नई दिल्ली: राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) द्वारा बुधवार (6 मई) को जारी एक रिपोर्ट में दिल्ली की जेलों की दयनीय स्थिति का खुलासा हुआ है. इसमें बताया गया है कि राष्ट्रीय राजधानी की जेलें देश में सबसे ज्यादा भीड़भाड़ वाली हैं. यहां एक कैदी के लिए उपलब्ध जगह में लगभग दो कैदी रखे गए हैं.
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, एनसीआरबी द्वारा जारी भारत के कारागार आंकड़े-2024 के अनुसार, दिल्ली की जेलों में 194.6% की उच्च क्षमता दर (ऑक्यूपेंसी रेट) थी, जो देशभर में सबसे अधिक है.
हालांकि, यह 2023 में दर्ज 200% की उच्च क्षमता से बेहतर थी, फिर भी यह मेघालय (163.5%), जम्मू-कश्मीर (148.3%), मध्य प्रदेश (147.1%) और महाराष्ट्र (143.9%) से ज्यादा रही.
इस संबंध में दिल्ली जेल विभाग के एक प्रवक्ता ने अख़बार को बताया कि भीड़ की समस्या से निपटने के लिए उन्होंने नरेला में एक नई जेल बनाने का काम पहले ही शुरू कर दिया है.
प्रवक्ता के अनुसार, ‘दिल्ली की तीनों जेल परिसरों में कैदियों का बंटवारा भी बेहतर तरीके से किया गया है. हमने कैदियों की संख्या कम की है और तिहाड़ जेल पर पड़ने वाले बोझ को और कम करने पर काम कर रहे हैं.’ उन्होंने आगे यह भी बताया कि भीड़भाड़ की समस्या से निपटने के लिए नरेला में एक नई जेल का निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया है.
उल्लेखनीय है कि देश में सबसे अधिक 14 केंद्रीय कारागार के साथ दिल्ली में जेलों की संख्या भी सबसे अधिक है, और 2020 से आ रही रिपोर्टों के अनुसार, यहां वर्षों से भीड़भाड़ एक गंभीर समस्या बनी हुई है.
एनसीआरबी के मुताबिक, कोविड-19 महामारी के चरम पर भी जेलें अपनी क्षमता से दोगुने से अधिक कैदियों से भरी हुई थीं. रिपोर्ट में इसका कारण दिल्ली में विचाराधीन कैदियों की बड़ी संख्या (17,178) को बताया गया है.
कुल मिलाकर तिहाड़, मंडोली और रोहिणी में तीन जेल परिसर हैं, जिनमें कुल 16 जेलें शामिल हैं. इनकी संयुक्त क्षमता 10,026 कैदियों की है, लेकिन रिपोर्ट की मानें, तो 2024 में इनमें 19,512 कैदी रह रहे थे. इनमें से केवल 2,232 कैदी दोषी क़रार दिए जा चुके हैं, बाकी विचारधीन हैं.
आंकड़ों के मुताबिक, सबसे ज्यादा दोषी रेप और हत्या के मामलों में जेल में बंद हैं.
इससे पहले अखबार ने जनवरी में जानकारी दी थी कि कि दिल्ली सरकार ने नरेला में दिल्ली की पहली उच्च सुरक्षा जेल के निर्माण के लिए टेंडर जारी कर दिया है.
इस संबंध में दिल्ली जेल अधिकारियों ने बताया कि यह अत्याधुनिक सुविधा हाई-रिस्क वाले कैदियों को अलग-अलग कोठरियों में रखने के लिए डिजाइन की गई है. इससे राष्ट्रीय राजधानी की जेलों में लंबे समय से चली आ रही भीड़ की समस्या का समाधान हो सकेगा.
इस बीच, रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि 95% से अधिक कैदी पुरुष हैं, और यहां स्वीकृत क्षमता 9,346 के मुकाबले 18,758 पुरुष कैदियों को रखा गया है.
ऑक्यूपेंसी रेट लगभग दोगुना होने के बावजूद रिपोर्ट में बताया गया है कि जेल स्टाफ की खाली जगहों के मामले में दिल्ली तीसरे स्थान पर है. यहां 4069 पद खाली हैं। यह केवल बिहार (4593) और उत्तर प्रदेश (4278) से पीछे है.
रिक्तियां अधिकतर एग्जीक्यूटिव स्टाफ और हेड वार्डन के पदों की हैं, जिनमें कार्यकारी स्टाफ के 3,782 पदों की कमी बताई गई है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि स्वीकृत हेड वार्डन की संख्या 1,372 के मुकाबले दिल्ली में केवल 272 पद ही हैं. कुल मिलाकर, दिल्ली की जेलों में 6,512 की आवश्यकता के मुकाबले केवल 2,447 कर्मचारी ही कार्यरत हैं.
स्टाफ की कमी के बारे में पूछे गए सवाल पर दिल्ली जेल विभाग के अधिकारियों ने बताया कि वे राजधानी की जेलों में और ज्यादा स्टाफ तैनात करने की मांग कर रहे हैं. यह मामला राज्य सरकार के विचाराधीन है.
