जम्मू: पुलिस अधिकारी के ड्रग तस्करों से जुड़ाव के बारे में बोलने वाले पत्रकार का घर गिराया गया

गुरुवार को जम्मू में अधिकारियों ने सरकारी ज़मीन पर बने होने का हवाला देते हुए स्थानीय पत्रकार अरफ़ाज़ अहमद डैंग का घर गिरा दिया. अरफ़ाज़ ने इस महीने की शुरुआत में नशीली पदार्थों के तस्करी रैकेट के सिलसिले में गिरफ़्तार किए गए संदिग्ध ड्रग तस्करों का नाम एक पुलिस अधिकारी से जोड़ा था.

जम्मू में पत्रकार अरफाज अहमद डिंग का गिरा हुआ पारिवारिक घर. (फोटो: द वायर)

श्रीनगर: जम्मू में अधिकारियों ने गुरुवार (27 नवंबर) को एक पत्रकार का घर गिरा दिया, जिसने एक पुलिस अधिकारी को संदिग्ध ड्रग तस्करों से जोड़ा था, जिन्हें इस महीने की शुरुआत में एक नशीली पदार्थों के एक बड़े तस्करी रैकेट में गिरफ्तार किया गया था.

हालांकि, जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने जम्मू के पत्रकार अरफाज अहमद डैंग को खास तौर पर निशाना बनाने के आरोपों से इनकार किया, जिनके घर को गुरुवार सुबह पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों के जवानों की भारी तैनाती के बीच गिरा दिया गया.

जम्मू-कश्मीर के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने जम्मू (ईस्ट) के सब-डिविजनल पुलिस ऑफिसर के तौर पर तैनात एक डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ़ पुलिस (डीएसपी) के खिलाफ़ डैंग के आरोपों को गलत बताया, जिनका 26 अक्टूबर को ट्रांसफर कर दिया गया था.

जम्मू के डिजिटल प्लेटफॉर्म न्यूज़ सेहर इंडिया, जिसके सोशल मीडिया पर लगभग पांच लाख फॉलोअर्स और सब्सक्राइबर हैं, पर एक ब्रॉडकास्ट के दौरान डैंग ने नए डीएसपी की भी तारीफ़ की थी, जिन्होंने ड्रग रैकेट का भंडाफोड़ करने वाली टीम को लीड किया था.

ड्रग से जुड़ी जांच की देखरेख कर रहे पुलिस अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, ‘दोनों अधिकारियों के बीच कुछ चल रहा है.’ उन्होंने और जानकारी देने से इनकार कर दिया और कहा, ‘हम इसकी जांच करेंगे.’

एक सूत्र ने बताया कि जम्मू विकास प्राधिकरण (जेडीए) ने बुधवार रात करीब 10 बजे पुलिस को घर गिराने का आदेश भेजा था और गुरुवार सुबह जम्मू के चन्नी में एक मंज़िला इमारत को गिराने के लिए कम से कम तीन से चार भारी खुदाई करने वाली मशीनें भेजी गईं.

मलबे में तब्दील डैंग का पारिवारिक घर. (फोटो: द वायर)

घर गिराने की वजह से डैंग का परिवार, जिसमें उनके बूढ़े माता-पिता, उनकी पत्नी और उनके तीन बच्चे शामिल हैं, बेघर हो गया है.

द वायर से बात करते हुए डैंग ने माना कि घर जम्मू विकास प्राधिकरण की ज़मीन पर बना था. हालांकि, उन्होंने कहा कि घर उनके पिता गुलाम कादिर के नाम पर रजिस्टर्ड था, जिन्होंने करीब 40 साल पहले एक मंज़िला मकान बनवाया था.

उन्होंने आरोप लगाया कि जम्मू-कश्माीर हाईकोर्ट ने जेडीए को जम्मू के कुछ इलाकों से कब्ज़ा हटाने का निर्देश दिया था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई क्योंकि कब्ज़ा करने वाले ‘रसूखदार लोग’ हैं.

डैंग ने कहा, ‘हमें जेडीए से (ध्वस्तीकरण) का नोटिस मिला, लेकिन यह मेरे नाम पर जारी किया गया था, जबकि घर मेरा नहीं था. वे साफ़ तौर पर मेरी पत्रकारिता की वजह से मेरे पीछे पड़े हैं. कानूनी प्रक्रिया को ताक पर रख दिया गया है. जो कुछ भी किया गया है वह असंवैधानिक है. मुझे भरोसा है कि अदालतें मुझे न्याय देंगी, लेकिन इसमें सालों लग सकते हैं. तब तक मैं अपने परिवार को कहां ले जाऊंगा?’

नागरिक समाज के कुछ लोगों और पत्रकारों ने निंदा की

जम्मू के जाने-माने नागरिक समाज कार्यकर्ता और वरिष्ठ वकील शेख शकील अहमद ने इस ‘चुनिंदा’ कार्रवाई की आलोचना की और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से केंद्र शासित प्रदेश में ‘कार्रवाई करने और कानून का राज स्थापित करने’ का आग्रह किया.

उन्होंने कहा, ‘क्या घर गिराने से पहले सही प्रक्रिया का पालन किया गया था? हमारे पास जम्मू के जानीपुर में लेफ्टिनेंट गवर्नर (लद्दाख के) कविंदर गुप्ता का घर है, जो गैर-कानूनी ज़मीन पर बना है. उनके मामले में कोई कार्रवाई क्यों नहीं लिया गया? क्या जम्मू-कश्मीर में ऐसे ही प्रशासन होगा?’

मालूम हो कि सीएम अब्दुल्ला आवास और शहरी विकास विभाग का जिम्मा भी संभालते हैं, जिसके अंतर्गत जेडीए काम करता है.

इस कार्रवाई की निंदा करते हुए जम्मू के वरिष्ठ पत्रकार ज़फ़र चौधरी ने कहा कि पुलिस अधिकारी पर डैंग और उनके परिवार के सदस्यों के लगाए गए आरोप ‘चिंताजनक’ हैं.

उन्होंने एक फेसबुक पोस्ट में कहा, ‘मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को पता लगाना चाहिए कि क्या इस मामले में कानून का सही पालन किया गया था. क्या मुख्यमंत्री खुद यह मानते हैं कि यह एक रूटीन मामला था, कानून की नज़र में सही था, और इस परिवार को इस ‘स्पेशल ट्रीटमेंट’ के लिए लाइन से नहीं उठाया गया था. दुख की बात है कि राष्ट्रीय सुरक्षा की आड़ में बुलडोज़र जस्टिस को पहले ही गैर-कानूनी तरीके से सामान्य बना दिया गया है, और अब निजी परेशानियों के लिए भी उन्हीं को इस्तेमाल करने की इजाज़त दी जाएगी? यह बहुत परेशान करने वाला है.’

घर गिराने से पहले कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किए जाने के आरोपों पर टिप्पणी के लिए जेडीए अधिकारियों से संपर्क नहीं हो सका.

यह तोड़फोड़ जम्मू-कश्मीर पुलिस के 14 नवंबर को जम्मू के शास्त्री नगर के पास दो आरोपियों से 3.26 किलोग्राम हेरोइन बरामद करके सीमा पार ड्रग रैकेट का भंडाफोड़ करने का दावा करने के कुछ दिनों बाद हुई. हालांकि पुलिस ने शुरू में आरोपियों की पहचान नहीं बताई, लेकिन जम्मू के सीनियर सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस जोगिंदर सिंह ने बाद में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि आरोपियों की पहचान जौरियन के करण शर्मा और उधमपुर के नीलेश वर्मा के रूप में हुई है.

सिंह ने कहा कि गांधी नगर पुलिस थाने में 249/2025 नंबर की एक एफआईआर दर्ज की गई है और ‘रैकेट की चेन पंजाब और सीमा पार तक फैली हुई थी.’ उन्होंने दावा किया कि गिरफ्तार किए गए दोनों लोग ‘पाकिस्तान में हैंडलर्स के संपर्क में थे.’

इस रैकेट का भंडाफोड़ डीएसपी सचित शर्मा की नेतृत्व वाली पुलिस टीम ने किया, जिन्होंने इलाके में अपनी पोस्टिंग के कुछ ही हफ़्तों के अंदर अंतरराष्ट्रीय बाजार में 22 करोड़ रुपये से ज़्यादा कीमत की बड़ी ड्रग्स की खेप पकड़ी.

न्यूज़ सेहर इंडिया के फेसबुक पेज पर ब्रॉडकास्ट के दौरान डैंग ने जम्मू में ड्रग माफिया पर कार्रवाई करने के लिए शर्मा और दूसरे पुलिस अधिकारियों की तारीफ़ की थी.

आधिकारिक सूत्रों के हवाले से डैंग ने आरोप लगाया कि पुलिस जांच से पता चला है कि जम्मू पुलिस द्वारा बरामद तीन किलो हेरोइन में से एक किलो जम्मू के नरवाल बाला के हिस्ट्रीशीटर मोहम्मद यूसुफ उर्फ ​​शमा, उसके भाई मोहम्मद असलम, जो पहले उपसरपंच रह चुके हैं, और यूसुफ के बेटे आमिर को दी जानी थी.

द वायर इन दावों को खुद से सत्यापित नहीं कर सका.

डैंग ने आरोप लगाया, ‘पुलिस ने उनके ऑफिस और घरों पर छापा मारा, इस दौरान शमा और असलम भाग गए, जबकि आमिर को जांच के लिए गांधी नगर पुलिस थाना ले जाया गया. इस परिवार ने इंटरव्यू में माना है कि वे घोड़ागाड़ी चलाकर गुज़ारा करते थे. आज उनके पास करोड़ों की संपत्ति जैसे घर और कार हैं. रियल एस्टेट बिज़नेस की आड़ में उन्होंने कई सालों से युवाओं को हेरोइन बेचकर पैसा जमा किया है.’

उन्होंने आगे कहा, ‘ये सफेदपोश अपराधी हमारे समाज में ड्रग्स का ज़हर घोल रहे हैं. पुलिस को उनकी संपत्ति ज़ब्त करनी चाहिए और जांच करनी चाहिए कि उन्होंने यह पैसा कैसे कमाया.’

स्थानीय लोगों के हवाले से पत्रकार ने आरोप लगाया कि पिछले डीएसपी ‘कई सालों तक’ इलाके में पदस्थ थे, लेकिन उन्होंने ‘जानबूझकर’ परिवार की जांच नहीं की, जिससे पता चलता है कि वह भी ड्रग तस्करी में शामिल थे.

उधर, एक पुलिस सूत्र ने दावा किया है कि 2015 से अब तक चार पुलिस एफआईआर में डैंग का नाम आया है, हालांकि उन्होंने इन मामलों की खास जानकारी नहीं दी. उन्होंने यह भी कहा कि कुछ साल पहले एक आतंकवादी केस के सिलसिले में उनके घर की तलाशी ली गई थी.

द वायर इन दावों को तुरंत सत्यापित नहीं कर सका.

सूत्रों के मुताबिक, डैंग ने जम्मू के भटिंडी इलाके में शमा के परिवार से एक घर खरीदा था, जो कथित तौर पर रियल एस्टेट के बिजनेस में हैं. जेडीए ने लगभग तीन से चार महीने पहले घर को गिरा दिया था क्योंकि यह कथित तौर पर सरकारी ज़मीन पर बना पाया गया था.

सूत्रों ने कहा, ‘डैंग और शमा के बीच इस पर कुछ कहासुनी हुई थी और कुछ आधिकारिक शिकायतें भी दर्ज की गई थीं.’ अपने ब्रॉडकास्ट में डैंग ने आरोप लगाया कि पूर्व डीएसपी ने आरोपी परिवार से ज़मीन खरीदी थी, जब वह जम्मू (ईस्ट) के सब-डिवीजनल पुलिस अधिकारी के तौर पर पदस्थ थे.

डैंग ने आरोप लगाया, ‘वह आजकल उस ज़मीन पर घर बना रहे हैं. उनके रहने के दौरान परिवार के खिलाफ कोई कार्रवाई क्यों नहीं लिया गया? इसकी जांच होनी चाहिए और आरोपियों को सख्त सज़ा मिलनी चाहिए.’

गुरुवार सुबह डैंग के घर के बाहर से न्यूज़ सेहर इंडिया के फेसबुक पेज पर लाइव-स्ट्रीम किए गए 50 सेकेंड के वीडियो में तोड़-फोड़ की देखरेख कर रहे कुछ पुलिस अधिकारियों को कैमरा छीनकर ब्रॉडकास्ट रोकने की कोशिश करते हुए देखा जा सकता है.

डैंग अपने परिवार के घर के बाहर से रिपोर्टिंग कर रहे हैं, जब उसे गिराया जा रहा है. (फोटो: न्यूज़ सेहर इंडिया/फेसबुक से स्क्रीनशॉट)

डैंग ने एक पुलिस अधिकारी से कह रहे हैं, ‘प्लीज़ उसे मत छुओ. हम आपको परेशान नहीं कर रहे हैं.’ वह पुलिस अधिकारी अपनी छाती पर AK-47 राइफल लटकाए हुए था और उनके दाहिने हाथ में डंडा था.

कैमरे की तरफ मुड़कर उन्होंने कहा, ‘जम्मू में कई लोगों ने सरकारी ज़मीन पर कब्ज़ा किया है, लेकिन गिराने के लिए सिर्फ़ मेरे घर को चुना गया है क्योंकि हम सच दिखाते हैं. हम यहां 40 साल से रह रहे हैं. मैं बस अधिकारियों से थोड़ा और समय मांग रहा हूं.’

‘मैं एक पत्रकार हूं. देखो, देखो…’, वह चिल्लाते हैं और कैमरा हिलने के बाद ब्रॉडकास्ट कट जाता है.

इस दौरान अधिकारियों ने इलाके को सील कर दिया था और कुछ पत्रकार जो गुरुवार सुबह करीब 9:30 बजे शुरू हुई इस तोड़फोड़ की रिपोर्टिंग करने पहुंचे थे, उन्हें साइट से दूर रखा गया.

मीडिया से बात करते हुए डैंग के परेशान पिता कादिर ने कहा कि वह लगभग चार दशक पहले आतंकवाद के कारण डोडा ज़िले से यहां आ गए थे.

कादिर के पीछे उनका घर गिराया जा रहा था और उनका कहना था, ‘जब यह घर बना था तब जेडीए था ही नहीं. मैंने अपने बच्चों को पालने के लिए मज़दूरी की है. जिन लोगों की सैकड़ों कनाल ज़मीन पर गैर-कानूनी कब्ज़ा है, उन्हें छुआ तक नहीं गया, जबकि गरीब लोगों को निशाना बनाया जा रहा है. यह नाइंसाफ़ी है.’

(इस रिपोर्ट को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.)