नई दिल्ली: गौहाटी हाईकोर्ट ने बुधवार (18 फरवरी) को जीवन के अधिकार में गरिमा के साथ जीने का अधिकार भी शामिल होने पर जोर देते हुए असम सरकार को निर्देश दिया कि पिछले वर्ष जून में बेदखली अभियान से प्रभावित होकर पिछले आठ महीनों से अस्थायी शिविरों में रह रहे लोगों को चिकित्सा सुविधा और शिक्षा सहित बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं.
द टेलीग्राफ की रिपोर्ट के अनुसार, जस्टिस देवाशीष बरुआ की पीठ ने राज्य सरकार से कहा कि वह अपने रुख पर 9 मार्च तक हलफनामा दाखिल करे. मामले की अगली सुनवाई 11 मार्च को तय की गई है.
अदालत ने कहा कि ‘जीवन के अधिकार में गरिमा के साथ जीने का अधिकार, स्वच्छ पेयजल का अधिकार, स्वच्छता का अधिकार और बुनियादी चिकित्सा सुविधाओं तक पहुंच का अधिकार शामिल है.’
याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश अधिवक्ता जेड. खालिद ने अदालत को बताया कि लगभग 60 याचिकाकर्ता अत्यंत अमानवीय परिस्थितियों में रह रहे हैं और तत्काल हस्तक्षेप आवश्यक है. उन्होंने कहा कि एक कल्याणकारी राज्य होने के नाते सरकार पर संवैधानिक दायित्व है कि वह स्वच्छता, पीने का पानी, चिकित्सा सुविधा और भोजन जैसी बुनियादी जरूरतें सुनिश्चित करे.
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि बेदखली कार्रवाई इस आधार पर की गई कि संबंधित भूमि एक वेटलैंड का हिस्सा है, लेकिन यह कदम सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित कानून के विपरीत था.
उन्होंने बताया कि इस अभियान से बांग्ला भाषी 566 परिवार – जिनमें बच्चे भी शामिल हैं – प्रभावित हुए हैं. यह बेदखली निचले असम के गोआलपाड़ा जिला के हाशिला बील क्षेत्र में की गई थी.
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि विस्थापित परिवारों के लिए स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, उचित मूल्य की दुकानों से पर्याप्त राशन उपलब्ध कराया जाए तथा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंच दी जाए. साथ ही अदालत ने अस्थायी स्वच्छता व्यवस्था विकसित करने के उपाय खोजने को भी कहा.
मालूम हो कि जुलाई 2025 में धुबरी ज़िला प्रशासन ने ज़िले के बिलाशीपारा में असम सरकार द्वारा प्रस्तावित 3,400 मेगावाट के थर्मल पवार प्लांट स्थल पर 2,000 से ज़्यादा मिया मुसलमानों के घरों को गिरा दिया था.
राज्य के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 2016 में जब भारतीय जनता पार्टी की सरकार सत्ता में आई थी, से लेकर अगस्त 2025 तक, 15,270 परिवारों – जिनमें से अधिकांश मुस्लिम हैं – को सरकारी ज़मीन से बेदखल किया गया है. 2016 से अब तक की गई बेदखली के दौरान कम से कम आठ मुसलमानों की गोली मारकर हत्या की गई है.
