केंद्र सरकार का निर्देश- आदिवासी स्कूल कार्यक्रमों में सांसदों व विधायकों को बुलाएं

केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय के अधीन कार्यरत संस्था नेशनल एजुकेशन सोसायटी फॉर ट्राइबल स्टूडेंट्स, जो एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों की देखरेख करती है, ने स्कूलों को अपने आयोजनों में सांसदों और विधायकों को आमंत्रित करने की सलाह दी है. शिक्षाविदों ने इस क़दम को स्कूलों के राजनीतिकरण क़रार देते हुए आलोचना की है.

(फोटो: फेसबुक)

नई दिल्ली: केंद्र सरकार द्वारा संचालित आदिवासी बच्चों के आवासीय स्कूलों से कहा गया है कि वे शैक्षणिक कार्यक्रमों सहित विभिन्न आयोजनों में सांसदों और विधायकों को अतिथि के रूप में आमंत्रित करें.

शिक्षाविदों ने इस कदम को स्कूलों के राजनीतिकरण करार देते हुए आलोचना की है.

द टेलीग्राफ की रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय के अधीन कार्यरत संस्था नेशनल एजुकेशन सोसायटी फॉर ट्राइबल स्टूडेंट्स (एनईएसटीएस), जो एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों (ईएमआरएस) की देखरेख करती है, ने स्कूलों को अपने आयोजनों में सांसदों और विधायकों को आमंत्रित करने की सलाह दी है.

एनईएसटीएस की उपायुक्त कुमुद कुशवाहा द्वारा सभी ईएमआरएस स्कूलों को जारी एक सर्कुलर में कहा गया है कि ईएमआरएस नियमित रूप से वार्षिक समारोह, स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस, राज्य-स्तरीय खेल प्रतियोगिताएं और राज्य-स्तरीय सांस्कृतिक सम्मेलन जैसे महत्वपूर्ण शैक्षणिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रीय कार्यक्रम आयोजित करते हैं. ये आयोजन आदिवासी छात्रों में गर्व, आत्मविश्वास और उपलब्धि की भावना विकसित करने में अहम भूमिका निभाते हैं तथा शैक्षणिक, खेल और सांस्कृतिक गतिविधियों में उनकी प्रतिभा को प्रदर्शित करने का महत्वपूर्ण मंच प्रदान करते हैं.

सर्कुलर में कहा गया है, ‘माननीय सांसदों, माननीय विधायकों, जिला कलेक्टरों और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों जैसे वरिष्ठ जनप्रतिनिधियों और स्थानीय गणमान्य व्यक्तियों की भागीदारी इन अवसरों के महत्व को काफी बढ़ाती है. उनकी उपस्थिति छात्रों के लिए प्रेरणा और प्रोत्साहन का स्रोत बनती है तथा ईएमआरएस, स्थानीय प्रशासन और समुदाय के बीच संस्थागत संबंधों को मजबूत करती है. अतः सभी ईएमआरएस को सलाह दी जाती है कि वे स्कूल द्वारा आयोजित प्रमुख कार्यक्रमों में भागीदारी के लिए माननीय सांसदों, विधायकों, जिला कलेक्टरों और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों सहित स्थानीय गणमान्य व्यक्तियों को आमंत्रित करें.’

हालांकि, स्कूलों के संचालन और पाठ्यक्रम से संबंधित सरकार के प्रमुख नीति दस्तावेज ऐसे कार्यक्रमों में सांसदों और विधायकों को आमंत्रित करने का समर्थन नहीं करते.

स्कूल शिक्षा पर राष्ट्रीय पाठ्यचर्या ढांचा (एनसीएफएसई), जिसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के आधार पर राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने तैयार किया है, स्कूल आयोजनों में अभिभावकों और स्थानीय समुदाय को आमंत्रित करने की वकालत करता है.

एनसीएफएसई में कहा गया है, ‘अभिभावकों को स्कूल के कार्यक्रमों और समारोहों में आमंत्रित किया जाना चाहिए. स्कूलों को उन्हें केवल दर्शक बनाकर रखने के बजाय ऐसे आयोजनों में सक्रिय रूप से शामिल करने के तरीके खोजने चाहिए. इसलिए ऐसे कार्यक्रमों और समारोहों की रूपरेखा अभिभावकों की सक्रिय भागीदारी को ध्यान में रखकर बनाई जानी चाहिए.’

इसमें आगे कहा गया है, ‘स्कूल को केवल अभिभावकों तक ही सीमित रहने की ज़रूरत नहीं है. जिन व्यापक समुदायों से छात्र आते हैं, उन्हें वार्षिक दिवस और अन्य स्कूल कार्यक्रमों के माध्यम से तथा स्थानीय आयोजनों में स्कूल की भागीदारी के जरिए जोड़ा जाना चाहिए.’

अखबार के अनुसार, राज्य के एक विश्वविद्यालय के कुलपति और एक शिक्षाविद् ने स्कूल कार्यक्रमों में सांसदों और विधायकों को आमंत्रित करने पर चिंता जताई.

उन्होंने कहा, ‘स्कूल मुख्य रूप से सत्तारूढ़ पार्टी के सांसदों और विधायकों को ही आमंत्रित करेंगे. ऐसे नेता केवल सरकार की उपलब्धियों और पार्टी की विचारधारा पर ही बोलेंगे. यह कदम बच्चों के मन को सत्तारूढ़ पार्टी की विचारधारा के अनुरूप ढालने की रणनीति का हिस्सा है. अब वे यह प्रयोग सरकारी स्कूलों में कर रहे हैं. धीरे-धीरे इसे निजी स्कूलों तक भी बढ़ाया जाएगा.’

दिल्ली के लक्ष्मण पब्लिक स्कूल की पूर्व प्राचार्य और एक शिक्षाविद् ने सांसदों और विधायकों को आमंत्रित करने में व्यावहारिक कठिनाइयों की ओर भी इशारा किया.

उन्होंने कहा, ‘वे अपने अन्य कार्यक्रमों के कारण समय पर नहीं पहुंचते. कभी-कभी निर्धारित दौरे भी रद्द कर देते हैं, जिससे स्कूल को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है.’