2025 में अभिव्यक्ति की आज़ादी के 14,800 से अधिक उल्लंघन, 117 गिरफ़्तारियां, आठ पत्रकारों की हत्या

'फ्री स्पीच कलेक्टिव' की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में अभिव्यक्ति की आज़ादी से जुड़े 40 हमलों में से 33 में पत्रकारों को निशाना बनाया गया. उत्पीड़न के 19 मामलों में से 14 पत्रकारों से जुड़े थे. अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के सर्वाधिक उल्लंघन गुजरात में दर्ज हुए, इसके बाद उत्तर प्रदेश और केरल रहे.

(इलस्ट्रेशन: परिप्लब चक्रवर्ती/द वायर)

नई दिल्ली: भारत में वर्ष 2025 में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के 14,875 उल्लंघनों के मामले दर्ज किए गए, जिनमें आठ पत्रकारों और एक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर की हत्या भी शामिल है.

यह जानकारी मंगलवार (23 दिसंबर) को ‘फ्री स्पीच कलेक्टिव’ द्वारा जारी रिपोर्ट में दी गई.

अभिव्यक्ति की आज़ादी से जुड़े मामलों की निगरानी करने वाले इस संगठन ने इस अवधि में सेंसरशिप, अदालतों द्वारा लगाए गए प्रतिबंध, शैक्षणिक स्वायत्तता पर नियंत्रण, फिल्मों पर सेंसरशिप, नीतिगत प्रतिबंध और कॉरपोरेट हस्तक्षेप जैसी घटनाओं को दर्ज किया.

रिपोर्ट के अनुसार, इस वर्ष अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़े मामलों में 117 गिरफ्तारियां भी दर्ज की गईं, जिनमें आठ पत्रकारों की गिरफ्तारी शामिल है.

फ्री स्पीच कलेक्टिव ने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़े 40 हमलों में से 33 पत्रकारों को निशाना बनाने वाले थे. 19 उत्पीड़न के मामलों में से 14 पत्रकारों से जुड़े थे. इसके अलावा अपने काम के दौरान पत्रकारों को धमकी मिलने के 12 मामलों को भी दर्ज किया गया.

साल भर में आठ पत्रकारों की हत्या हुई – दो उत्तर प्रदेश में और एक-एक अंडमान-निकोबार द्वीप समूह, छत्तीसगढ़, हरियाणा, कर्नाटक, ओडिशा और उत्तराखंड में. पंजाब में एक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर की भी हत्या की गई.

रिपोर्ट में कहा गया कि दो पत्रकार – कश्मीर के इरफान मेहराज और झारखंड के रूपेश कुमार – इस वर्ष भी गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत हिरासत में रहे. मेहराज मार्च 2023 से और कुमार जुलाई 2022 से जेल में हैं.

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के सबसे अधिक 108 उल्लंघन गुजरात में दर्ज हुए, इसके बाद उत्तर प्रदेश में 83 और केरल में 78 मामले दर्ज किए गए.

रिपोर्ट के अनुसार, इस वर्ष 11,385 सेंसरशिप की घटनाएं और 208 ‘लॉफेयर’ के मामले दर्ज किए गए- लॉफेयर का मतलब है कानूनी कार्यवाही का इस्तेमाल विरोधियों को परेशान करने के लिए करना.

सेंसरशिप के आंकड़ों में केंद्रीय सरकार द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर बड़ी संख्या में अकाउंट हटाने के निर्देश भी शामिल हैं. मई महीने में सरकार ने प्लेटफॉर्म पर 8,000 से अधिक अकाउंट्स पर प्रतिबंध लगाने का अनुरोध किया, जो किसी एक महीने में सबसे अधिक संख्या थी.

रिपोर्ट में वर्ष 2025 में इंटरनेट बंद करने, मोबाइल ऐप ब्लॉक करने जैसी 3,070 इंटरनेट नियंत्रण की घटनाएं भी दर्ज की गईं.

संगठन ने कहा कि इस वर्ष शिक्षा जगत में कम से कम 16 ‘गंभीर सेंसरशिप’ के मामले सामने आए. रिपोर्ट में फिल्मों के प्रमाणन को सेंसरशिप के टूल के रूप में ‘बेरोकटोक’ तरीके से इस्तेमाल किए जाने पर भी चिंता जताई गई.

इसका उदाहरण देते हुए रिपोर्ट में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा केरल अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में 19 फिल्मों की स्क्रीनिंग की अनुमति न देने का उल्लेख किया गया.

रिपोर्ट ने 2023 के डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट और नवंबर में अधिसूचित उसके नियमों को लेकर भी चिंता जताई, और कहा कि इससे पत्रकारिता को खतरा हो सकता है तथा सूचना के अधिकार कानून को कमजोर करके भारत की पारदर्शिता व्यवस्था प्रभावित हो सकती है.