नई दिल्ली: गुजरात सरकार ने शुक्रवार (20 फरवरी) को घोषणा की कि वह गुजरात विवाह पंजीकरण अधिनियम के तहत बनाए गए नियमों में संशोधन करने की योजना बना रही है.
द हिंदू की ख़बर के मुताबिक, विधानसभा में उपमुख्यमंत्री हर्ष सांघवी ने नए मानदंडों की आवश्यकता पर बल देते हुए आरोप लगाया कि मासूम लड़कियां फंस रही हैं. ऐसी प्रथाएं समाज में दीमक की तरह फैल रही हैं.
हर्ष सांघवी कहा कि कई लोगों और सामाजिक संगठनों ने सरकार से प्रक्रियात्मक खामियों के दुरुपयोग को रोकने के लिए विवाह पंजीकरण नियमों में संशोधन करने का आग्रह किया था. सांघवी ने ‘लव जिहाद’ का जिक्र करते हुए कहा कि यह एक ‘सांस्कृतिक आक्रमण’ के समान है और भाजपा सरकार अब इस मुद्दे को नजरअंदाज नहीं कर सकती.
उल्लेखनीय है कि तथाकथित ‘लव जिहाद’ शब्द हिंदुत्ववादी समूहों द्वारा इजाद किया गया है, जिसका मकसद उनके अनुसार हिंदू लड़कियों का मुस्लिम समाज में शादी होने से रोकना है. ऐसा करने के पीछे वे दलील देते हैं कि मुस्लिम युवक साजिश के तहत हिंदू लड़कियों से शादी कर उनका धर्म परिवर्तन करा रहे हैं और इसके लिए विदेशी फंडिंग भी होती है.
उनका दावा यह भी रहता है कि इस तरह के धर्म परिवर्तन कराकर मुस्लिम, हिंदुओं को इस देश में अल्पसंख्यक बनाना चाह रहे हैं.
‘लव जिहाद’ शब्द का इस्तेमाल सबसे पहले साल 2009 में सनातन प्रभात और हिंदू जनजागृति समिति द्वारा एक कॉन्सपिरेसी थ्योरी के तौर पर किया गया था, जिसे बाद में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और विश्व हिंदू परिषद ने भी अपना लिया. 2014 के बाद यह विभिन्न राज्यों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकारों का केंद्रीय एजेंडा बन गया.
अब तक गुजरात, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और हरियाणा ऐसे प्रमुख राज्यों में शामिल हैं जहां इसे लेकर कानून बनाया गया है.
अब विवाह पंजीकरण नियमोंं में संशोधन को लेकर गुजरात के उपमुख्यमंत्री का कहना है कि ये सुरक्षा उपायों को मजबूत करने के उद्देश्य से किया जा रहा है. उनके अनुसार, प्रस्तावित संशोधनों पर जनता से 30 दिनों के लिए आपत्तियांं और सुझाव आमंत्रित किए जा रहे हैं.
उन्होंने कहा, ‘लोग और संगठन स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की वेबसाइट पर अपने सुझाव और आपत्तियां दर्ज करा सकते हैं. विभाग द्वारा प्राप्त इन सुझावों और आपत्तियों पर विचार करने के बाद नए नियम लागू किए जाएंगे.’
बाद में मंत्री कार्यालय ने संशोधित नियमों के तहत विवाह पंजीकरण की प्रस्तावित प्रक्रिया का विस्तृत दस्तावेज साझा किया.
पंजीकरण प्रक्रिया में माता-पिता को जानकारी की अनिवार्यता
इन प्रस्तावित नियमों के अनुसार, प्रत्येक विवाह पंजीकरण आवेदन सहायक रजिस्ट्रार के समक्ष प्रस्तुत करना होगा, साथ ही आवेदकों को यह घोषणा पत्र संलग्न करना होगा कि क्या जोड़े ने अपने माता-पिता को विवाह के बारे में सूचित किया है.
इसके अलावा पुरुष और महिला दोनों ही को आवेदन में अपने माता-पिता के नाम, पते, आधार कार्ड और संपर्क विवरण प्रदान करने होंगे.
प्रस्तावित नियमों के अनुसार, सहायक रजिस्ट्रार के संतुष्ट होते ही पुरुष और महिला के माता-पिता को दस कार्यदिवसों के भीतर सूचित कर दिया जाएगा. सहायक रजिस्ट्रार आवेदन को संबंधित जिले या तालुका के रजिस्ट्रार को आगे भेजेंगे. रजिस्ट्रार द्वारा उप-नियमों में निर्दिष्ट आवश्यकताओं के पूर्ण होने की पुष्टि के 30 दिनों के भीतर विवाह का पंजीकरण किया जाएगा.
प्रस्तावित नियमों के अनुसार, रजिस्ट्रार इन सभी विवरणों को सरकार द्वारा निर्मित किए जाने वाले एक ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड करेंगे.
इस संबंध में आम आदमी पार्टी (आप) के विधायक हेमंत अहीर, जिन्होंने गुरुवार को इस संबंध में एक निजी विधेयक पेश किया था, और भाजपा विधायक लविंगजी ठाकोर ने सदन में उपमुख्यमंत्री को बधाई देते हुए कहा कि प्रस्तावित बदलाव समय की मांग हैं. उन्होंने कहा कि असामाजिक तत्व मौजूदा व्यवस्था की खामियों का फायदा उठाकर मासूम लड़कियों को बहला-फुसलाकर उनकी शादी करवा रहे हैं और उनका पंजीकरण करवा रहे हैं.
गौरतलब है कि हाल ही में दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया था कि सहमति से शादी करने वाले वयस्कों को अपने जीवनसाथी का चुनाव करने के लिए समाज की स्वीकृति की आवश्यकता नहीं है और समाज या उनके माता-पिता ऐसे मामलों में हस्तक्षेप नहीं कर सकते.
जस्टिस सौरभ बनर्जी ने कहा था कि सहमति से विवाह करने का निर्णय पूरी तरह पवित्र है और ऐसे फैसले को सम्मान दिया जाना चाहिए, विशेषकर तब जब दोनों व्यक्ति वयस्क हों और उन्हें अपने जीवनसाथी चुनने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त हो.
अदालत ने दोहराया था कि विवाह करने का अधिकार मानवीय स्वतंत्रता का अभिन्न हिस्सा है और यह इंसान की व्यक्तिगत पसंद का मामला है. यह अधिकार न केवल मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा में निहित है, बल्कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का भी अहम पहलू है.
