नई दिल्ली: केरल में अप्रैल में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा ईसाई समुदाय में अपनी पैठ बढ़ाने की कोशिशों के बीच कैथोलिक चर्च ने पार्टी की तीखी आलोचना की है.
चर्च के मुखपत्र दीपिका में प्रकाशित ‘काउ डंग फोर्स-फीडर्स’ शीर्षक संपादकीय में भाजपा-शासित राज्यों में ईसाइयों के खिलाफ बढ़ती हिंसा की घटनाओं की ओर ध्यान दिलाया गया है.
संपादकीय में ओडिशा की एक घटना का उल्लेख किया गया है, जहां कथित तौर पर एक प्रार्थना सभा के दौरान दक्षिणपंथी असामाजिक तत्वों द्वारा एक पादरी को जबरन गोबर खाने के लिए मजबूर किया गया.
संपादकीय में कहा गया, ‘कुछ राष्ट्र-विरोधी तत्व पादरी को गोबर खिलाने के बाद ‘जय श्री राम’ के नारे लगाते हुए वहां से चले गए.’
लेख में ऐसे मामलों पर केंद्र सरकार की चुप्पी पर भी सवाल उठाए गए और कहा गया कि यदि ‘राजनीतिक इच्छाशक्ति’ हो, तो ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है. यह कहते हुए कि केरल में अब तक इस तरह की घटनाएं सामने नहीं आई हैं, लेख में फिर भी सतर्कता बढ़ाने की अपील की गई.
संपादकीय में कहा गया, ‘ज़हरीली बयानबाज़ी सांप्रदायिक मानसिकता को तैयार करती है. जो लोग केरल में सांप्रदायिकता रोकने का दावा करते हैं, वे अन्य जगहों पर नफ़रत भरे भाषणों पर लगाम लगाने में असफल रहे हैं.’
इसमें यह भी कहा गया कि भाजपा-शासित सरकारों द्वारा पारित धर्मांतरण विरोधी कानूनों से बजरंग दल जैसे संगठनों के कार्यकर्ताओं का हौसला बढ़ा है.
इस लेख में इंडिया हेट लैब की हालिया रिपोर्ट का भी हवाला दिया गया है, जिसमें कहा गया है कि ईसाइयों और मुसलमानों जैसे धार्मिक अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ दर्ज 88 प्रतिशत नफरत भरे भाषणों की घटनाएं भाजपा-शासित राज्यों से सामने आई हैं.
रिपोर्ट के अनुसार, ईसाइयों के खिलाफ नफरत भरे भाषणों की घटनाओं में 41 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जो 2024 में 115 से बढ़कर 2025 में 162 हो गईं.
इसके अलावा, अमेरिकी होलोकॉस्ट संग्रहालय द्वारा प्रकाशित एक वार्षिक वैश्विक अध्ययन में सामूहिक हिंसा की आशंका के आधार पर आंके गए 168 देशों में भारत को चौथा स्थान दिया गया है.
द हिंदू अख़बार से बात करते हुए चर्च अधिकारियों ने कहा कि उत्तर भारत में ईसाइयों पर हो रहे हमलों से केरल के कैथोलिक समुदाय में व्यापक चिंता का माहौल है.
