अडानी को मिले कोयला ब्लॉक की पर्यावरण मंज़ूरियों पर एनजीटी का केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस

मध्य प्रदेश के सिंगरौली ज़िले में अडानी समूह को आवंटित धिरौली कोयला ब्लॉक की पर्यावरण मंज़ूरियों को लेकर एनजीटी ने केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है. याचिकाओं में 5.70 लाख पेड़ों की कटाई और प्रस्तावित हाथी कॉरिडोर पर संभावित असर को चुनौती दी गई है.

प्रतीकात्मक तस्वीर. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले में अडानी समूह को आवंटित कोयला ब्लॉक के लिए दी गई पर्यावरणीय मंजूरियों के मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने केंद्र और मध्य प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया है. 

द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, 26 फरवरी को एनजीटी की प्रधान पीठ के अध्यक्ष प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य अफरोज़ अहमद ने पर्यावरण कार्यकर्ता अजय दुबे द्वारा दायर दो याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए ये नोटिस जारी किए. एक याचिका में परियोजना के लिए पेड़ों की कटाई की दी गई मंजूरी को चुनौती दी गई है, जबकि दूसरी में दावा किया गया है कि प्रस्तावित हाथी कॉरिडोर धिरौली कोयला ब्लॉक क्षेत्र से होकर गुजरता है. यह ब्लॉक अडानी पावर की सहायक कंपनी महान एनर्जेन लिमिटेड को आवंटित किया गया है.

दुबे ने अपनी याचिकाओं में आरोप लगाया है कि इस परियोजना के लिए 5.70 लाख से अधिक पेड़ों की कटाई की मंजूरी स्थानीय इकोलॉजी को प्रभावित करेगी और क्षेत्र में वन्यजीवों की आवाजाही पर असर डाल सकती है. उन्होंने पिछले साल 9 मई को जारी पर्यावरण मंत्रालय के आदेश और 22 मई को मध्य प्रदेश वन विभाग द्वारा जारी आदेश को चुनौती दी है, जिनमें पेड़ कटाई की अनुमति दी गई थी.

एनजीटी ने याचिकाओं की सामग्री पर कोई टिप्पणी किए बिना केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, नेशनल बोर्ड फॉर वाइल्डलाइफ और मध्य प्रदेश वन विभाग को नोटिस जारी कर जवाब देने को कहा है. ट्रिब्यूनल ने निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई से कम से कम एक सप्ताह पहले जवाब हलफनामे के रूप में प्रस्तुत किया जाए. 

अख़बार के मुताबिक, पेड़ कटाई से जुड़ी याचिका की अगली सुनवाई 22 अप्रैल को होगी, जबकि प्रस्तावित हाथी कॉरिडोर से संबंधित याचिका पर 26 मई को सुनवाई निर्धारित है.

याचिकाकर्ता दुबे ने यह भी मांग की है कि प्रस्तावित सिधी-सिंगरौली-पालामू हाथी कॉरिडोर की सीमाएं चिन्हित कर उसे इकोलॉजिकल संवेदनशील क्षेत्र (इको सेंसिटिव ज़ोन/ईएसज़ेड) घोषित किया जाए.

एनजीटी ने अपने आदेश में कहा, ‘आवेदक के अधिवक्ता ने ट्रिब्यूनल की प्रधान पीठ के 14 नवंबर 2018 के आदेश का हवाला दिया, जिसमें हाथी कॉरिडोर घोषित करने के मुद्दे पर विचार किया गया था और पर्यावरण मंत्रालय को पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत देशभर के सभी हाथी कॉरिडोर को इको-सेंसिटिव ज़ोन घोषित करने के प्रश्न पर विचार करने को कहा गया था. उन्होंने 16 मई 2019 के आदेश का भी उल्लेख किया, जिसमें कहा गया था कि मंत्रालय ने हाथी संरक्षण क्षेत्रों में हाथियों की सुरक्षा और अन्य लंबित मुद्दों पर संबंधित राज्यों के साथ समन्वय के लिए एक केंद्रीय मॉनिटरिंग कमेटी गठित की है.’

पीठ ने यह भी कहा कि आवेदक के वकील ने लोकसभा में वर्ष 2018 में पूछे गए प्रश्नों का हवाला दिया, जिनमें सभी हाथी कॉरिडोर को इको-सेंसिटिव ज़ोन घोषित करने के मुद्दे पर जानकारी मांगी गई थी. इसके उत्तर में राज्यों द्वारा प्रस्तावित कॉरिडोरों की सूची पेश की गई थी. मध्य प्रदेश द्वारा प्रस्तावित दो कॉरिडोर- सिंगरौली-सिधी-गुरु घासीदास और सिधी-सिंगरौली-पालामू, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और झारखंड के अंतर्गत आते हैं.

एनजीटी ने कहा, ‘सभी तकनीकी आपत्तियों को खुला रखते हुए हम प्रतिवादियों को नोटिस जारी करने का निर्देश देते हैं, ताकि वे अगली सुनवाई की तिथि से कम से कम एक सप्ताह पहले हलफनामे के रूप में अपना जवाब दाखिल करें.’

दुबे ने द हिंदू से बातचीत में आरोप लगाया कि हाथी कॉरिडोर की अधिसूचना ‘कोयला ब्लॉक के लिए आवश्यक मंजूरियां देने के उद्देश्य से जानबूझकर टाली जा रही है.’

उन्होंने कहा, ‘एक बार कॉरिडोर अधिसूचित हो जाने के बाद कंपनी को उस क्षेत्र में पेड़ कटाई और अन्य गतिविधियों की मंजूरी नहीं मिल सकेगी.’

उन्होंने आगे कहा, ‘पर्यावरण मंत्रालय की ही एक फील्ड रिपोर्ट के अनुसार आवंटित क्षेत्र घने जंगलों से भरा है, जहां 0.40 से 0.60 घनत्व वाली छतरी (कैनोपी) है और समृद्ध वनस्पति एवं जीव-जंतु पाए जाते हैं. यहां साल, शीशम, सागौन सहित 50 से अधिक प्रजातियों के ट्रॉपिकल पेड़ हैं. हमारी मांग केवल इतनी है कि इस क्षेत्र को, खासकर निजी हाथों में, कोयला खनन के लिए न खोला जाए, क्योंकि इससे पूरे वन क्षेत्र की संवेदनशीलता और प्राकृतिक शुद्धता प्रभावित होगी.’

द हिंदू के मुताबिक, पिछले वर्ष सितंबर में अडानी समूह ने कहा था कि उसे धिरौली खदान में खनन कार्य शुरू करने के लिए केंद्रीय कोयला मंत्रालय से मंजूरी मिल गई है. यह खदान अडानी पावर की सहायक कंपनी महान एनर्जेन लिमिटेड द्वारा संचालित की जाएगी. सिंगरौली जिले के कई गांवों और वन क्षेत्रों में फैला धिरौली कोयला ब्लॉक मध्य प्रदेश के सबसे बड़े ब्लॉकों में से एक है, जो लगभग 27 वर्ग किलोमीटर में फैला है. क्षेत्र में करीब 5.70 लाख पेड़ों की कटाई की प्रक्रिया जारी है.

कांग्रेस ने भी इस परियोजना में पर्यावरणीय उल्लंघनों और भूमि अधिग्रहण व मुआवजे में कथित अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं. 27 फरवरी को स्थगित हुए मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दौरान कांग्रेस विधायकों ने आरोप लगाया कि जिन आठ गांवों की जमीन खनन कार्य के लिए अधिग्रहित की जा रही है, वहां के निवासियों को उचित मुआवजा नहीं दिया जा रहा है.