असम में बेदख़ली अभियान सिर्फ़ ‘मिया’ लोगों को ही निशाना बना रहे हैं, असमिया लोगों को नहीं: सीएम

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा ने रविवार को दावा किया कि राज्य में केवल ‘मिया’ (बांग्ला भाषी मुसलमानों) को ही बेदख़ल किया जा रहा है. उन्होंने मीडिया पर अफ़वाह फैलाने और विपक्षी दलों पर ‘मिया’ तुष्टीकरण करने का आरोप लगाया.

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा. (फोटो साभार: फेसबुक)

नई दिल्ली: असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा ने रविवार (25 जनवरी) को दावा किया कि राज्य में केवल ‘मिया’ यानी बांग्ला भाषी मुसलमानों को ही बेदखली अभियान ते तहत निशाना बनाया जा रहा है, असमिया लोगों को नहीं.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, शर्मा ने आगे कहा कि विधानसभा चुनाव तक गुवाहाटी की पहाड़ियों में कोई बेदखली नहीं होगी और उन्होंने मीडिया पर अफवाहें फैलाने का आरोप लगाया.

मालूम हो कि असम विधानसभा के 126 सदस्यों के लिए चुनाव इस साल के पहले छमाही में होने हैं.

सीएम शर्मा ने शर्मा ने विपक्षी दलों पर ‘मिया’ तुष्टीकरण करने का आरोप लगाया और कटाक्ष करते हुए कहा कि कांग्रेस का प्रदेश मुख्यालय इस समुदाय के लोगों से भर गया है.

उल्लेखनीय है कि ‘मिया’ बांग्ला भाषी मुसलमानों के लिए इस्तेमाल होने वाला एक अपमानजनक शब्द है. असम की सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी अक्सर इस समुदाय को ‘घुसपैठिए’ कहती रही है. इन पर आरोप लगाया जाता रहा है कि वे मूल निवासियों के संसाधनों, नौकरियों और ज़मीन पर कब्ज़ा कर रहे हैं.

पीटीआई के अनुसार, शर्मा ने कहा, ‘भाजपा पिछले 10 वर्षों से राज्य में सत्ता में है. गुवाहाटी पहाड़ियों में बेदखली की कार्रवाई कहां हुई है?’

उन्होंने आगे कहा कि पहाड़ियों में रह रहे मुस्लिम प्रवासियों को बेदखली नोटिस जारी किए जाएंगे.

ज्ञात हो कि 2016 में असम में भाजपा के सत्ता में आने के बाद से राज्य में कई विध्वंस अभियान चलाए गए हैं, जिनमें ज्यादातर बांग्ला भाषी मुस्लिम आबादी वाले क्षेत्रों को निशाना बनाया गया है.

मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा ने वन और सरकारी भूमि पर अतिक्रमण के प्रति ज़ीरो टॉलरेंस की बात बार-बार दोहराई है और ऐसे अभियानों को संरक्षण और कानून प्रवर्तन के लिए जरूरी बताया है.

नॉर्थईस्ट नाउ की रिपोर्ट के अनुसार, 5 जनवरी को शर्मा ने दावा किया था कि सरकार ने बेदखली अभियानों के दौरान लगभग 1.5 लाख बीघा ज़मीन वापस ले ली है.

मुख्यमंत्री की रविवार की यह टिप्पणी उस बयान के एक दिन बाद आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि राज्य में मतदाता सूची के विशेष संशोधन के तहत केवल मिया मुसलमानों को ही नोटिस भेजे जा रहे हैं.

मालूम हो कि 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के उलट असम में चुनाव आयोग कोई विशेष गहन पुनरीक्षण नहीं कर रहा है. इसके बजाय बीते साल 17 नवंबर को आयोग ने राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को मतदाता सूचियों के विशेष पुनरीक्षण (एसआर) करने का निर्देश दिया था.

कई विपक्षी दलों ने भाजपा पर राज्य की मतदाता सूची से बड़ी संख्या में वैध मतदाताओं के नाम हटाने की साजिश रचने का आरोप लगाया है और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है.

इस पर शनिवार को शर्मा ने कहा कि इसमें छिपाने जैसा कुछ नहीं है.

मुख्यमंत्री ने अपने पहले के बयानों का जिक्र करते हुए कहा था कि नोटिस केवल ‘मिया’ यानी बांग्लादेश मूल के मुस्लिम प्रवासियों को भेजे जा रहे हैं, न कि किसी भी आदिवासी, हिंदू या असमिया मुस्लिम समुदाय को.

सीएम हिमंता ने साफ किया कि यह कार्रवाई अवैध प्रवासियों पर दबाव बनाए रखने की रणनीति का हिस्सा है.