नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल के एक प्रवासी मज़दूर पर मध्य प्रदेश के सागर ज़िले में कथित तौर पर बांग्ला भाषा में बात करने के लिए चाकू से हमला कर दिया गया.
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिम बंगाल के पहाड़पुर गांव के निवासी 37 वर्षीय सैयद एसके वर्ष 2015 से मध्य प्रदेश में कपड़े बेचने का काम कर रहे थे. 19 फरवरी को समनापुर गांव में कथित तौर पर उनके साथ लूटपाट की गई और उन्हें कई बार चाकू मारा गया.
अख़बार के अनुसार, बाद में उन्हें बुंदेलखंड अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी सर्जरी की गई. सैयद की पत्नी नुरेफ़ा बीबी ने बताया कि उन्हें बांग्ला बोलने की वजह से निशाना बनाए जाने का डर पहले से ही था.
पश्चिम बंगाल प्रवासी मज़दूर कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष और तृणमूल कांग्रेस के सांसद समीरुल इस्लाम ने अख़बार से कहा, ‘हमने उनके इलाज की व्यवस्था की है औरएफआईआर दर्ज कराई गई है. लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी के कहने पर हम सैयद और उनके परिवार की देखभाल कर रहे हैं. उनके स्वस्थ होने के बाद उन्हें वापस राज्य लाया जाएगा और यहीं पुनर्वास की व्यवस्था की जाएगी.’
उल्लेखनीय है कि बीते कुछ वर्षों में बांग्ला भाषी प्रवासी मज़दूरों पर हमलों की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं. कई मामलों में दक्षिणपंथी तत्व इन मज़दूरों पर बिना दस्तावेज़ वाले बांग्लादेशी प्रवासी होने का आरोप लगाते रहे हैं.
इस महीने की शुरुआत में पश्चिम बंगाल के पुरुलिया ज़िले के एक प्रवासी मज़दूर की महाराष्ट्र के पुणे में हत्या कर दी गई थी. परिवार का आरोप था कि उसे बांग्ला बोलने की वजह से निशाना बनाया गया.
जनवरी में छत्तीसगढ़ के सूरजपुर ज़िले में बजरंग दल के सदस्यों द्वारा कथित तौर पर बंगाल के आठ प्रवासी मज़दूरों पर एक ब्रेड की फैक्ट्री में बेरहमी से हमला किया गया और उन्हें वहां से भगा दिया गया.
इससे पहले जुलाई 2025 में हरियाणा के गुरुग्राम में 250 से अधिक बांग्ला भाषी प्रवासी मज़दूरों, जिनमे अधिकतर मुस्लिम थे, को हिरासत में लिया गया और कथित तौर पर परेशान किया गया, जिसके बाद वे बड़ी संख्या में अपने गृह नगर लौटने को मजबूर हुए थे.
ओडिशा, दिल्ली, राजस्थान और गुजरात से भी इस तरह के हमलों की खबरें सामने आई हैं.
