नई दिल्ली: छत्तीसगढ़ के एक सरकारी स्कूल की प्रधानाध्यापिका को शनिवार (10 जनवरी) को निलंबित कर दिया गया. उन पर आरोप है कि उन्होंने एक प्रश्न पत्र तैयार किया था, जिसमें कथित तौर पर एक प्रश्न धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला था, जिसके चलते दक्षिणपंथी समूहों ने विरोध प्रदर्शन किया.
इंडियन एक्सप्रेस ने अधिकारियों के हवाले से बताया है कि पिछले सप्ताह विद्यालय में आयोजित अर्धवार्षिक परीक्षाओं के दौरान प्रधानाध्यापिका ने कक्षा चार के लिए एक अंग्रेजी प्रश्नपत्र तैयार किया था, जिसमें ‘मोना के कुत्ते का नाम क्या है?’ प्रश्न के बहुविकल्पीय उत्तरों में से एक में कथित तौर पर ‘राम’ लिखा था.
इस मामले को लेकर प्रधानाध्यापिका ने अधिकारियों से कहा कि उनका इरादा ‘रामू’ शब्द लिखने का था, लेकिन वे उसमें ‘यू’ जोड़ना भूल गईं.
हालांकि, ये प्रश्न पत्र जल्द ही सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और विश्व हिंदू परिषद (विहिप) और बजरंग दल सहित दक्षिणपंथी समूहों ने महासमुंद जिले के कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक (एसपी) को लिखित शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की.
इस संबंध में एसपी प्रभात कुमार ने बताया कि पिछले सप्ताह अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 299 (किसी वर्ग की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के इरादे से जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण कृत्य करना) के तहत एफआईआर दर्ज की गई है. यह धारा गैर-जमानती है.
‘राम का नाम धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाता है’
रायपुर के जिला शिक्षा अधिकारी हिमांशु भारतीय द्वारा भी इस मामले में शिकायत की जांच के लिए पांच सदस्यीय समिति का गठन किया गया.
प्रेस विज्ञप्ति में शिक्षा अधिकारी ने कहा, ‘राम हिंदू धर्म के पूजनीय देवता हैं और उत्तर के विकल्प के रूप में ‘राम’ का नाम शामिल करना धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाता है.’
जांच में पता चला कि प्रश्नपत्र रायपुर के तिल्दा ब्लॉक के नक्ती स्थित एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय की प्रधानाध्यापिका ने तैयार किया था. उन्हें शनिवार को निलंबित कर दिया गया.
इसके अलावा संविदा आधार पर कार्यरत सहायक शिक्षिका, जो पेपर मॉडरेटर थीं, उनकी सेवाएं समाप्त करने की कार्यवाही चल रही है.
वहीं, प्रधानाध्यापिका ने अपने स्पष्टीकरण में गलती स्वीकार करते हुए कहा है कि एक विकल्प में ‘रामू’ के स्थान पर ‘राम’ लिखा गया था. उन्होंने कहा कि यह अनजाने में हुआ और उनसे ‘यू’ अक्षर छूट गया था. पुनर्मूल्यांकन के दौरान भी यह त्रुटि नहीं देखी गई.
उन्होंने आगे कहा कि उनका इरादा कभी भी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना या किसी धर्म/समुदाय का अपमान करना नहीं था. प्रश्नपत्र तैयार करते समय यह शब्द गलती से शामिल हो गया था.
उन्होंने इसके लिए गहरा खेद व्यक्त करते हुए माफी मांगी.
इसी प्रकार संविदा आधार पर कार्यरत सहायक शिक्षिका ने भी अपनी सफाई में कहा कि उन्हें जिला शिक्षा कार्यालय से प्राप्त कक्षा चार के अंग्रेजी प्रश्न पत्रों के दो सेटों में से एक सेट तैयार करने का काम सौंपा गया था. प्रत्येक प्रश्न में चार बहुविकल्पीय विकल्प थे, जिन्हें उन्होंने यथावत रखा. उन्होंने स्वीकार किया कि वे ‘राम’ शब्द को ठीक से देख नहीं पाईं और यह चूक अनजाने में हुई थी.
उन्होंने खेद भी व्यक्त किया और आश्वासन दिया कि भविष्य में ऐसी गलती दोबारा नहीं दोहराई जाएगी.
गौरतलब है कि इस मामले को लेकर जिला शिक्षा अधिकारी ने तिल्दा के ब्लॉक शिक्षा अधिकारी को उचित अनुभव वाले शिक्षक का चयन करने में कथित विफलता और विद्यालय के प्रधानाचार्य को उचित मॉडरेटर का चयन करने में कथित तौर पर असफल रहने के लिए चेतावनी पत्र भी जारी किए हैं.
