर) को मौत हो गई.

अधिकारियों का कहना है कि प्रदेश के रायसेन और दमोह ज़िलों में हुई ये घटना ‘बीमारी’ से मौत की हैं, हालांकि समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, मृतकों के परिजनों और दोस्तों ने ज़्यादा काम और टारगेट पूरे करने के दबाव को मौत का कारण बताया.

अधिकारियों ने बताया कि इसके अलावा रायसेन ज़िले में एक बीएलओ पिछले छह दिनों से लापता है, और उन्हें ढूंढने की कोशिशें जारी हैं.

शुक्रवार देर रात जान गंवाने दो बीएलओ की पहचान रमाकांत पांडे और सीताराम गोंड (50) के रूप में हुई है. वे क्रमश: रायसेन और दमोह ज़िलों में पोस्टेड थे.

भोजपुर विधानसभा क्षेत्र के सब-डिविजनल ऑफिसर (एसडीओ) और इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर चंद्रशेखर श्रीवास्तव ने शनिवार (22 नवंबर) को पीटीआई को बताया, ‘सतलापुर इलाके के शिक्षक रमाकांत पांडे मंडीदीप में वोटर लिस्ट रिवीजन अभियान पर काम कर रहे थे. शुक्रवार देर रात किसी बीमारी की वजह से उनकी मौत हो गई.’

पांडे की मौत की सही वजह के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि हम पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतज़ार कर रहे हैं.

श्रीवास्तव ने कहा कि लापता बीएलओ की पहचान भव्य सिटी में रहने वाले शिक्षक नारायण दास सोनी के रूप में हुई है. वह बिना किसी को बताए घर से निकले छह दिनों से लापता हैं. अधिकारी ने आगे कहा कि पुलिस और सोनी के परिवार वाले उनकी तलाश कर रहे हैं.

इस बीच,  मृतक पांडे की पत्नी रेखा और परिवार के दूसरे सदस्यों ने अधिकारियों को बताया कि वह टीलाखेड़ी के प्राइमरी स्कूल में पोस्टेड थे और उन्हें वोटर लिस्ट का काम सौंपा गया था. उन्होंने दावा किया कि वह बहुत ज़्यादा काम के बोझ से जूझ रहे थे, जिससे उन्हें हर रात असाइनमेंट पूरा करने के लिए ज़्यादा घंटे काम करना पड़ता था.

उन्होंने दावा किया कि पांडे को डेडलाइन पूरी करने के लिए फोन पर लगातार निर्देश मिलते थे. रेखा पांडे ने दावा किया कि वह पिछली चार रातों से सोए नहीं थे. उन्हें डर था कि अगर टारगेट पूरे नहीं हुए, तो उन्हें सस्पेंड कर दिया जाएगा.

उन्होंने कहा, ‘वह (रमाकांत पांडे) गुरुवार रात करीब 9.30 बजे एक ऑनलाइन मीटिंग में शामिल हुए और बाथरूम जाने के तुरंत बाद गिर गए. उन्हें पहले भोपाल के नोबल हॉस्पिटल ले जाया गया और बाद में एम्स ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.’

एसडीओ श्रीवास्तव ने कहा कि पांडे के परिवार के सदस्यों को नियमों के मुताबिक मदद और अनुकंपा पर नियुक्ति मिलेगी.

वहीं, ज़िला शिक्षा अधिकारी एसके नेमा ने शनिवार को पीटीआई को बताया कि दमोह ज़िले में रंजरा गांव में बीएलओ के तौर पर काम करने वाले टीचर गोंड गुरुवार (20 नवंबर) शाम को गणना फ़ॉर्म भरते समय बीमार पड़ गए.

ऑफिसर ने कहा, ‘उन्हें दमोह के जिला अस्पताल ले जाया गया और गंभीर हालत में एडवांस हेल्थ केयर के लिए जबलपुर जिला रेफर किया गया, जहां शुक्रवार रात इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई.’

गोंड के दोस्तों ने दावा किया कि उन्हें रंजरा और कूड़ा कुडन गांवों में गिनती की ड्यूटी दी गई थी. उन पर दबाव था क्योंकि उन्हें 1,319 वोटरों को कवर करना था, लेकिन वह सिर्फ 13 प्रतिशत काम ही पूरा कर पाए थे.

इससे पहले दमोह जिले के जबेरा विधानसभा इलाके के तेंदूखेड़ा में एक रोड एक्सीडेंट में बीएलओ श्याम सुंदर शर्मा की मौत हो गई थी. उनके परिवार ने आरोप लगाया था कि एसआईआर के काम की वजह से उन पर बहुत दबाव था और उन्हें निलंबित करने की धमकी दी गई थी.

लगातार हो रही हैं बीएलओ की मौत

उल्लेखनीय है कि देश के कई राज्यों में हो रही एसआईआर प्रक्रिया के बीच बीएलओ के जान गंवाने की ख़बरें भी लगातार सामने आ रही हैं.

बीते 19 नवंबर को गुजरात के खेड़ा ज़िले में बीएलओ के तौर पर काम कर रहे एक स्कूल टीचर की भी हार्ट अटैक से मौत हो गई थी. उन बीएलओ के परिवार ने भी कहा था कि उनकी मौत का कारण चल रहे एसआईआर से जुड़ा ‘काम का बहुत ज़्यादा दबाव’ है.

इससे पहले केरल और राजस्थान में बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) के तौर पर काम कर रहे दो लोगों ने कथित तौर पर एसआईआर से जुड़े काम के ज़्यादा दबाव की वजह से आत्महत्या कर ली थी.

16 नवंबर को केरल के कन्नूर में 44 साल के अनीश जॉर्ज, जो एक स्कूल ऑफिस असिस्टेंट थे, अपने घर में मृत पाए गए थे. उनके परिवार के मुताबिक, जॉर्ज अपने बूथ पर गिनती के काम की डेडलाइन पूरी करने के लिए बहुत ज़्यादा काम कर रहे थे.

राजस्थान के नाहरी का बास से भी ऐसी ही एक घटना सामने आई, जहां 45 साल के मुकेश जांगिड़, जो एक सरकारी स्कूल के टीचर और बीएलओ थे, ने 16 नवंबर को कथित तौर पर आत्महत्या कर ली. हालांकि अभी पूरी जानकारी साफ़ नहीं है, लेकिन बिंदायका एसएचओ विनोद वर्मा के मुताबिक, उन्होंने कथित तौर पर बिंदायका रेलवे क्रॉसिंग के पास एक ट्रेन के सामने छलांग लगा दी.

जांगिड़ के भाई गजानंद ने दावा किया कि उन्हें अपने भाई का सुसाइड नोट मिला है, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर लिखा है कि वह एसआईआर ड्यूटी की वजह से तनाव में थे और उनका सुपरवाइज़र उन पर दबाव डाल रहा था और उन्हें सस्पेंड करने की धमकी दे रहा था.

पश्चिम बंगाल से भी बीएलओ की मौत की खबर सामने आई है.

गौरतलब है कि इससे पहले बिहार में हुए एसआईआर के दौरान आरा के एक सरकारी स्कूल के प्रधानाध्यापक और बीएलओ सुपरवाइजर राजेंद्र प्रसाद की 27 अगस्त को कार्डियक अरेस्ट से मौत हो गई थी.

परिजनों का कहना था कि सेवानिवृत्ति से महज़ चार महीने पहले एसआईआर प्रकिया के कारण वे अधिकारियों के दबाव और बढ़ते जाते काम से जूझ रहे थे, जिसने उनकी जान ले ली.