मेघालय खदान विस्फोट में मृतकों की संख्या 25 पहुंची; बचाव अभियान जारी

मेघालय के पूर्वी जयंतिया हिल्स ज़िले में अवैध रैट होल कोयला खदान में 5 फरवरी को हुए विस्फोट में मरने वालों की संख्या बढ़कर 25 हो गई है. पुलिस के अनुसार, अब तक दो गिरफ़्तारियां की गई हैं, और अवैध खनन से जुड़े अन्य लोगों की पहचान के लिए जांच जारी है.

मेघालय के ईस्ट जयंतिया हिल्स जिले के थांगस्कू इलाके में एक अवैध कोयला खदान में विस्फोट के बाद तलाशी और रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: मेघालय के पूर्वी जयंतिया हिल्स ज़िले में एक अवैध कोयला खदान में हुए धमाके में मरने वालों की संख्या बढ़कर 25 हो गई है, जबकि उस दूरदराज के इलाके में बचाव अभियान जारी है.

उस अवैध रैट-होल कोयला खदान के दो मालिकों को गिरफ्तार किया, जहां गुरुवार (5 फ़रवरी, 2026) सुबह हुए विस्फोट में 18 खनिकों की मौत हो गई थी.

नॉर्थईस्ट नाउ के मुताबिक, जिला पुलिस प्रमुख ने बताया कि ऑपरेशन के पहले दिन 18 शव बरामद किए गए थे. शुक्रवार को घटनास्थल से चार और शव बरामद किए गए. एक घायल मजदूर की बाद में में इलाज के दौरान मौत हो गई, जबकि दो अन्य पीड़ितों को उनके परिवार वाले खलीहरियात और जोवाई के अस्पतालों में ले गए.

घटना के बाद, पुलिस ने खलीहरियात थाने में भारतीय न्याय संहिता के प्रावधानों के साथ-साथ खनन और विस्फोटक से संबंधित कानूनों के तहत अपनी पहल पर एक मामला दर्ज किया.

अब तक दो गिरफ्तारियां की गई हैं, और अधिकारियों ने कहा कि अवैध खनन से जुड़े अन्य लोगों की पहचान के लिए जांच जारी है.

द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, ज़िला अधिकारियों ने बताया कि राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ), राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) और विशेष बचाव दल के कर्मी खदान की संकरी और भूल-भुलैया जैसी सुरंगों में फंसे माने जा रहे लोगों को निकालने के लिए अभियान जारी रखे हुए हैं. यह खदान मिंस्यंगट थांग्सको क्षेत्र में स्थित है.

ज़िले के पुलिस अधीक्षक विकाश कुमार ने अखबार से कहा, ‘अब तक हमने दो खदान मालिकों को गिरफ्तार किया है. हम इस अवैध खदान के संचालन में शामिल अन्य लोगों की भी तलाश कर रहे हैं.’

शुक्रवार सुबह राज्य की राजधानी शिलांग से दो कैबिनेट मंत्री – लखमेन रिंबुई और वाइलाडमिकि श्यल्ला – जिला मुख्यालय खलीहरियात पहुंचे ताकि बचाव और जांच कार्यों की निगरानी कर सकें.

राज्य के खनन विभाग के अधिकारियों को भी यह पता लगाने के लिए भेजा गया कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) द्वारा अप्रैल 2014 से खतरनाक रैट-होल खनन पद्धति पर लगाए गए पूर्ण प्रतिबंध के बावजूद यह खदान कैसे संचालित हो रही थी.

खदान से लगभग 115 किलोमीटर दूर शिलांग में मुख्यमंत्री कोनराड के. संगमा ने दावा किया कि राज्य सरकार अवैध खनन के खिलाफ सख्ती से कार्रवाई कर रही है और इस हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कदम उठाने का वादा किया.

उन्होंने पत्रकारों से कहा, ‘अवैध खनन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, क्योंकि हमने वैज्ञानिक खनन की प्रक्रिया शुरू की है.’

उन्होंने यह भी कहा कि हाल के वर्षों में पुलिस ने अवैध खनन से जुड़े 1,000 से अधिक मामले दर्ज किए हैं और इनमें से कई मामलों में सैकड़ों लोगों के खिलाफ आरोप-पत्र दाखिल किए गए हैं. उन्होंने कहा, ‘कठिन भू-भाग और मानव संसाधन की कमी जैसी चुनौतियों के बावजूद कार्रवाई जारी रही है.’

संगमा ने यह भी बताया कि पूरे राज्य में अवैध खनन गतिविधियों का पता लगाने के लिए सैटेलाइट तस्वीरों और ड्रोन का इस्तेमाल किया जा रहा है. उन्होंने कहा, ‘इन उपायों से कई अवैध गतिविधियों का पता चला है और उन्हें बंद किया गया है.’

सरकार पर लापरवाही का आरोप

इस बीच, शिलांग लोकसभा सीट से क्षेत्रीय ‘वॉयस ऑफ द पीपल पार्टी’ का प्रतिनिधित्व करने वाले मेघालय के दो लोकसभा सांसदों में से एक रिकी एंड्रयू जे. सिंगकों ने 18 खनिकों की मौत के लिए राज्य सरकार और कोयला मंत्रालय पर निशाना साधा.

उन्होंने कहा, ‘एनजीटी के प्रतिबंध के बावजूद मेघालय के कई हिस्सों में धड़ल्ले से अवैध कोयला खनन जारी है, और दूरदराज़ इलाकों में होने वाली कई घातक घटनाएं रिपोर्ट तक नहीं हो पातीं.’ उन्होंने खनन और खनिज विभाग देखने वाले राज्य मंत्री के इस्तीफ़े की मांग की.

सिंगकों ने कहा, ‘राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सहित जो सरकारी निकाय इन गतिविधियों की निगरानी के लिए जिम्मेदार हैं, उन्हें राज्य और केंद्र सरकार के साथ जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए.’

उन्होंने केंद्र और मेघालय की सरकारों की आलोचना करते हुए कहा कि वे एनजीटी के उस प्रतिबंध को लागू कराने में विफल रही हैं, जिसे बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा था.

नॉर्थईस्ट नाउ के मुताबिक, घटना के बाद स्थानीय नागरिक समाज संगठन हिनियूट्रेप इंटीग्रेटेड टेरिटोरियल ऑर्गनाइजेशन (एचआईटीओ) ने राज्यपाल सी.एच. विजयशंकर से मुलाकात की. संगठन ने प्रवर्तन में गंभीर चूक का आरोप लगाते हुए किसी केंद्रीय जांच एजेंसी से जांच कराने की मांग की है.

अपने ज्ञापन में एचआईटीओ ने इस दावे को खारिज किया कि विस्फोट एक दुर्घटना था, और आरोप लगाया कि लंबे समय से जारी राजनीतिक संरक्षण के कारण अवैध खनन गतिविधियां चलती रहीं. समूह ने यह भी कहा कि ऐसी घटनाओं के बाद अक्सर जिम्मेदारी निचले स्तर के अधिकारियों पर डाल दी जाती है, जबकि प्रभावशाली लोग जवाबदेही से बच निकलते हैं.

संगठन ने मृतकों में से कुछ मजदूरों की नागरिकता को लेकर भी चिंता जताई और मुआवजा जारी करने से पहले नागरिकता की जांच करने का आग्रह किया. उसने यह भी कहा कि खनन स्थल राज्य की भूमि स्वामित्व प्रणाली के तहत एक अनियमित क्षेत्र में आता है, जिससे वह शक्तिशाली हित समूहों के अवैध नियंत्रण के प्रति संवेदनशील हो जाता है.

एक दशक से लगा हुआ है प्रतिबंध 

बता दें कि मेघालय में एनजीटी द्वारा साल 2014 में प्रतिबंध लगाए जाने के बाद भी रैट होल खदानों में खनन जारी है. रैट होल खदान चूहों के बिल जैसी होती है, जिसमें संकरी सुरंगें खोदी जाती हैं, जिसके भीतर मजदूर जाते हैं और कोयला निकालकर लाते हैं.

क्षेत्र में अवैध कोयला खनन के कारण वर्षों से कई जानलेवा घटनाएं हो चुकी हैं, जबकि राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) और सुप्रीम कोर्ट द्वारा बार-बार प्रतिबंध लगाए जाने के बावजूद यह सिलसिला जारी रहा है.

2019 में सेवानिवृत्त जस्टिस बीपी कटाके की अध्यक्षता में एक समिति गठित की गई थी, जिसे मेघालय में कोयला खनन की प्रथाओं की जांच करने और सुरक्षा उपायों की सिफारिश करने का काम सौंपा गया था. इसी प्रक्रिया के आधार पर उसी वर्ष सुप्रीम कोर्ट ने कुछ दिशानिर्देश जारी किए थे.

मेघालय हाईकोर्ट द्वारा गठित एक सदस्यीय समिति ने फरवरी 2025 में कहा था कि राज्य के छह कोयला समृद्ध जिलों में ऐसी गतिविधियां बेरोकटोक जारी हैं.

मेघालय हाईकोर्ट को सौंपी गई रिपोर्ट में कहा गया था कि राज्य में अवैध कोयला खनन बेरोकटोक जारी है, जिसमें 1.69 लाख मीट्रिक टन (एमटी) अवैध रूप से खनन किए गए कोयले का पता चला है.

समिति ने कहा था कि राज्य सरकार ने सितंबर 2022 के अदालती आदेश का अनुपालन करते हुए बताया कि मई और अगस्त 2022 के बीच पूर्वी जयंतिया हिल्स, दक्षिण गारो हिल्स और पश्चिम खासी हिल्स जिलों में 92,268.43 मीट्रिक टन (एमटी) कोयला जब्त किया गया. राज्य सरकार द्वारा नियोजित निजी फर्म ने इन जिलों में अतिरिक्त 41,477.54 मीट्रिक टन कोयला दर्ज किया.