नई दिल्ली: 28 फरवरी से ईरान पर अमेरिका और इज़रायल द्वारा शुरू किए गए सैन्य हमलों के बाद पश्चिम एशिया में जारी युद्ध अब 11वें दिन में पहुंच गया है. इस संघर्ष का असर केवल सैन्य मोर्चे तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था, तेल की कीमतों और आम लोगों की जिंदगी पर भी गंभीर असर पड़ रहा है.
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास ने कहा है कि इस युद्ध के कारण तेल की कीमतें लगभग दोगुनी हो गई हैं और अन्य जरूरी वस्तुओं के दाम भी तेजी से बढ़ रहे हैं. उनका आरोप है कि अमेरिका ईरान के तेल और परमाणु ठिकानों को निशाना बनाने की योजना बना रहा है, हालांकि उन्होंने कहा कि ईरान हर स्थिति का सामना करने के लिए तैयार है.
ओमान की चेतावनी
क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच ओमान ने समुद्र में जाने वाले जहाजों और नाविकों को चेतावनी जारी की है. ओमान ने कहा है कि इस समय जीपीएस नेविगेशन सिस्टम में हस्तक्षेप या सिग्नल बाधित होने का खतरा हो सकता है, इसलिए नाविकों को केवल जीपीएस पर निर्भर नहीं रहना चाहिए.
सरकार ने सलाह दी है कि समुद्र में लंबी दूरी तय करने से पहले वैकल्पिक नेविगेशन साधन साथ रखें और आवश्यकता पड़ने पर पारंपरिक चुंबकीय कंपास का इस्तेमाल करें. ओमान की यह चेतावनी इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि वह स्ट्रीट ऑफ होर्मुज (समुद्री मार्ग) और उत्तरी अरब सागर के पास स्थित है, जो दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्गों में से एक है.
तुर्की ने तैनात की मिसाइल रक्षा प्रणाली
इधर क्षेत्रीय तनाव को देखते हुए तुर्की ने अपनी पूर्वी सीमा की सुरक्षा बढ़ाने के कदम उठाए हैं. तुर्की सरकार ने घोषणा की है कि मलात्या शहर में पैट्रियट एयर और मिसाइल डिफेंस सिस्टम तैनात किया गया है और इसे जल्द ही पूरी तरह सक्रिय किया जाएगा.
पैट्रियट प्रणाली बैलिस्टिक मिसाइलों, क्रूज मिसाइलों और लड़ाकू विमानों को रोकने के लिए इस्तेमाल की जाती है. तुर्की ने कहा है कि वह नाटो और अपने सहयोगी देशों के साथ मिलकर क्षेत्रीय हालात पर नजर रख रहा है.
भारत में प्राकृतिक गैस आपूर्ति पर नियंत्रण
पश्चिम एशिया में बढ़ते संकट का असर भारत तक भी पहुंच रहा है. केंद्र सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत प्राकृतिक गैस की आपूर्ति को नियंत्रित करने का फैसला किया है.
9 मार्च को जारी आदेश में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने कहा कि एलएनजी और री-गैसीफाइड एलएनजी समेत प्राकृतिक गैस के उत्पादन, वितरण और विभिन्न क्षेत्रों में आवंटन को नियंत्रित किया जाएगा, ताकि प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को गैस की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके.
हिज़्बुल्लाह के रॉकेट हमले
इसी बीच लेबनान स्थित संगठन हिज़्बुल्लाह ने दावा किया है कि उसके लड़ाकों ने उत्तरी इज़रायल में कई ठिकानों पर रॉकेट दागे हैं. अल-जज़ीरा की रिपोर्ट के अनुसार, संगठन ने लेबनान के ऐतरौन इलाके के सामने स्थित अल-मलिकियाह सैन्य ठिकाने को निशाना बनाने की बात कही है.
हिज़्बुल्लाह ने यह भी कहा कि उसने दक्षिणी लेबनान के अल-अब्बाद इलाके के पास मौजूद इज़रायली सैनिकों और तोपखाने की स्थिति पर भी रॉकेट दागे. इसके अलावा खियाम शहर के दक्षिण में स्थित तेल अल-हमामेस इलाके में भी हमला करने का दावा किया गया है.
ट्रंप का दावा: 46 ईरानी नौसैनिक जहाज डुबोए
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिकी सेना ने साढ़े तीन दिनों के भीतर ईरान के 46 आधुनिक नौसैनिक जहाजों को डुबो दिया. ट्रंप ने कांग्रेस में रिपब्लिकन सांसदों से बातचीत के दौरान कहा कि उन्होंने सैन्य अधिकारियों से पूछा था कि जहाजों को कब्जे में लेने के बजाय डुबो क्यों दिया गया. उनके अनुसार एक अधिकारी ने जवाब दिया कि ‘उन्हें डुबोना ज्यादा मजेदार था.’
लेबनान में बड़े पैमाने पर विस्थापन
संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि युद्ध के कारण क्षेत्र में भोजन और ईंधन की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं, जिससे मानवीय संकट गहराने का खतरा है.
संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) के अनुसार, केवल लेबनान में लगभग सात लाख लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हो गए हैं, जिनमें करीब दो लाख बच्चे शामिल हैं. इससे पहले भी क्षेत्र में संघर्ष के कारण बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हो चुके थे.
ईरान में स्कूल पर मिसाइल हमले की रिपोर्ट
ईरान की मेहर समाचार एजेंसी ने खबर दी है कि अमेरिका की ओर से मध्य ईरान के खोमेयन शहर में स्थित डॉ. हाफ़ेज़ खोमेनी स्कूल पर मिसाइल हमला किया गया. हमले में स्कूल के आसपास के कई घरों को भी नुकसान पहुंचा है, हालांकि फिलहाल किसी के हताहत होने की पुष्टि नहीं हुई है.
यह रिपोर्ट उस घटना के बाद आई है जिसमें दक्षिणी ईरान के मिनाब शहर में एक लड़कियों के स्कूल पर मिसाइल हमले में कम से कम 170 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें अधिकांश छात्राएं बताई जा रही हैं. इस घटना की स्वतंत्र जांच की मांग भी उठ रही है.
लगातार बढ़ते सैन्य हमलों, क्षेत्रीय अस्थिरता और मानवीय संकट के बीच पश्चिम एशिया की स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है और इसके असर दूर-दूर तक महसूस किए जा रहे हैं.
