नई दिल्ली: मध्य प्रदेश के इंदौर शहर को कई बार देश के सबसे स्वच्छ शहर का ख़िताब मिला है. विडंबना है कि इसी शहर में नगर निगम द्वारा सप्लाई किए गए दूषित पानी के सेवन से 2,000 से अधिक लोग बीमार पड़ गए हैं और करीब सात लोग जान गंवा चुके हैं.
द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, बुधवार को अधिकारियों ने बताया कि मृतकों में छह महीने का एक बच्चा और छह महिलाएं भी शामिल हैं. पिछले एक हफ्ते में इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र के 100 से अधिक लोगों को नगर निगम की पानी की सप्लाई लाइन से पानी पीने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया है.
अखबार के अनुसार, हालांकि अधिकारियों ने अभी तक आधिकारिक तौर पर मरने वालों की संख्या जारी नहीं की है, लेकिन जिला प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि यह आंकड़ा 10 को पार कर गया है.
बताया गया है कि इसे लेकर एक अधिकारी को नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया और दो अन्य को निलंबित कर दिया गया है.
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, इस बीच, इंदौर के मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने पुष्टि की कि अब तक सात लोगों की मौत हो गई है. उन्होंने कहा, ‘स्वास्थ्य विभाग ने भागीरथपुरा इलाके में डायरिया फैलने से तीन मौतों की सूचना दी है. लेकिन मेरी जानकारी के अनुसार, इस बीमारी से पीड़ित चार और लोगों को अस्पतालों में लाया गया था और उनकी भी मौत हो गई.’
मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्देश पर इंदौर नगर निगम (आईएमसी) के पब्लिक हेल्थ इंजीनियरिंग (पीएचई) विभाग के इंचार्ज सब-इंजीनियर शुभम श्रीवास्तव को नौकरी से निकाल दिया गया, जबकि जोनल अधिकारी शालिग्राम सितोले और असिस्टेंट इंजीनियर योगेश जोशी को निलंबित कर दिया गया.
आईएमसी कमिश्नर दिलीप यादव ने द हिंदू को बताया कि स्वच्छ पानी आपूर्ति की जिम्मेदारी जिन तीन अधिकारियों पर थी, वे समय रहते रिसाव का पता नहीं लगा सके.
उन्होंने कहा, ‘मुख्य सप्लाई लाइन के ऊपर बने शौचालय के ड्रेनेज से बड़ा रिसाव हुआ था, जिसे ठीक कर दिया गया है और शौचालय को तोड़ दिया गया है. कई अन्य रिसाव भी मिले और उनकी मरम्मत कर दी गई. हम कल पानी की जांच करेंगे, रिसाव और गुणवत्ता दोनों की पुष्टि के बाद ही सप्लाई शुरू की जाएगी.’
उन्होंने बताया कि क्षेत्र में लोगों की जरूरत के लिए 100 से अधिक पानी के टैंकर भेजे गए हैं.
तीन सदस्यीय जांच समिति गठित
भागीरथपुरा क्षेत्र की इस त्रासदी की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की गई है. समिति की अध्यक्षता आईएएस अधिकारी नवजीवन पंवार करेंगे. इसके सदस्य अधीक्षण अभियंता प्रदीप निगम और महात्मा गांधी मेमोरियल (एमजीएम) मेडिकल कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर शैलेश राय होंगे.
यह समिति अगस्त में क्षेत्र के लिए नई पानी सप्लाई लाइन के जारी टेंडर में हुई देरी की भी जांच करेगी.
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के कार्यालय से जारी एक बयान में कहा गया, ‘आज तक 7,992 घरों का सर्वे किया गया, जिसमें लगभग 39,854 लोगों की जांच की गई, जिनमें से लगभग 2,456 संदिग्ध मरीज पाए गए, जिन्हें मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया. आज तक 212 मरीजों को अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जिनमें से 50 मरीजों को डिस्चार्ज कर दिया गया है. वर्तमान में अस्पतालों में भर्ती मरीजों की संख्या 162 है और आईसीयू में भर्ती मरीजों की संख्या 26 है.’
कैबिनेट मंत्री और इंदौर-1 के विधायक कैलाश विजयवर्गीय ने घटना को ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ बताया और कहा कि अस्पताल में भर्ती मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है. उन्होंने कहा, ‘कल यह संख्या बढ़ रही थी, आज इसमें कमी आई है.’ मुख्यमंत्री ने भी क्षेत्र का दौरा किया और अस्पतालों में मरीजों से मुलाकात की.
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मांगी रिपोर्ट
इसी बीच, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य अधिकारियों को नोटिस जारी कर 2 जनवरी तक स्थिति रिपोर्ट देने को कहा है. दो याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान अदालत ने मरीजों का मुफ्त इलाज सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, क्योंकि याचिकाकर्ता (भागीरथपुरा निवासी) ने आरोप लगाया था कि निजी अस्पताल बिना पैसे के इलाज से इनकार कर रहे हैं.
याचिकाकर्ता के वकील अभिषेक धनोदकर ने कहा, ‘हमने अदालत से यह भी अनुरोध किया है कि सेवानिवृत्त हाईकोर्ट जज की अध्यक्षता में जांच समिति गठित की जाए, ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों.’
टेंडर में देरी के सवाल पर आईएमसी कमिश्नर यादव ने कहा कि यह परियोजना एएमआरयूटी (अटल मिशन फॉर रीजूवनेशन एंड अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन) योजना के तहत होनी थी और काम शुरू करने के लिए धनराशि का इंतजार था.
इस बीच, राज्य कांग्रेस ने भी इस मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय फैक्ट-फाइडिंग समिति गठित की है, जिसमें पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा, जयवर्धन सिंह और तीन विधायक शामिल हैं. समिति 5 जनवरी तक अपनी रिपोर्ट पार्टी नेतृत्व को सौंपेगी.
पत्रकार के सवाल पर भड़के मंत्री
इस बीच सोशल मीडिया पर वरिष्ठ पत्रकार अनुराग द्वारी ने एक वीडियो साझा किया है, जहां वे मध्य प्रदेश सरकार में नगरीय विकास व आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से दूषित पानी से हुई मौतों को लेकर सवाल करते हैं और मंत्री उन्हें अभद्र भाषा में ‘फोकट’ के सवाल न पूछने को कहते हैं.
भागीरथपुरा का इलाका मंत्री विजयवर्गीय के विधानसभा क्षेत्र ‘इंदौर-1’ के तहत आता है. इसी के मद्देनजर पत्रकार ने विजयवर्गीय से पूछा था कि क्षेत्र में दूषित पानी से हुई मौत और कई बीमार मरीजों द्वारा निजी अस्पतालों को चुकाए गए बिल का भुगतान नहीं मिला है और इस इलाके के नागरिकों के लिए पीने के पानी की ठीक व्यवस्था नहीं की गई है.
देश के सबसे साफ शहर में गंदा पानी पीने से 10 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है जिस शख्स पर लोगों को साफ पानी पिलाने का जिम्मा है वो सवालों को फोकट बता रहे हैं हमारे सवालों को “घंटे” में उड़ा रहे हैं @manishdekoder @GargiRawat @Abhinav_Pan @sanket pic.twitter.com/5iIF2AiFZ7
— Anurag Dwary (@Anurag_Dwary) December 31, 2025
वीडियो में नजर आता है कि वे इस पर नाराज होने लगते हैं और कहते हैं कि ‘छोड़ो यार… फोकट’ के सवाल न पूछो.’ पत्रकार के आपत्ति जताने पर वे आगे और आपत्तिजनक शब्द कहते हुए निकल जाते हैं और फिर मंत्री के साथ के लोग भी पत्रकार से बहस करते हुए अभद्र तरीके से बात करते हुए भी दिखते हैं.
सोशल मीडिया पर इस वीडियो के प्रसारित होने के बाद प्रदेश में विपक्षी कांग्रेस के अध्यक्ष जीतू पटवारी और पार्टी नेता उमंग सिंघार ने मुख्यमंत्री मोहन यादव से विजयवर्गीय से नैतिकता के आधार पर तत्काल इस्तीफा लेने की मांग की थी.
बता दें कि पत्रकार अनुराग द्वारी एनडीटीवी से संबद्ध हैं. एनडीटीवी की वेबसाइट के मुताबिक, इस बात को लकर विवाद बढ़ने पर विजयवर्गीय ने अपने शब्दों पर खेद प्रकट करते हुए माफी मांगी है.
