नई दिल्ली: मणिपुर में जातीय हिंसा के दौरान भीड़ के क्रूर हमले में घायल हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक वुंगजागिन वाल्टे, जिनकी 20 फरवरी को चोटों के कारण मौत हो गई, उन्होंने पांच महीने पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इस हमले की जांच के लिए किसी विशेष एजेंसी द्वारा जांच न कराए जाने पर चिंता जताई थी.
द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, वाल्टे ने 13 सितंबर 2025 को प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखा था, जब मई 2023 में हिंसा शुरू होने के दो वर्ष से अधिक समय बाद प्रधानमंत्री ने पहली बार मणिपुर का दौरा किया था.
पत्र में वाल्टे ने लिखा था, ‘4 मई 2023 को मुख्यमंत्री कार्यालय में सुरक्षा बैठक में शामिल होने के बाद – जहां जातीय हिंसा के कारण इंफाल में फंसे विशेषकर चूड़ाचांदपुर के लोगों को सुरक्षित निकालने पर चर्चा हुई थी, घर लौटते समय आरआईएमएस रोड पर मेईतेई मिलिशिया (अरमबाई तेंग्गोल) ने मुझ पर क्रूर हमला किया. इस हमले में मुझे गंभीर चोटें आईं, जिससे मैं आज तक लकवाग्रस्त और शारीरिक तौर पर अक्षम हूं. इतनी गंभीर घटना के बावजूद कोई विशेष जांच (सीबीआई/एनआईए) शुरू नहीं की गई और समुदाय हाशिये पर बना हुआ है.’
ऐसा माना जा रहा है कि तीसरे कोष्ठक में दिए गए शब्द संभवतः अख़बार द्वारा जोड़े गए हैं. मेईतेई समुदाय का सशस्त्र संगठन अरमबाई तेंग्गोल कई जातीय हिंसा से जुड़े अपराधों की जिम्मेदारी लेने के कारण चर्चा में रहा है.
द वायर की रिपोर्ट के मुताबिक, जोमी समुदाय से आने वाले वाल्टे मणिपुर के कुकी-जो बहुल चूड़ाचांदपुर जिले की थानलोन सीट का प्रतिनिधित्व करते थे. इस महीने की शुरुआत में उनकी तबीयत बिगड़ने पर उन्हें पूर्वोत्तर राज्य से हरियाणा के गुड़गांव स्थित मेदांता अस्पताल लाया गया था, जहां उनका निधन हो गया. हाल ही में 4 फरवरी को राष्ट्रपति शासन से बाहर आए मणिपुर राज्य ने उनके सम्मान में तीन दिन का राजकीय शोक घोषित किया है.
द हिंदू की रिपोर्ट में कहा गया है कि अपने पत्र में वाल्टे ने लिखा था कि तीन बार विधायक रहने और पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह के भाजपा सलाहकार के रूप में उन्होंने जोमी-कुकी-हमार समुदाय के सामने आने वाली चुनौतियों को प्रत्यक्ष रूप से देखा है.
उन्होंने आगे कहा कि जोमी-कुकी-हमार समुदाय को राज्य की राजधानी इंफाल और घाटी क्षेत्र से बाहर कर दिया गया, जिससे पूरी तरह से भौतिक और सामाजिक विभाजन पैदा हो गया है.
पत्र में उन्होंने लिखा, ‘इन परिस्थितियों में मैं विनम्रतापूर्वक अनुरोध करता हूं कि भारतीय संविधान के तहत उपर्युक्त स्वदेशी आदिवासी समुदाय को एक अलग प्रशासन दिया जाए, बेहतर होगा कि विधायिका सहित केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा प्रदान किया जाए.’
अलग प्रशासन की उनकी मांग कुकी नेशनल ऑर्गेनाइजेशन और यूनाइटेड पीपुल्स फ्रंट की मांगों के अनुरूप थी, जो ‘सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस’ वार्ता के जरिए राजनीतिक समाधान चाहते हैं. पत्र में उन्होंने लिखा, ‘मैं आपसे आग्रह करता हूं कि इस मांग पर सर्वोच्च स्तर पर विचार किया जाए, क्योंकि मणिपुर के इतिहास में जबरन शांति थोपना टिकाऊ साबित नहीं हुआ है.’
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया पर वाल्टे के निधन पर शोक व्यक्त किया था, हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि उन्होंने उनका पत्र पढ़ा या उसका कोई उत्तर दिया.
ज्ञात हो कि 3 मई 2023 को जातीय हिंसा भड़कने के अगले दिन इंफाल में तत्कालीन मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह के कार्यालय से लौटते समय उन पर भीड़ ने हमला किया था. हमले में उनके कुकी-जो ड्राइवर की हत्या कर दी गई थी, जबकि उनके मेईतेई सुरक्षा अधिकारी को छोड़ दिया गया था. इस मामले में अब तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है.
