नई दिल्ली: मणिपुर के कुकी-ज़ो संगठनों ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के राज्य के दो दिवसीय दौरे – जो शुक्रवार (12 दिसंबर) को खत्म हुआ, के कार्यक्रम से चूड़ाचांदपुर और कांगपोकपी जिलों को हटाए जाने पर नाराज़गी जताई है.
द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, कमेटी ऑन ट्राइबल यूनिटी और अन्य कुकी समूहों ने कहा कि राष्ट्रपति के दौरे ने आंतरिक रूप से विस्थापित कुकी-ज़ो लोगों के ‘दुख, आघात और अनसुलझी दुर्दशा’ को पूरी तरह से नज़रअंदाज़ कर दिया.
उन्होंने कहा कि स्थिति के लेकर यदि प्रतीकात्मक स्वीकृति भी मिली होती तो वह भी उन लगभग 50,000 कुकी-ज़ो लोगों के लिए मायने रखती, जो मई 2023 में मेइतेई लोगों के साथ जातीय संघर्ष शुरू होने के बाद से राहत शिविरों में दयनीय परिस्थितियों में रहने के लिए मजबूर हैं.
ज़ोमी काउंसिल, जो मणिपुर की आठ जनजातियों का शीर्ष संगठन है, ने कहा कि चूड़ाचांदपुर में संघर्ष से प्रभावित आदिवासी लोग राष्ट्रपति मुर्मू के दौरे का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे थे, जिससे राज्य के लोगों की तकलीफों को कम करने में मदद मिल सकती थी.
कुकी ऑर्गनाइजेशन फॉर ह्यूमन राइट्स ट्रस्ट ने कहा कि राष्ट्रपति का कार्यक्रम, जिसमें ‘इंफाल में मेइतेई ऐतिहासिक प्रतिरोध का जश्न मनाना और नगा क्षेत्रों में परियोजनाओं का उद्घाटन करना’ शामिल था – कुकी-ज़ो लोगों को संस्थागत रूप से मिटाए जाने जैसा है.
राष्ट्रपति ने मणिपुर यात्रा के दूसरे दिन की शुरुआत नुपी लाल दिवस की 86वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित एक समारोह में ब्रिटिश औपनिवेशिक शक्तियों के खिलाफ लड़ने वाली राज्य की महिला योद्धाओं को श्रद्धांजलि अर्पित करके की थी.
नुपी लाल उन दो महिला-नेतृत्व वाले विद्रोहों (1904 और 1939) को संदर्भित करता है, जिनमें मणिपुरी महिलाओं ने ब्रिटिश औपनिवेशिक नीतियों का विरोध किया और अपने अधिकारों व गरिमा की रक्षा की.
उन्होंने कहा, ‘यह दिवस सकारात्मक सामाजिक बदलाव लाने में महिलाओं की आवाज़ की ताकत का एक बेहतरीन उदाहरण है.’
बाद में उन्होंने नगा-बहुल जिले के मुख्यालय सेनापति में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में भाग लिया, जहां उन्होंने विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन किया और आधारशिला रखी. उन्होंने कहा, ‘मणिपुर के आदिवासी समुदायों के लिए गरिमा, सुरक्षा और विकास के अवसर और देश की प्रगति में उनकी अधिक भागीदारी एक राष्ट्रीय प्राथमिकता है.’ राष्ट्रपति मुर्मू ने मणिपुर के सभी समुदायों से शांति और सुलह के प्रयासों का समर्थन करने का आग्रह किया.
खबरों के अनुसार, कुकी विस्थापितों ने कहा कि 2023 से अब तक सबसे अधिक नुकसान झेलने के बावजूद उन्हें सभी आधिकारिक मुलाकातों से बाहर रखा गया.
हालांकि, राष्ट्रपति ने इंफाल घाटी में विस्थापित परिवारों से मुलाकात की, लेकिन कांगपोकपी और आसपास के पहाड़ी ज़िलों में राहत शिविरों में रह रहे कूकी-जो लोग ने कहा कि उन्हें अपनी चिंताओं को रखने या सुरक्षा और पुनर्वास से जुड़ी तात्कालिक ज़रूरतों पर ज्ञापन सौंपने का कोई औपचारिक अवसर नहीं दिया गया.
कांगपोकपी ज़िला आंतरिक विस्थापित कल्याण समिति ने कहा कि समुदाय ने राष्ट्रपति की यात्रा का बहिष्कार नहीं किया था, और स्पष्ट किया कि उनकी नाराज़गी प्रतिनिधित्व से वंचित रखे जाने के कारण है.
मालूम हो कि मई 2023 से अब तक राज्य में चल रहे जातीय हिंसा में 260 से ज़्यादा लोग मारे जा चुके हैं और हज़ारों लोग बेघर हो गए हैं. मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद फरवरी से मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लागू है.
