नई दिल्ली: असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा ने मंगलवार (17 फरवरी) को घोषणा की कि राज्य कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष भूपेन बोरा 22 फरवरी को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होंगे. यह घोषणा शर्मा द्वारा गुवाहाटी स्थित अपने आवास पर बोरा से मुलाकात के बाद की गई.
हालांकि, अभी तक भूपेन बोरा या कांग्रेस की ओर से इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है.
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, पत्रकारों से बातचीत में शर्मा ने कहा, ‘भूपेन बोरा 22 फरवरी को भाजपा में शामिल होंगे. दिलीप सैकिया औपचारिकताओं को अंतिम रूप देंगे. उनके साथ कांग्रेस के कई नेता गुवाहाटी और उत्तर लखीमपुर में भाजपा में शामिल होंगे.’
उन्होंने बोरा को ‘कांग्रेस के अंतिम मान्यता प्राप्त हिंदू नेता’ बताते हुए कहा कि भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व ने उनके शामिल होने को मंजूरी दे दी है. शर्मा ने कहा, ‘हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने पहले ही उनके शामिल होने को स्वीकृति दे दी है और उनका स्वागत किया है. भूपेन बोरा को पूरा सम्मान और गरिमा दी जाएगी.’
इस कदम को ‘घर वापसी’ बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, ‘भाजपा में शामिल होना उनके लिए घर वापसी जैसा होगा, क्योंकि यह ऐसी पार्टी है जिसमें उनके जैसे कई लोग हैं, जिनके पिता किसी उच्च पद पर नहीं रहे.’
#WATCH | Guwahati | Assam CM Himanta Biswa Sarma says, “… Bhupen Borah will join BJP on 22nd February. Dilip Saikia will work out the details. Along with him, a good number of Congress leaders will join the BJP in Guwahati and North Lakhimpur … He is the last recognised Hindu… pic.twitter.com/IO8ErSW9iu
— ANI (@ANI) February 17, 2026
शर्मा ने आगे कहा, ‘भूपेन बोरा के शामिल होने से यह छवि बनेगी – जो कि वास्तविकता भी है – कि कांग्रेस अब मुख्यधारा के असमिया लोगों की पार्टी नहीं रह गई है.’
कांग्रेस नेतृत्व पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री ने पार्टी की आंतरिक कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि वह जमीनी कार्यकर्ताओं की बजाय चुनिंदा नेताओं को तरजीह देती है.
उन्होंने कहा, ‘अगर आप माजुली में किसी विशेष नेता को यात्रा में आगे रखते हैं, तो इसका मतलब है कि आप कांग्रेस को चुनाव जिताना नहीं चाहते. एक सच्चे कांग्रेसी नेता को यह पीड़ा होगी कि पार्टी चुनाव जीतने के लिए नहीं लड़ रही है. मैंने भी यही पीड़ा झेली है. जब मैं भाजपा में शामिल हुआ, तब मुझे भी ऐसे फोन आए थे. ये लोग सामंती जमींदारों की तरह रहते हैं. उन्हें लगता है कि एक फोन करेंगे और फैसला बदल जाएगा… अगर कोई कहे कि मैं पार्क होटल देखने इस्लामाबाद गया था और आप ऐसे लोगों को मंजूरी दे दें, तो क्या यह राष्ट्र-विरोधी नहीं है?’
भूपेन बोरा का 24 घंटे में यूटर्न
बोरा ने सोमवार (16 फरवरी) सुबह कांग्रेस से इस्तीफा देते हुए कहा था कि उन्होंने सुबह 8 बजे ही पार्टी आलाकमान को अपना त्यागपत्र भेज दिया, क्योंकि राज्य इकाई में उन्हें ‘नजरअंदाज’ किया जा रहा था.
बोरा ने कहा, ‘मैंने आज सुबह 8 बजे कांग्रेस हाईकमान को अपना इस्तीफा भेजा और विस्तार से बताया कि मुझे यह कदम क्यों उठाना पड़ा. यह व्यक्तिगत निर्णय नहीं है. मैंने 1994 में पार्टी जॉइन की थी और 32 साल दिए हैं.’
उन्होंने जोड़ा, ‘यह सिद्धांत केवल व्यक्तिगत नहीं है, बल्कि पार्टी के भविष्य की चिंता से प्रेरित है. इसलिए मैंने सब कुछ विस्तार से हाईकमान को बताया.’
दो बार विधायक रह चुके बोरा 2021 से 2025 तक असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रहे, उसके बाद उनकी जगह गौरव गोगोई को नियुक्त किया गया. बोरा ने स्पष्ट किया कि उनका इस्तीफा राजनीति से संन्यास लेने का संकेत नहीं है.
उन्होंने कहा, ‘किसी भी राजनीतिक दल से औपचारिक प्रस्ताव नहीं आया है, लेकिन यह सच है कि मैंने राजनीति छोड़ने के लिए इस्तीफा नहीं दिया.’
हालांकि, कुछ ही घंटों में राजनीतिक अटकलें तेज हो गईं और असम के मुख्यमंत्री शर्मा द्वारा भाजपा में शामिल होने का खुला निमंत्रण दिए जाने के बाद बोरा ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं, जिनमें राहुल गांधी भी शामिल थे, से बातचीत की.
कांग्रेस के असम प्रभारी भंवर जितेंद्र सिंह ने बाद में घोषणा की कि बातचीत के बाद इस्तीफा वापस ले लिया गया है.
उन्होंने कहा, ‘मैं भूपेन बोरा को इस्तीफा वापस लेने के लिए धन्यवाद देता हूं. वरिष्ठ कांग्रेस नेता भूपेन बोरा कांग्रेस परिवार के महत्वपूर्ण सदस्य हैं. उन्होंने अपना इस्तीफा पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष को भेजा था.’
उन्होंने जोड़ा, ‘कभी-कभी मतभेद हो जाते हैं, लेकिन बातचीत से उन्हें सुलझा लिया गया है,’ और संगठन में बोरा के महत्व को दोहराया.
इससे पहले शर्मा ने बोरा के इस्तीफे के तुरंत बाद उन्हें भाजपा में शामिल होने का निमंत्रण दिया था, जिससे चुनावी राज्य में राजनीतिक हलचल तेज हो गई थी. उन्होंने कहा था कि भाजपा के दरवाजे खुले हैं और यदि बोरा पार्टी बदलते हैं तो उन्हें ‘सुरक्षित सीट’ दिलाने में भी मदद की जाएगी.
अपने राजनीतिक सफर का जिक्र करते हुए शर्मा ने कहा था कि बोरा का इस्तीफा कांग्रेस के भीतर गहरे संकट को दर्शाता है. उन्होंने कहा, ‘उनका इस्तीफा प्रतीकात्मक संदेश देता है कि कांग्रेस में सामान्य परिवार से आने वाला व्यक्ति आगे नहीं बढ़ सकता. कांग्रेस साधारण परिवारों के लोगों को पहचान नहीं देती, जबकि मैं एक सामान्य मध्यमवर्गीय परिवार से हूं और भाजपा ने मुझे मुख्यमंत्री बनाया. हम ‘ब्लू ब्लड’ की राजनीति के खिलाफ हैं.’
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब 126 सदस्यीय असम विधानसभा के चुनाव मार्च-अप्रैल में होने की संभावना है. सत्तारूढ़ भाजपा के पास वर्तमान में 64 सीटें हैं, जबकि उसके सहयोगी दल – असम गण परिषद (एजीपी), यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल (यूपीपीएल) और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ) – उसकी ताकत बढ़ाते हैं. कांग्रेस के पास सदन में 26 विधायक हैं और वह अन्य विपक्षी दलों के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है.
