नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (13 फरवरी) को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को निर्देश दिया कि वह मणिपुर में जातीय हिंसा से जुड़े मामलों पर एक पखवाड़े के भीतर स्थिति रिपोर्ट दाखिल करे.
न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट सीबीआई फिलहाल हिंसा से संबंधित 11 एफआईआर की जांच कर रही है. अदालत ने यह भी कहा कि पीड़ितों के पुनर्वास और कल्याण पर जस्टिस गीता मित्तल समिति की सिफारिशों का ठीक से पालन किया जाना चाहिए.
पीठ ने कहा, ‘सीबीआई वृंदा ग्रोवर की अर्जी पर स्थिति रिपोर्ट दाखिल करे. साथ ही, इन परिस्थितियों में पीड़ितों को निःशुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जानी चाहिए.’
अदालत ने आगे कहा, ‘हम आदेश देंगे कि यदि पहले के तनावपूर्ण माहौल के कारण लीगल एड काउंसिल (एलएसी) उपलब्ध नहीं हो पाते हैं, तो गुवाहाटी बार से एलएसी भेजे जा सकते हैं.’
इस पीठ में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची शामिल थे. वरिष्ठ अधिवक्त वृंदा ग्रोवर एक पीड़ित की ओर से पेश हुईं.
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, पीड़ितों ने कहा है कि सीबीआई द्वारा जांचे जा रहे 27 मामलों में से कुछ में मुक़दमे की कार्यवाही बहुत धीमी चल रही है और पीड़ितों के परिवारों को मुक़दमे की स्थिति के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल रही है. ऐसे ही एक मामले में मई 2023 की जातीय हिंसा के दौरान बलात्कार की शिकार हुई कुकी-जो समुदाय की एक युवती की पिछले महीने न्याय की प्रतीक्षा करते हुए मृत्यु हो गई.
हिंसा के दौरान महिलाओं के खिलाफ़ हुए यौन अपराधों के दो मामलों में पीड़ितों की ओर से पेश हुईं अधिवक्ता वृंदा ग्रोवर ने अदालत को बताया कि परिवारों को अपने मामलों की प्रगति की कोई जानकारी नहीं है. उन्होंने कहा, ‘हमने हाल ही में निचली अदालत के दस्तावेज देखे और पाया कि दोनों मामलों में आरोप-पत्र दाख़िल हो चुका है, लेकिन आरोपी अदालत में पेश नहीं हो रहे हैं, सीबीआई उपस्थित नहीं है और मुख्य आरोपी अब तक पकड़े नहीं गए हैं.’
पीड़ितों के एक अन्य समूह की ओर से पेश अधिवक्ता निज़ाम पाशा ने बताया कि 7 अगस्त 2023 के शीर्ष अदालत के आदेश के मद्देनज़र मौजूदा परिस्थितियों के कारण इन मामलों की निगरानी गौहाटी हाईकोर्ट में लंबित है. अदालत ने कहा, ‘2023 में हालात ऐसे थे कि निष्पक्ष और समयबद्ध जांच की सुनिश्चितता के लिए इस अदालत को स्पष्ट निर्देश देना पड़ा था.’
वृंदा ग्रोवर ने यह भी कहा कि कुछ पीड़ित अब भी इंफाल जाकर हाईकोर्ट में पेश होने में सहज महसूस नहीं कर सकते. इस पर अदालत ने कहा, ‘कानून के शासन को मज़बूत करने और यह सुनिश्चित करने के लिए कि लोगों को न्याय मिले, हम दोनों उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों से कह सकते हैं कि गवाहों के बयान निर्भीक और स्वतंत्र वातावरण में कैसे दर्ज किए जाएं.’
जस्टिस गीता मित्तल समिति अब तक राहत और पुनर्वास के लिए उठाए गए कदमों पर अदालत को 42 रिपोर्टें सौंप चुकी है. इस पैनल में जस्टिस गीता मित्तल (पूर्व मुख्य न्यायाधीश, जम्मू और कश्मीर उच्च न्यायालय), जस्टिस शालिनी पी जोशी, और जस्टिस आशा मेनन शामिल हैं.
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि मणिपुर में मौजूदा स्थिति शांतिपूर्ण है और रोज़मर्रा की ज़िंदगी में सुधार हुआ है. अदालत इस मामले की अगली सुनवाई 26 फ़रवरी को करेगी.
हिंसा की शुरुआत 3 मई 2023 को ऑल ट्राइबल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ मणिपुर द्वारा आयोजित एक रैली के बाद हुई थी. इसके बाद राज्य भर में झड़पें फैल गईं और अर्धसैनिक बलों की तैनाती करनी पड़ी. इस संघर्ष में अब तक 270 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और हजारों लोग विस्थापित हुए हैं.
