छत्तीसगढ़: आदिवासी नेता की हिरासत में मौत पर विधानसभा में हंगामा, राज्य की जेलों में 13 महीनों में 66 क़ैदियों की मौत

छत्तीसगढ़ विधानसभा में एक आदिवासी नेता की हिरासत में हुई मौत को लेकर विपक्षी सदस्यों ने हंगामा किया. सरकार ने बताया था कि जनवरी 2025 से 31 जनवरी 2026 तक 13 महीनों के दौरान राज्य की केंद्रीय और ज़िला जेलों में दोषियों सहित 66 क़ैदियों की मौत हुई है.

(प्रतीकात्मक फोटो साभार: Tum Hufner/Unsplash)

नई दिल्ली: छत्तीसगढ़ विधानसभा में गुरुवार (26 फरवरी) को हाल ही में एक आदिवासी नेता की हिरासत में हुई मौत को लेकर विपक्षी सदस्यों ने जोरदार हंगामा किया. राज्य सरकार ने सदन को बताया कि जनवरी 2025 से इस वर्ष 31 जनवरी तक राज्य की विभिन्न जेलों में कुल 66 कैदियों की मौत हुई है.

द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रश्नकाल के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता भूपेश बघेल ने पिछले 13 महीनों में राज्य की जेलों में हुई हिरासत में मौतों की संख्या को लेकर सवाल उठाया. उन्होंने यह भी पूछा कि क्या ऐसे सभी मामलों में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के दिशानिर्देशों के अनुसार न्यायिक जांच पूरी की गई है.

इसके जवाब में उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने बताया कि 31 जनवरी 2026 तक 13 महीनों के दौरान राज्य की केंद्रीय और जिला जेलों में दोषियों सहित 66 कैदियों की मौत हुई. उन्होंने कहा कि हिरासत में मौत के मामलों में अनिवार्य न्यायिक मजिस्ट्रेट जांच 18 मामलों में पूरी हो चुकी है, जबकि बाकी मामलों में प्रक्रिया जारी है.

इसके बाद भूपेश बघेल ने आदिवासी नेता जीवन ठाकुर की मौत का मुद्दा उठाया, जिनकी 4 दिसंबर पिछले वर्ष न्यायिक हिरासत के दौरान तबीयत बिगड़ने के बाद मृत्यु हो गई थी और मामले का पूरा विवरण मांगा.

आरोपों का जवाब देते हुए विजय शर्मा ने कहा कि ठाकुर को 12 अक्टूबर, 2025 को फर्जी प्रमाणपत्र गिरोह में कथित संलिप्तता के आरोप में गिरफ्तार किया गया था.

शर्मा ने सदन को बताया कि ठाकुर को पहले कांकेर जिले की जेल में रखा गया था और बाद में अदालत के आदेश पर उन्हें राज्य की राजधानी रायपुर की जेल में स्थानांतरित किया गया. स्वास्थ्य बिगड़ने पर उन्हें रायपुर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया और बाद में इलाज के लिए डॉ. बीआर आंबेडकर मेमोरियल अस्पताल भेजा गया, जहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई.

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार इस मौत की जांच के लिए एक समिति गठित की गई है.

हालांकि विपक्षी विधायकों, जिनमें भूपेश बघेल और सावित्री मनोज मांडवी शामिल थीं, ने उनकी मौत की परिस्थितियों पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि ठाकुर को झूठे मामले में फंसाया गया था.

भूपेश बघेल ने आरोप लगाया कि ठाकुर मधुमेह के मरीज थे और उन्हें जेल में समय पर दवा नहीं दी गई. उन्होंने यह भी कहा कि शिकायतें मिली थीं कि जेल अधीक्षक ने डॉक्टरों की सलाह की अनदेखी की और उन्हें उचित चिकित्सा सुविधा से वंचित रखा.

इस पर गृह मंत्री ने कहा कि जेल प्रशासन ने उनके चिकित्सा कर्मचारियों के साथ सहयोग न करने की जानकारी औपचारिक रूप से अदालत को दी थी.

इस पर बघेल ने मंत्री के बयान पर सवाल उठाते हुए कहा कि कोई भी मरीज जानबूझकर अपनी बीमारी क्यों बढ़ाएगा. उन्होंने आरोप लगाया कि गृह मंत्री ने विपक्ष की चिंताओं का संतोषजनक जवाब नहीं दिया और उनके पास 66 हिरासत मौतों की पूरी सूची भी नहीं है.

विपक्ष ने प्रारंभिक रिपोर्ट में मृतकों के नाम और संबंधित जेलों का विवरण न होने पर भी नाराजगी जताई. बघेल ने कथित ड्रग्स रैकेट से जुड़े बताए जा रहे दो लोगों- पंकज साहू और नव्या मलिक के नाम मौतों की सूची में शामिल होने को लेकर भी सवाल उठाए.

इस पर गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि पंकज साहू की मौत रिपोर्टिंग अवधि से बाहर हुई थी, जबकि नव्या मलिक से संबंधित विवरण अलग से उपलब्ध कराया जाएगा.

इसके बाद यह बहस राज्य की कानून-व्यवस्था की स्थिति तक भी पहुंच गई. बघेल ने हत्या, लूट और फिरौती जैसे जघन्य अपराधों में 35 प्रतिशत वृद्धि का दावा किया, जबकि गृह मंत्री ने कहा कि वर्तमान भारतीय जनता पार्टी सरकार के दौरान अपराध दर में कमी आई है.

बघेल ने आदिवासी नेता जीवन ठाकुर मामले की जांच विधानसभा समिति से कराने की भी मांग की. इसके जवाब में विजय शर्मा ने कहा कि जब न्यायिक जांच पहले से जारी है, तब समानांतर विधायी जांच समिति की आवश्यकता नहीं है और विशेष समिति बनाने की मांग को खारिज कर दिया.

इसके बाद कांग्रेस विधायकों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए विरोध जताया, जबकि अध्यक्ष ने सदन में व्यवस्था बहाल करने की कोशिश की. हालांकि, सरकार की कैदी कल्याण और आदिवासी अधिकारों को लेकर नीतियों के खिलाफ नारेबाजी करते हुए विपक्षी सदस्यों ने सदन से वॉकआउट कर दिया.