नई दिल्ली: अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि ईरान द्वारा परमाणु हथियार विकसित न करने की अमेरिकी शर्तों को मानने से इनकार करने के बाद अमेरिका और ईरान के बीच रविवार (12 अप्रैल) सुबह शांति समझौते के बिना वार्ता समाप्त हो गई.
रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के सरकारी प्रसारक ने भी वार्ता के खत्म होने की पुष्टि करते हुए कहा, ‘अमेरिकी पक्ष की अनुचित और अत्यधिक मांगों ने वार्ता में प्रगति को रोक दिया.’
उल्लेखनीय है कि पश्चिमी एशिया में हजारों लोगों की जान ले चुके इस युद्ध के सातवें सप्ताह में प्रवेश करने के बाद दो हफ्ते के नाजुक युद्धविराम की घोषणा हुई, जिसके कुछ दिनों बाद अमेरिका और ईरान के बीच ऐतिहासिक आमने-सामने की वार्ता का तीसरा दौर समाप्त हुआ.
इस संबंध में ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाक़ेई ने रविवार सुबह एक बयान जारी करते हुए कहा, ‘ईरानी वार्ताकार ईरान के अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए अपनी सभी क्षमताओं, अनुभव और ज्ञान का उपयोग कर रहे हैं. हमारे महान बुजुर्गों, प्रियजनों और देशवासियों के भारी नुकसान ने ईरानी राष्ट्र के हितों और अधिकारों को आगे बढ़ाने के हमारे संकल्प को पहले से कहीं अधिक दृढ़ बना दिया है.’
बाक़ाई ने आगे कहा कि ‘होर्मुज़ जलडमरूमध्य, परमाणु मुद्दा, युद्ध क्षतिपूर्ति, प्रतिबंधों को हटाना और ईरान तथा क्षेत्र में युद्ध की पूर्ण समाप्ति सहित मुख्य वार्ता विषयों के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई, लेकिन इस राजनयिक प्रक्रिया की सफलता विपक्षी पक्ष की गंभीरता और सद्भावना, अत्यधिक मांगों और गैरकानूनी अनुरोधों से परहेज करने और ईरान के वैध अधिकारों और हितों को स्वीकार करने पर निर्भर करती है.’
دیپلماسی برای ما ادامه جهاد مقدس مدافعان ایران زمین است. تجربه بدعهدیها و بدسگالیهای آمریکا را فراموش نکرده و نمیکنیم. همانطور که جنایات شنیع ارتکابی آنها و رژیم صهیونیستی در جریان جنگهای تحمیلی دوم و سوم را نخواهیم بخشید.
امروز روز پر کار و طولانی برای هیات نمایندگی جمهوری…
— Esmaeil Baqaei (@IRIMFA_SPOX) April 12, 2026
परमाणु हथियार को लेकर ईरान से साफ़ और ठोस प्रतिबद्धता चाहिए: वेंस
वहीं, वेंस ने बताया कि वार्ता 21 घंटे तक चली. उन्होंने पत्रकारों से कहा, ‘सीधी बात यह है कि हमें ईरान से साफ़ और ठोस प्रतिबद्धता चाहिए कि वह न तो परमाणु हथियार बनाने की कोशिश करेगा और न ही ऐसे साधन जुटाएगा, जिनसे वह जल्दी परमाणु हथियार बना सके.’
उन्होंने आगे कहा, ‘यही संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति का मूल लक्ष्य है. और यही हमने इन वार्ताओं के माध्यम से हासिल करने की कोशिश की है.’
उपराष्ट्रपति ने कहा कि उन्होंने पिछले 21 घंटों में ट्रंप से ‘लगभग छह-बारह बार’ बात की और विदेश मंत्री मार्को रुबियो, वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट और अमेरिकी केंद्रीय कमान के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर से भी बात की.
विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर के साथ पोडियम पर खड़े होकर बोलते हुए वेंस ने कहा, ‘हम टीम के साथ लगातार संपर्क में थे क्योंकि हम सद्भावना से बातचीत कर रहे थे. और हम यहां से एक बहुत ही सरल प्रस्ताव देकर जा रहे हैं, एक ऐसा समझौता जो हमारा अंतिम और सर्वोत्तम प्रस्ताव है. देखते हैं कि ईरानी इसे स्वीकार करते हैं या नहीं.’
ज्ञात हो कि इससे पहले ट्रंप ने कहा था कि वह ईरान पर हमले दो सप्ताह के लिए रोक देंगे. वेंस की टिप्पणियों से यह स्पष्ट नहीं हुआ कि उस अवधि के समाप्त होने के बाद क्या होगा या क्या युद्धविराम जारी रहेगा.
अपनी संक्षिप्त टिप्पणी के बाद वेंस पाकिस्तान से रवाना होने के लिए अपने सरकारी विमान में सवार हो गए.
दो पाकिस्तानी अधिकारियों ने बताया कि प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों के बीच बातचीत विराम के बाद फिर से शुरू होगी. अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि दोनों टीमों के कुछ तकनीकी कर्मचारी अभी भी बैठक कर रहे हैं, क्योंकि उन्हें प्रेस को जानकारी देने का अधिकार नहीं था.
होर्मुज़ से अमेरिकी जहाज निकलने के दावे का ईरान ने खंडन किया
इस बीच अमेरिका ने दावा किया है कि उसके दो जहाज़ होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजर चुके हैं और यह युद्ध शुरू होने के बाद पहली बार हुआ है. हालांकि ईरान ने इस दावे का खंडन किया है.
वहीं, इस्लामाबाद में जारी वार्ता पर ट्रंप ने कहा था, ‘देखते हैं क्या होता है, लेकिन मुझे इससे फ़र्क नहीं पड़ता.’
पाकिस्तान में बातचीत जारी रहने के बीच ट्रंप ह्वाइट हाउस में मीडिया से बात कर रहे थे. इस दौरान ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका होर्मुज़ स्ट्रेट खोलने पर काम कर रहा है.
मालूम हो कि इस्लामाबाद में वेंस के नेतृत्व में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बगेर कालिबाफ़ के नेतृत्व में ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने पाकिस्तान के साथ उन मुद्दों पर चर्चा की, जिन पर गहरे मतभेदों और लेबनान में ईरान समर्थित हिज़्बुल्लाह पर इज़रायल के लगातार हमलों के कारण पहले से ही खतरे में पड़े युद्धविराम को आगे बढ़ाया जा सके.
लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि मरने वालों की संख्या 2,000 से अधिक हो गई है.
गौरतलब है कि 1979 में ईरान में इस्लामी क्रांति के बाद से अमेरिका का सबसे सीधा संपर्क 2013 में हुआ था, जब राष्ट्रपति बराक ओबामा ने नव निर्वाचित राष्ट्रपति हसन रूहानी को ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा करने के लिए फोन किया था.
ओबामा के विदेश मंत्री जॉन केरी और उनके समकक्ष मोहम्मद जवाद ज़रीफ़ ने बाद में 2015 के ईरान परमाणु समझौते की वार्ता के दौरान मुलाकात की – यह प्रक्रिया एक वर्ष से अधिक समय तक चली.
अब व्यापक वार्ता में वेंस शामिल थे, जो युद्ध के अनिच्छुक समर्थक हैं और जिन्हें कूटनीतिक अनुभव कम है. उन्होंने ईरान को चेतावनी दी कि वह ‘उन्हें बेवकूफ बनाने की कोशिश न करे.’
वहीं, इस वार्ता में कालिबाफ़ भी शामिल थे, जो ईरान के शक्तिशाली रिवोल्यूशनरी गार्ड के पूर्व कमांडर हैं और युद्ध शुरू होने के बाद से ईरान की ओर से कुछ सबसे तीखे बयान दे चुके हैं.
ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी ने कहा कि यह तीन-पक्षीय वार्ता ईरान की पूर्व शर्तों, जिनमें दक्षिणी लेबनान पर इज़रायली हमलों में कमी शामिल है, के पूरा होने के बाद शुरू हुई.
ईरान के प्रतिनिधिमंडल ने सरकारी टीवी को बताया कि उसने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के साथ बैठकों में ‘रेड लाइन’ रखी थीं, जिनमें 28 फरवरी को युद्ध शुरू करने वाले अमेरिकी-इज़रायली हमलों से हुए नुकसान के मुआवजे और ईरान की फ्रीज की गई संपत्तियों को जारी करना शामिल था
युद्ध में हज़ारों लोगों की जान गई
इस युद्ध में ईरान में कम से कम 3,000, लेबनान में 2,020, इज़रायल में 23 और खाड़ी अरब देशों में एक दर्जन से अधिक लोग मारे गए हैं, और पश्चिम एशिया के लगभग आधा दर्जन देशों में बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है.
मालूम हो कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर ईरान की पकड़ ने फारस की खाड़ी और उसके तेल और गैस निर्यात को वैश्विक अर्थव्यवस्था से लगभग पूरी तरह से अलग कर दिया है, जिससे ऊर्जा की कीमतें आसमान छू रही हैं.
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए क्षेत्र के अधिकारियों ने कहा कि चीनी, मिस्र, सऊदी और कतरी अधिकारी अप्रत्यक्ष रूप से वार्ता को सुविधाजनक बनाने के लिए इस्लामाबाद में मौजूद थे. अधिकारियों ने इस संवेदनशील मामले पर चर्चा करने के लिए नाम न छापने की शर्त पर बात की.
तेहरान में स्थानिय लोगों ने समाचार एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस को बताया कि हफ्तों तक चले हवाई हमलों से उनके लगभग 93 मिलियन लोगों के देश में हुई तबाही के बाद वे संशय में हैं, लेकिन साथ ही आशावान भी हैं.
इस संबंध में 62 वर्षीय अमीर रज्जाई फार ने कहा, ‘हमारे देश के लिए केवल शांति ही पर्याप्त नहीं है क्योंकि हमें बहुत भारी नुकसान हुआ है, भारी कीमत चुकानी पड़ी है.’
अपने अब तक के सबसे कड़े शब्दों में पोप लियो XIV ने युद्ध को बढ़ावा देने वाले ‘सर्वशक्तिमान होने के भ्रम’ की निंदा की.
बताया जा रहा है कि ईरान द्वारा होर्मुज़ जलडमरूमध्य को बंद करना युद्ध में उसका सबसे बड़ा रणनीतिक लाभ साबित हुआ है. विश्व के कुल तेल व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा आमतौर पर प्रतिदिन 100 से अधिक जहाजों द्वारा यहां से होकर गुजरता था. युद्धविराम के बाद से केवल 12 जहाजों के गुजरने का रिकॉर्ड है.
शनिवार को ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा कि अमेरिका ने जलडमरूमध्य को ‘साफ़’ करने का काम शुरू कर दिया है और अमेरिका जलडमरूमध्य में बारूदी सुरंगों को हटाने में मदद के लिए सेना भेज रहा है.
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर ने बाद में कहा, ‘आज हमने एक नया मार्ग स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है और हम जल्द ही इस सुरक्षित मार्ग की जानकारी समुद्री उद्योग को देंगे.’
विध्वंसक पोतों के बारे में अमेरिकी बयान में आगे कहा गया, ‘पानी के भीतर ड्रोन सहित अतिरिक्त अमेरिकी बल आने वाले दिनों में इस सफाई अभियान में शामिल होंगे.’
उल्लेखनीय है कि ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने पिछली वार्ताओं के दौरान ईरान पर हुए हमलों के बाद कहा था कि तेहरान ‘गहरे अविश्वास’ के साथ बातचीत में शामिल हो रहा है. पाकिस्तान में ईरान के प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा रहे अराघची ने शनिवार को कहा कि अगर फिर से हमला हुआ तो उनका देश जवाबी कार्रवाई के लिए तैयार है.
वार्ता से पहले ईरान के 10 सूत्री प्रस्ताव में युद्ध की समाप्ति की गारंटी के मांग की गई और होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर नियंत्रण की बात कही गई.
इसमें ईरान के ‘क्षेत्रीय सहयोगियों’ के खिलाफ लड़ाई समाप्त करना और हिजबुल्लाह पर इज़रायली हमलों को स्पष्ट रूप से रोकना शामिल था.
संयुक्त राज्य अमेरिका के 15 सूत्री प्रस्ताव में ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर प्रतिबंध लगाना और जलडमरूमध्य को फिर से खोलना शामिल है.
इज़रायल और लेबनान के बीच सीधी बातचीत
इज़रायल ने लेबनान में युद्धविराम न होने की बात कहते हुए भी हमले जारी रखे. ईरान और पाकिस्तान इससे असहमत हैं.
लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन के कार्यालय ने कहा है कि इज़रायल और लेबनान के बीच वार्ता मंगलवार को वाशिंगटन में शुरू होने की उम्मीद है.
यह वार्ता इज़रायल द्वारा दोनों देशों के बीच आधिकारिक संबंधों की कमी के बावजूद वार्ता को अधिकृत करने की अप्रत्याशित घोषणा के बाद हो रही है.
हालांकि, शनिवार को लेबनान में हजारों लोगों ने प्रस्तावित वार्ता का विरोध किया, जिसके बाद प्रधानमंत्री नवाफ सलाम ने कहा कि उन्होंने ‘वर्तमान आंतरिक परिस्थितियों को देखते हुए’ वाशिंगटन की अपनी नियोजित यात्रा स्थगित कर दी है. उनकी अनुपस्थिति से वार्ता पर कोई असर नहीं पड़ेगा क्योंकि पहले दौर की वार्ता राजदूत स्तर पर होने की उम्मीद है.
युद्ध के शुरुआती दिनों में हिज़्बुल्लाह ईरान के समर्थन में युद्ध में शामिल हो गया, जिसके बाद इज़रायल ने हवाई हमले और जमीनी आक्रमण किए.
जिस दिन ईरान के साथ युद्धविराम समझौते की घोषणा हुई, उसी दिन इज़रायल ने बेरूत पर हवाई हमले किए, जिसमें 300 से अधिक लोग मारे गए. देश के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, यह युद्ध शुरू होने के बाद से लेबनान का सबसे घातक दिन था.
