‘एबीवीपी ने जातिसूचक गाली दी’: यूजीसी गाइडलाइन पर चर्चा के दौरान इलाहाबाद विश्वविद्यालय में हिंसा

इलाहाबाद विश्वविद्यालय परिसर में यूजीसी की नई गाइडलाइन पर चर्चा के दौरान हिंसा की ख़बरें सामने आई हैं. दिशा छात्र संगठन के छात्रों ने आरोप लगाया है कि 3 फरवरी को हुई चर्चा के दौरान एबीवीपी और अन्य दक्षिणपंथी संगठनों के सदस्यों ने उनके साथ मारपीट की तथा जातिसूचक गालियां दीं. एक छात्रा ने कहा, ‘जिस वजह से यूजीसी की नई गाइडलाइन लाई गई थी, यह घटना उसी का उदाहरण है,’

मारपीट में घायल छात्रा निधि यादव ने आरोप लगाया कि दक्षिणपंथी संगठनों से जुड़े लोगों ने उनके साथ मारपीट की. (फोटो: अरेंजमेंट/द वायर)

प्रयागराज: उच्च शिक्षण संस्थानों में भेदभाव से निपटने के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा जारी नई गाइडलाइन पर इलाहाबाद विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित एक चर्चा के दौरान मारपीट की घटना सामने आई है.

दिशा छात्र संगठन से जुड़े छात्रों का आरोप है कि 3 फरवरी (मंगलवार) को आयोजित इस चर्चा के दौरान अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) और अन्य दक्षिणपंथी संगठनों से जुड़े सदस्यों ने उनके साथ बदसलूकी की, मारपीट की और जातिसूचक गालियां दीं.

वहीं, द वायर हिंदी से बातचीत में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के छात्र संगठन एबीवीपी ने इन आरोपों से इनकार किया है. संगठन का दावा है कि चर्चा के दौरान दिशा से जुड़े छात्रों द्वारा सवर्णों के खिलाफ आपत्तिजनक नारे लगाए गए थे, जिसके बाद विवाद बढ़ा.

घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर मौजूद है, जिसमें कुछ लोग छात्रों के साथ मारपीट करते हुए दिखाई दे रहे हैं.

‘बजरंग दल लिखी गाड़ी परिसर में दाख़िल हुई’

इलाहाबाद विश्वविद्यालय से उत्तीर्ण हुए प्रियांशु ने द वायर हिंदी को बताया कि दिशा छात्र संगठन की ओर से विश्वविद्यालय के बरगद लॉन में यूजीसी गाइडलाइन 2026 पर एक परिचर्चा आयोजित की गई थी.

प्रियांशु के अनुसार, ‘परिचर्चा शांतिपूर्ण ढंग से चल रही थी. तभी 30-40 अराजक तत्व वहां पहुंच गए. इसी दौरान विश्वविद्यालय के मेन गेट से बिना नंबर प्लेट की एक चार पहिया गाड़ी परिसर में दाख़िल हुई, जिस पर ‘बजरंग दल’ लिखा हुआ था. इसके बाद जातिसूचक गालियां देते हुए चर्चा के लिए एकत्र हुए छात्रों से मारपीट शुरू कर दी गई.’

उन्होंने आरोप लगाया कि हमलावरों ने महिला छात्रों के साथ भी बदतमीज़ी की, ‘लड़कियों के बाल पकड़कर उन्हें घसीटा गया, पेट पर लात और घूंसे मारे गए. यह सब विश्वविद्यालय प्रशासन की मौजूदगी में होता रहा, लेकिन किसी ने हस्तक्षेप नहीं किया.’

इस तस्वीर में सम्राट राय को निधि का बाल खींचते देखा जा सकता है. (फोटो: स्पेशल अरेंजमेंट)

प्रियांशु ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर सवाल उठाते हुए कहा कि जहां आम छात्रों को गेट पर ही अपना परिचय पत्र दिखाना अनिवार्य है, वहीं एक विशेष संगठन की बिना नंबर प्लेट वाली गाड़ी धड़ल्ले से परिसर में कैसे घुस आई?.

‘हमलावरों को भागने दिया गया, घायल छात्रों से ही पूछताछ’

एक अन्य छात्रा ने आरोप लगाया कि मारपीट करने वालों को मौके से भाग जाने दिया गया, जबकि घायल छात्रों को ही विश्वविद्यालय कार्यालय ले जाकर पूछताछ की गई.

मारपीट में घायल छात्रा निधि यादव ने आरोप लगाया कि दक्षिणपंथी संगठनों से जुड़े लोगों ने उनके साथ मारपीट की और उनके निजी अंगों पर भी चोट पहुंचाई. 

वह आरोप लगाती हैं, ‘मेरे बाल खींचकर मारा, मेरी नाक पर कट लग गए हैं, मेरा चश्मा टूट गया. मेरे प्राइवेट पार्ट्स पर मारा.’

हमलावरों के बीच घिरी निधि. (फोटो: स्पेशल अरेंजमेंट)

निधि ने एबीवीपी से जुड़े हिंदी विभाग के छात्र भावेश दुबे पर आरोप लगाया कि वे लोहे के साइन बोर्ड से छात्रों पर हमला करने आ रहे थे.

निधि का यह भी आरोप है कि भावेश दुबे ने दिशा छात्र संगठन से जुड़े छात्रों को जातिसूचक गालियां दीं, ‘हमें मां बहन की गालियां दी गई, नीच कहा गया, जिस वजह से यूजीसी की नई गाइडलाइन लाई गई थी, यह घटना उसी का उदाहरण है.’

निधि आगे कहती हैं, ‘हम कहीं भी सुरक्षित नहीं हैं, चाहे स्त्री होने के नाते, या किसी विशेष वर्ग से होने के नाते या सिर्फ़ इंसान होने के नाते. हमारी कोई गरिमा ही नहीं है, हम महिला हैं तब बोल भी नहीं सकते.’

निधि ने यह भी स्पष्ट किया कि परिचर्चा न तो यूजीसी गाइडलाइन के समर्थन में थी और न ही उसके विरोध में. ‘लोग शांति से बैठकर बात कर रहे थे. इसमें कोई नारेबाज़ी नहीं हो रही थी और कोई भी आकर इसमें शामिल हो सकता था.’ 

उन्होंने आरोप लगाया कि ‘एबीवीपी के छात्र एक वॉट्सऐप ग्रुप पर योजना बना रहे थे कि दिशा वाले परिचर्चा कर रहे हैं, चलो उन्हें मारते हैं.’ 

3 फरवरी को इलाहाबाद विश्वविद्यालय के परिसर में हुई हिंसा में घायल छात्र संजय और निधि. (फोटो: स्पेशल अरेंजमेंट)

एबीवीपी से जुड़े छात्र ने आरोपों से किया इनकार

एबीवीपी से जुड़े और इलाहाबाद विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में तृतीय वर्ष के छात्र भावेश दुबे ने द वायर हिंदी से बातचीत में अपने और संगठन पर लगे सभी आरोपों से इनकार किया है. 

उनका कहना है कि दिशा छात्र संगठन ने अपने कार्यक्रम में बाहरी लोगों को बुलाया था और वहां सवर्णों तथा देश के खिलाफ नारे लगाए जा रहे थे.

मारपीट के आरोप पर भावेश दुबे ने कहा कि ‘पहले दिशा छात्र संगठन के छात्रों ने उनके साथियों पर हमला किया, जिसके बाद उन्होंने आत्मरक्षा में लोहे का साइन बोर्ड उठाया.’

जातिसूचक भाषा का प्रयोग के आरोप पर वह कहते हैं, ‘कोई मूर्ख ही झगड़े की स्थिति में परिसर के अंदर जातिसूचक भाषा का प्रयोग करेगा. मैंने इस तरह की भाषा का प्रयोग नहीं किया.’

दिशा संगठन की घायल छात्रा निधि यादव पर आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने ही हमारे साथी सम्राट राय को दांत से काटकर बुरी तरह घायल कर दिया था. 

पुलिस को शिकायत, दो छात्रों का निलंबन

इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कार्यवाहक चीफ प्रॉक्टर अतुल नारायण ने द वायर हिंदी को बताया कि दोनों पक्षों की शिकायतें कर्नलगंज थाने भेज दी गई हैं. 

उन्होंने यह भी बताया कि हिंसा के मामले में निधि यादव और भावेश दुबे दोनों को निलंबित कर दिया गया है.

अतुल नारायण के अनुसार, दिशा छात्र संगठन ने इस परिचर्चा के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन से पूर्व अनुमति नहीं ली थी. ‘अगर अनुमति ली गई होती तो सुरक्षा के इंतज़ाम किए जाते.’ उन्होंने कहा कि हिंसा में शामिल लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी. 

हालांकि, दिशा संगठन का कहना है कि विश्वविद्यालय परिसर में छात्रों का इस तरह की वार्ता में शामिल होना आम बात है. साधारण-सी परिचर्चा थी, उसके लिए अनुमति लेने की क्या आवश्यकता.

प्रशासनिक चुप्पी का आरोप

छात्रों ने यह भी आरोप लगाया है कि घटना के बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से तत्काल कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई. इस संबंध में दिशा संगठन के छात्रों ने कुलपति और जिला प्रशासन को लिखित शिकायत भी दी है, जिसमें बाहरी तत्वों की भूमिका, जातिसूचक गालियों और परिसर की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं. 

दूसरे पक्ष ने भी विश्वविद्यालय प्रशासन को लिखित शिकायत दी है. 

कर्नलगंज थाने को दिशा संगठन द्वारा भेजी गई लिखित शिकायत में कहा गया है, ‘हमलावरों ने ‘चमार, पासी, नीच’ जैसे शब्दों का प्रयोग करते हुए छात्रों को मारा-पीटा की. छात्राओं के साथ बाल पकड़कर मारपीट की गई तथा निजी अंगों पर हमला किया गया. लाठी, डंडे, साइन बोर्ड आदि से जानलेवा हमला किया गया. तथा डराने-धमकाने की नीयत से जान से मारने की धमकी भी दी.’

छात्रों का आरोप है कि पुलिस एफआईआर दर्ज करने से इनकार कर रही है, क्योंकि विश्वविद्यालय प्रशासन ने सिर्फ़ शिकायतों की प्रति थाने भेजी है, उस दिन हुई हिंसा की रिपोर्ट नहीं भेजी है.

कर्नलगंज थाने के एसएचओ ने द वायर हिंदी से कहा कि जब तक विश्वविद्यालय उन्हें हिंसा की रिपोर्ट नहीं भेज देती तब तक वह एफआईआर दर्ज नहीं कर सकते.

चर्चा में क्यों यूजीसी गाइडलाइन?

यूजीसी ने 13 जनवरी को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा) विनियम, 2026 अधिसूचित किए थे. इन नियमों का उद्देश्य विश्वविद्यालयों में जाति-आधारित भेदभाव से निपटने के लिए भेदभाव-रोधी समितियों और औपचारिक शिकायत निवारण तंत्र को अनिवार्य बनाना था.

ये विनियम रोहित वेमुला और पायल तड़वी की माताओं द्वारा दायर याचिकाओं के बाद लाए गए थे. कथित जाति-आधारित भेदभाव के चलते रोहित वेमुला ने 2016 में हैदराबाद विश्वविद्यालय में और पायल तड़वी ने 2019 में मुंबई के एक मेडिकल कॉलेज में आत्महत्या कर ली थी.

नए नियम 2012 के यूजीसी विनियमों की जगह लाए गए थे, जिनमें जाति-आधारित भेदभाव की परिभाषा अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति तक सीमित थी. 2026 के विनियमों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को भी शामिल किया गया था. इन नियमों का सवर्ण जाति के कुछ समूहों ने यह कहते हुए विरोध किया था कि इनके ज़रिये झूठी शिकायतें दर्ज कर ‘उच्च जातियों’ के लोगों को प्रताड़ित किया जा सकता है.

सुप्रीम कोर्ट ने इन नए विनियमों पर रोक लगाते हुए कहा है कि, ‘प्रथमदृष्टया इसकी भाषा पूरी तरह अस्पष्ट है और इसके प्रावधानों के दुरुपयोग की आशंका है.’ अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि 2012 के विनियम प्रभावी बने रहेंगे.