भाजपा समर्थित प्रदर्शनों के बीच वैष्णोदेवी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की अनुमति वापस ली गई

राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग ने जम्मू-कश्मीर के श्री माता वैष्णो देवी इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस को एमबीबीएस में दाख़िले की अनुमति को वापस ले लिया है. पिछले साल नीट रैंकिंग के आधार पर पहले बैच में दाख़िला पाने वाले 50 छात्रों में से 47 मुस्लिम थे, जिसके बाद हिंदुत्व संगठनों और भाजपा के नेताओं ने मेरिट लिस्ट का विरोध करना शुरू कर दिया था.

जम्मू-कश्मीर के रियासी ज़िले स्थित श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस की एमबीबीएस प्रवेश सूची को रद्द करने की मांग को लेकर बजरंग दल के सदस्यों ने जम्मू में मंगलवार, 6 जनवरी 2026 को प्रदर्शन किया. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) ने जम्मू-कश्मीर के श्री माता वैष्णो देवी (एसएमवीडी) इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस को एमबीबीएस पाठ्यक्रम में दाख़िले की पिछले साल सितंबर में दी गई अनुमति को वापस ले लिया है.

यह फैसला मंगलवार (6 जनवरी) को जम्मू के सिविल सचिवालय के बाहर नवगठित श्री माता वैष्णो देवी (एसएमवीडी) संघर्ष समिति द्वारा संस्थान में मुस्लिम और अन्य गैर-हिंदू छात्रों के दाख़िले के विरोध में किए गए प्रदर्शन के कुछ घंटों बाद आया. इस समिति को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का समर्थन हासिल है.

ख़बरों के मुताबिक, एनएमसी ने ‘न्यूनतम मानकों के पालन में गंभीर खामियों’ का हवाला देते हुए एसएमवीडी विश्वविद्यालय को जारी ‘लेटर ऑफ परमिशन’ (एलओपी) वापस ले ली है. विश्वविद्यालय का बोर्ड ही इस मेडिकल संस्थान का संचालन करता है.

पिछले साल नीट रैंकिंग के आधार पर पहले बैच में दाख़िला पाने वाले 50 छात्रों में से 47 मुस्लिम, एक सिख और केवल दो हिंदू थे. जिसके बाद हिंदुत्व संगठनों और भाजपा के नेताओं ने मेरिट लिस्ट का विरोध करना शुरू कर दिया था. 

एनएमसी ने इन 50 छात्रों को, जिनका इस साल दाखिला हुआ था, सूबे के अन्य सरकारी मेडिकल कॉलेजों में स्थानांतरित करने के निर्देश दिए हैं.

इससे पहले, आयोग की एक टीम ने 3 जनवरी को रियासी ज़िले के काक्रियाल क्षेत्र में स्थित संस्थान का ‘आकस्मिक निरीक्षण’ किया था. एसएमवीडी संघर्ष समिति के संयोजक सुखवीर सिंह मंकोटिया ने 4 जनवरी को बयान जारी कर कहा था कि यह निरीक्षण ‘समिति के अनुरोध’ पर किया गया था. 

हिंदुत्व समूहों के समर्थन वाली इस समिति ने मेरिट लिस्ट में केवल दो हिंदू छात्र के नाम आने को ‘हिंदुओं के साथ भेदभाव’ करार देते हुए जम्मू में बड़े आंदोलन की चेतावनी दी थी. समिति का दावा है कि संस्थान में मुस्लिम और गैर-हिंदू छात्रों की मौजूदगी से कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती है.

गौरतलब है कि मुस्लिम और अन्य गैर-हिंदू छात्रों के दाख़िले के खिलाफ नवंबर में विरोध तेज़ हो गया था. बजरंग दल और अन्य हिंदुत्व संगठनों के कार्यकर्ताओं ने संस्थान में घुसकर प्रदर्शन किया था. प्रदर्शनकारियों ने यह कहते हुए संस्थान बंद करने की मांग की थी कि इसे ‘हिंदू तीर्थयात्रियों के दान’ से चलाया जा रहा है इसलिए यहां एमबीबीएस सीटें केवल हिंदू छात्रों के लिए आरक्षित होनी चाहिए.

हालांकि, मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली जम्मू-कश्मीर सरकार ने एसएमवीडी विश्वविद्यालय के अधिनियम का हवाला देते हुए इस तरह की किसी व्यवस्था से इनकार कर दिया और भाजपा को विश्वविद्यालय को अल्पसंख्यक संस्थान घोषित करने की चुनौती दी.

उमर अब्दुल्ला और नेशनल कॉन्फ्रेंस के अन्य वरिष्ठ नेताओं ने आरोप लगाया है कि भाजपा इस मुद्दे का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए कर रही है.

प्राप्त जानकारी के अनुसार, एसएमवीडी विश्वविद्यालय ने 2025-26 सत्र के लिए 50 एमबीबीएस सीटों के साथ नया मेडिकल कॉलेज खोलने की अनुमति के लिए दिसंबर 2024 में एनएमसी को आवेदन दिया था. आयोग ने 8 सितंबर 2025 को इसकी मंजूरी दी थी. 

रिपोर्ट में कहा गया है कि यह अनुमति कई शर्तों के अधीन थी, जिनमें आवश्यक मानकों को बनाए रखना, अचानक निरीक्षण की अनुमति देना, सही जानकारी उपलब्ध कराना और नवीनीकरण से पहले कमियों को दूर करना शामिल था.

मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड (एमएआरबी) ने यह अधिकार भी सुरक्षित रखा था कि गलत जानकारी, नियमों का उल्लंघन या मानकों को पूरा न करने की स्थिति में अनुमति वापस ली जा सकती है या रद्द की जा सकती है. 

भाजपा के वरिष्ठ नेता और उधमपुर पूर्व से विधायक आरएस पठानिया ने एनएमसी के फैसले का स्वागत करते हुए कहा, ‘क्वालिटी ओवर क्वांटिटी. आवश्यक मानकों को पूरा न करने के कारण एनएमसी ने एसएमवीडीआईएमई की 50 एमबीबीएस सीटों की अनुमति रद्द की है. यह गुणवत्ता के प्रति प्रतिबद्धता को दोहराता है. प्रभावित सभी छात्रों को केंद्रीय शासित प्रदेश के अन्य कॉलेजों में सुपरन्यूमरेरी सीटों पर सहज रूप से स्थानांतरित किया जाएगा.’