नई दिल्ली: भारत और अमेरिका द्वारा अंतरिम व्यापार समझौते के ढांचे को लेकर संयुक्त बयान जारी किए जाने के बाद विपक्षी दलों ने शनिवार (7 फरवरी) को नरेंद्र मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला.
विपक्ष ने पीएम मोदी पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने ‘सरेंडर’ (आत्मसमर्पण) करने और कृषि व डेयरी जैसे अहम क्षेत्रों में भारत के हितों से समझौता करने का आरोप लगाया. साथ ही, ह्वाइट हाउस के उस कार्यकारी आदेश की भी आलोचना की, जिसमें कहा गया है कि भारत रूसी तेल की खरीद बंद करेगा.
कांग्रेस पार्टी ने आरोप लगाया कि मोदी ने जेफ्री एप्सटीन से जुड़ी फाइलें सार्वजनिक न हों, इसके लिए ट्रंप के सामने सरेंडर कर दिया. कांग्रेस ने बयान में कहा, ‘एप्सटीन फाइल्स के डर से नरेंद्र मोदी ने डोनाल्ड ट्रंप के सामने पूरी तरह आत्मसमर्पण कर दिया है.’
पार्टी ने कहा, ‘पहले ट्रंप ने रूस से सस्ता तेल खरीदने पर भारत पर 25% टैरिफ लगा दिया था. अब उस टैरिफ को हटाते समय ट्रंप साफ कर रहे हैं कि भारत रूस से तेल नहीं खरीदेगा और उसकी जगह अमेरिका से तेल खरीदेगा.’
कांग्रेस का यह भी कहना है कि मोदी से ‘समझौता’ कर लिया गया है और ‘भारत के फैसले, गरिमा और राष्ट्रीय हित ट्रंप के पैरों में रख दिए गए हैं ताकि एप्सटीन फाइल्स में जो भी छिपा है, वह कभी सामने न आए.’
पूर्व वित्त मंत्री और कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने शुक्रवार को एक्स पर पोस्ट कर टैरिफ को लेकर संयुक्त बयान पर कहा, ‘एक बात साफ है.. यह ढांचागत समझौता अमेरिका के पक्ष में झुका हुआ है और इसमें असंतुलन साफ दिखाई देता है.’
My preliminary view on the Joint Statement on Tariffs:
The Joint Statement issued by India and the US makes it clear that no Bilateral Trade Agreement (BTA) has been reached.
It is not even an Interim Agreement. It is a ‘framework for an interim agreement’.
Paragraph 2 and…
— P. Chidambaram (@PChidambaram_IN) February 7, 2026
ज्ञात हो कि शनिवार को केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि रूसी तेल की खरीद पर जानकारी विदेश मंत्रालय देगा. उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका के साथ हुआ यह समझौता भारतीय किसानों या डेयरी क्षेत्र को नुकसान नहीं पहुंचाएगा.
सीपीआई(एम) के सांसद जॉन ब्रिटास ने इस समझौते को भारतीय किसानों के साथ ‘विश्वासघात’ बताया. उन्होंने कहा, ‘आपने किसानों की आजीविका, विनिर्माण सुरक्षा, ऊर्जा संप्रभुता और तकनीकी स्वतंत्रता को दांव पर लगा दिया.’
The Modi government will be defined by its blatant betrayal of Indian interests to suit the US agenda. Today’s revelations from the US directly contradict Piyush Goyal’s 3-page statement in Parliament.#IndiaUSJointStatement pic.twitter.com/sfDbrqWdz1
— John Brittas (@JohnBrittas) February 7, 2026
तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने मोदी पर भारत को ‘सरेंडरलैंड’ बनाने का आरोप लगाया. उन्होंने उस कार्यकारी आदेश की आलोचना की, जिसमें कहा गया है कि भारत रूसी तेल का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष आयात बंद करने के लिए प्रतिबद्ध है और इस पर नजर रखने के लिए वॉशिंगटन एक निगरानी व्यवस्था बनाएगा. उन्होंने कहा कि इस तरह की निगरानी से भारतीय नीतिगत फैसलों पर विदेशी दखल की मिसाल कायम होने का खतरा है.
मोइत्रा ने कहा, ‘पीयूष गोयल का सरकारी पावरपॉइंट कोई ठोस जानकारी नहीं देता, बस बेकार के ग्राफ और मोदीजी की तस्वीर है.’
Modiji makes India SurrenderLand – @POTUS ‘s order says 25% tariff cut because India stops buying Russian oil. Section 4 says US to “monitor” India & any breach to face action. @PiyushGoyal ‘s sarkari powerpoint gives NO details, just silly blobs & Modiji photo.
— Mahua Moitra (@MahuaMoitra) February 7, 2026
जहां गोयल ने कहा कि इस समझौते का जश्न मनाया जाना चाहिए, वहीं राष्ट्रीय जनता दल के सांसद मनोज कुमार झा ने भारत पर लगाए गए 18% टैरिफ पर सवाल उठाए.
उन्होंने एएनआई से कहा, ‘ज्यादातर चीजों पर हमारा टैरिफ, चाहे हालात अच्छे हों या बुरे, 2.9% रहा है. धमकियों के जरिए यह 50% तक बढ़ाया गया, यह बताते हुए कि हमें किससे और कहां से खरीदना है. फिर इसे घटाकर 18% किया गया. क्या यही जश्न मनाने की बात है? क्या आप पूरे देश को गुमराह नहीं कर रहे?’
समझौते में यह भी कहा गया है कि अब भारतीय उत्पादों पर अमेरिकी शुल्क 18% है, लेकिन भारत की ओर से दी गई प्रतिबद्धताओं का कोई स्पष्ट आंकड़ा नहीं दिया गया है. इसमें सिर्फ इतना कहा गया है कि ‘भारत सभी अमेरिकी औद्योगिक उत्पादों और अमेरिकी खाद्य व कृषि उत्पादों की एक व्यापक श्रेणी पर टैरिफ खत्म करेगा या घटाएगा.’
समाजवादी पार्टी के सांसद अखिलेश यादव ने इसे भाजपा का ‘समझौता गणित’ बताया और अमेरिका के सामने झुकने की जरूरत पर सवाल उठाया.
उन्होंने एक्स पर लिखा, ‘हमारे देश की जनता, भाजपा से कह रही है कि जहां तक हमें मालूम है ‘डील’ एक तरफ़ा नहीं होती है. जनता भाजपा से ये पूछ रही है कि ‘ज़ीरो (0) बड़ा या अठारह (18)’? क्या भाजपा की समझौता-गणित में 18=0 होता है?’
उन्होंने आगे लिखा, ‘देश के किसानों, दुकानों, उद्योगों को बचाने के लिए, खोखले शब्दों के अलावा भाजपा के पास कोई और सुरक्षा-कवच या संरक्षण-योजना है? भारत के हितों के आत्मसमर्पण की मजबूरी के पीछे छिपा गहरा राज़ क्या है? क्या ये ‘बनी वहाँ, पहुंची यहाँ’ जैसा कोई एक पक्षीय मामला है? क्या डील के नाम पर भाजपा सरकार ‘डॉटेड लाइन’ पर केवल हस्ताक्षर करने के लिए बाध्य है?’
सीपीआई (एमएल) न्यू डेमोक्रेसी ने भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते के ढांचे को आरएसएस-भाजपा सरकार का अमेरिकी कॉरपोरेट हितों के सामने आत्मसमर्पण बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की है. पार्टी का कहना है कि यह ढांचा भारतीय कृषि, डेयरी और उद्योग समेत पूरी अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर खतरा है और इससे भारी सब्सिडी वाले अमेरिकी कृषि व डेयरी उत्पादों को भारतीय बाजार में खोलने की तैयारी है, जो पहले से संकटग्रस्त भारतीय किसानों को तबाह कर देगी.
बयान में कहा गया है कि भारत को अमेरिका से महंगे ऊर्जा उत्पाद खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है और सभी अमेरिकी औद्योगिक व खाद्य-कृषि उत्पादों पर शुल्क घटाने या खत्म करने की प्रतिबद्धता मोदी सरकार के किसान-हितैषी दावों की पोल खोलती है. सीपीआई (एमएल) ने इसे 1991 जैसी नीतियों की वापसी बताते हुए जन-विरोधी और राष्ट्र-विरोधी करार दिया.
संगठन ने 12 फरवरी की देशव्यापी हड़ताल व विरोध प्रदर्शनों के जरिए इसके खिलाफ संघर्ष तेज करने का आह्वान किया.
