नई दिल्ली: एक 70 वर्षीय मुस्लिम बुज़ुर्ग के समर्थन में हिंदुत्ववादी भीड़ के सामने खड़े हुए उत्तराखंड के कोटद्वार के दीपक कुमार जहां एक ओर सराहना पा रहे हैं वहीं दूसरी ओर इस वाकये के बाद उनके जिम में कई सदस्यों ने आना छोड़ दिया है.
दीपक ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि कोटद्वार में किराए की इमारत में चल रहे उनके हल्क जिम में पहले करीब 150 सदस्य आते थे, लेकिन अब रोज़ाना आने वालों की संख्या घटकर सिर्फ़ 15 रह गई है.
ज्ञात हो कि 26 जनवरी को पार्किंसन रोग से पीड़ित 70 वर्षीय मुस्लिम दुकानदार को उनकी दुकान के नाम से ‘बाबा’ शब्द हटाने के लिए कुछ कट्टर हिंदुत्ववादी लोग परेशान कर रहे थे. तब दीपक ने उन लोगों का विरोध किया था. इस दौरान जब भीड़ ने उनसे उनका नाम पूछा, तब उन्होंने अपना नाम ‘मोहम्मद दीपक’ बताया. इस टकराव का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और दीपक सुर्खियों में आ गए.
घटना के कुछ दिनों बाद, 40 से अधिक बजरंग दल कार्यकर्ताओं का एक समूह कोटद्वार में दीपक के विरोध में इकट्ठा हुआ. दीपक के मुताबिक, पुलिस केवल तमाशबीन बनी रही और घंटों तक खड़ी रही भीड़ ने उनके परिवार के खिलाफ धमकियां दीं और गालियां दीं.
इसके बाद मामले में तीन एफआईआर दर्ज की गईं. पहली एफआईआर मोहम्मद दीपक और विजय रावत के खिलाफ दर्ज की गई, जो 26 जनवरी की घटना के दौरान वहां मौजूद थे. यह शिकायत विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के दो सदस्यों, गौरव कश्यप और कमल पाल ने दर्ज कराई. इसमें आरोप लगाया गया कि दोनों ने उन पर हमला किया, पैसे, घड़ी और मोबाइल छीन लिए और डराने के लिए जातिसूचक गालियां दीं.
दूसरी एफआईआर दुकानदार ने दर्ज कराई, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ स्थानीय लोग उनकी दुकान ‘बाबा स्कूल ड्रेस’ का नाम बदलने के लिए उन्हें धमका रहे थे.
तीसरी एफआईआर 30 से 40 ‘अज्ञात लोगों’ के खिलाफ दर्ज की गई है, जिन पर सांप्रदायिक तनाव भड़काने का आरोप है. इसमें राष्ट्रीय राजमार्ग को बाधित करने और पुलिसकर्मियों के साथ हाथापाई करने जैसी धाराएं भी लगाई गई हैं.
दो हिस्सों में बंटा कोटद्वार
कोटद्वार में हालात अभी ऐसे हैं कि शहर दो हिस्सों में बंटा हुआ दिखता है. एक हिस्सा उन लोगों का है जो दीपक के साथ खड़े हैं, और दूसरे वे, जो उनसे नाराज़ हैं. दीपक ने कहा, ‘शहर का आधा हिस्सा मेरे साथ है, लेकिन अच्छे कामों पर लोग तालियां नहीं बजाते. ईमानदारी की कीमत चुकानी पड़ती है.’
इस विभाजन का असर उनके जिम पर साफ़ दिख रहा है. उन्होंने कहा, ‘लोग डरे हुए हैं, और मैं इसे समझता हूं. लेकिन जिम एक पूरे फ्लोर पर चलता है, जिसका किराया 40,000 रुपये महीना है. हमारे परिवार की आमदनी का यही एकमात्र साधन है. मैंने हाल ही में घर बनाया है, जिसके लोन की 16,000 रुपये महीने की किस्त भी चुकानी है.’
दीपक के मुताबिक, जो सदस्य अभी बचे हैं, उन्होंने भरोसा दिलाया है कि वे जिम नहीं छोड़ेंगे. उन्होंने अख़बार से कहा, ‘यहां सदस्य छोड़ने की दर पहले ही ज़्यादा होती है. एक बार कोई सदस्य चला जाए, तो उसे वापस लाना मुश्किल होता है.’
रविवार को राज्यसभा में सीपीआई(एम) के संसदीय दल के नेता जॉन ब्रिटास ने बाबा ड्रेस के मालिक वकील अहमद और दीपक से मुलाकात की थी. सीपीआई(एम) ने एक्स पर बताया कि ब्रिटास ने जिम का दौरा किया और सदस्यता भी ली, क्योंकि यह अब ‘सांप्रदायिक तत्वों की धमकियों’ के कारण लगभग खाली हो गया है.
“Deepak Kumar, now known as ‘Muhammad’ Deepak… is a beacon of hope in the struggle against the Hindutva communalism .
Deepak Kumar entered the scene in Kotdwar, in the foothills of the Himalayas, when Bajrang Dal activists began harassing an elderly man named Muhammad. This… pic.twitter.com/ZVuA5VwgGb
— John Brittas (@JohnBrittas) February 8, 2026
दीपक ने कहा, ‘मुझे अब भी नहीं लगता कि मैंने कुछ गलत किया है. बाहर से लोग मेरा समर्थन कर रहे हैं, लेकिन शहर के लोग अभी पूरी तरह साथ नहीं आए हैं. हालात धीरे-धीरे बदल रहे हैं और मुझे भरोसा है कि आगे चीज़ें बेहतर होंगी.’
इस बीच स्थानीय पुलिस ने दीपक को सुरक्षा मुहैया कराई है और शहर में अतिरिक्त बल तैनात किया गया है.
