नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर के कटरा स्थित श्री माता वैष्णो देवी इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस के पहली बैच में 90% कश्मीरी मुस्लिम छात्रों के चयन के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने उपराज्यपाल (एलजी) मनोज सिन्हा को एडमिशन लिस्ट रद्द करने की मांग को लेकर ज्ञापन सौपा था, जिसे एलजी ने स्वीकार कर लिया है.
एलजी मनोज सिन्हा के इस कदम का राजनीतिक पार्टियां विरोध कर रही हैं.
भाजपा के वरिष्ठ नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा की अगुवाई में पांच सदस्यीय भाजपा प्रतिनिधिमंडल ने शनिवार (22 नवंबर) शाम जम्मू स्थित राजभवन में एलजी मनोज सिन्हा से मुलाकात की. प्रतिनिधिमंडल ने श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के नियमों में संशोधन कर विश्वविद्यालय में केवल हिंदू छात्रों के लिए सीटें आरक्षित करने की मांग की.
ज्ञात हो कि इस साल की एडमिशन लिस्ट में 50 में से 42 छात्र मुस्लिम हैं.
द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, सुनील शर्मा ने कहा, ‘इस साल प्रवेश सूची में ज़्यादातर छात्र एक ही समुदाय से हैं. हमने इसके खिलाफ विरोध दर्ज कराया है. यह विश्वविद्यालय एक धार्मिक संस्था है, जिसके साथ लोगों की आस्था और विश्वास जुड़ा हुआ है. हर श्रद्धालु अपनी भक्ति भावना से इस धार्मिक संस्था को दान देता है और चाहता है कि उसकी आस्था को बढ़ावा मिले. लेकिन बोर्ड और विश्वविद्यालय दोनों ने इस पहलू पर ध्यान नहीं दिया. हमने एलजी से साफ कहा है कि केवल वही छात्र प्रवेश पा सकें जिन्हें माता वैष्णो देवी में आस्था हो.’
इससे पहले दक्षिणपंथी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ परिवार से जुड़े संगठनों और भाजपा ने एडमिशन लिस्ट रद्द करने की मांग को लेकर जम्मू में विरोध प्रदर्शन किए थे.
एलजी के विरोध में राजनीतिक दल
एलजी, जो श्राइन बोर्ड के अध्यक्ष भी हैं, उनके द्वारा उक्त ज्ञापन को स्वीकार किए जाने पर कई राजनीतिक दलों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है.
सूबे में सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) के प्रवक्ता इमरान नबी डार ने कहा, ‘यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि एलजी ने इतना विभाजनकारी और सांप्रदायिक ज्ञापन स्वीकार कर लिया है. पूरे देश में सभी धर्मों के छात्र अल्पसंख्यक संस्थानों में पढ़ते हैं. कई हिंदू छात्र अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी और जामिया मिलिया इस्लामिया में पढ़ते हैं. कभी किसी ने इसका विरोध नहीं किया.’
एनसी के एक अन्य नेता और विधायक तनवीर सादिक ने भाजपा पर संस्थाओं का सांप्रदायिकीकरण करने और समाज को बांटने का आरोप लगाते हुए कहा, ‘अगर अस्पताल, स्कूल, विश्वविद्यालय और मेडिकल कॉलेज धर्म के आधार पर दाखिला लेने लगे.. तब हम किस दिशा में जा रहे हैं? क्या कल को मरीजों का इलाज भी उनके धर्म के अनुसार होगा? क्या योग्यता को बहुमत की संतुष्टि के लिए दरकिनार कर दिया जाएगा?’
सादिक ने कहा कि जहां प्रवेश प्रक्रिया पूरी तरह योग्यता पर आधारित है, वहां भाजपा का रुख न केवल गुमराह करने वाला है बल्कि खतरनाक भी है. उन्होंने कहा, ‘किसी धार्मिक स्थल से वित्त पोषित संस्थान अपने आप में धर्म आधारित संस्था नहीं बन जाता. श्रद्धा से दी गई दान राशि को भेदभाव का औजार नहीं बनाया जा सकता. छोटे राजनीतिक लाभ के लिए हमारी संस्थाओं को आस्था के युद्धक्षेत्र में न बदलें. आप एक टाइम बम लगा रहे हैं जो फूटने पर ऐसा विभाजन पैदा करेगा जिसे कभी भरा नहीं जा सकेगा.’
सूबे की विपक्षी पार्टी पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने भाजपा के इस कदम को शर्मनाक बताते हुए कहा, ‘नए कश्मीर में अब मुसलमानों के खिलाफ भेदभाव शिक्षा तक फैल चुका है. विडंबना यह है कि इस मुस्लिम विरोधी भेदभाव को भारत के एकमात्र मुस्लिम बहुल राज्य में लागू किया जा रहा है.. एकमात्र ऐसे राज्य में जिसका मुख्यमंत्री मुसलमान है.’
हिंदुत्व संगठनों ने किया था विरोध
गौरतलब है कि इससे पहले जम्मू कश्मीर बोर्ड ऑफ प्रोफेशनल एंट्रेंस एग्जामिनेशन (जेकेबीओपीईई) ने श्री माता वैष्णोदेवी इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस में दाखिले के लिए 50 छात्रों की सूची जारी की थी, जिसमें 42 कश्मीर के और 8 जम्मू के छात्रों का नाम था.
इसके बाद विहिप और बजरंग दल ने कटरा में संस्थान के बाहर प्रदर्शन किया और वैष्णोदेवी श्राइन बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी का पुतला जलाया.
विहिप के जम्मू कश्मीर अध्यक्ष राजेश गुप्ता ने कहा कि 2025-26 सत्र के दाखिले रोके जाएं और प्रबंधन अपनी ‘गलती’ सुधारते हुए सुनिश्चित करे कि अगली बार चुने जाने वाले छात्रों में बहुमत हिंदू हों. उन्होंने इस बार तैयार की गई 50 छात्रों की सूची को ‘मेडिकल कॉलेज का इस्लामीकरण करने की साजिश’ बताया.
वहीं अधिकारियों ने कहा था कि सभी दाखिले नियमों के अनुसार किए गए हैं और राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप हैं.
