नई दिल्ली: लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मंगलवार (12 मई) को केंद्रीय जांच एजेंसी (सीबीआई) के निदेशक के चयन की प्रक्रिया पर आपत्ति जताते हुए एक असहमति नोट सौंपा. उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष ‘रबर स्टैम्प’ नहीं हैं और चयन प्रक्रिया को ऐसे ‘मज़ाक’ में बदल दिया गया है, जिसका मकसद केवल ‘पहले से तय उम्मीदवार’ का चयन सुनिश्चित करना है.
गांधी ने कहा कि वह इस ‘पक्षपातपूर्ण प्रक्रिया’ का हिस्सा बनकर अपने संवैधानिक दायित्व से पीछे नहीं हट सकते.
I have written to the Prime Minister recording my dissent from the CBI Director selection process.
I cannot abdicate my constitutional duty by participating in a biased exercise.
The Leader of Opposition is not a rubber stamp. pic.twitter.com/WfSt5gGPPR
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) May 12, 2026
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और लोकसभा में विपक्ष के नेता वाली चयन समिति की बैठक मंगलवार को नई दिल्ली में हुई. अपने नोट में गांधी ने कहा कि बार-बार लिखित में की गई मांगों के बावजूद उन्हें पात्र उम्मीदवारों की सेल्फ-अप्रेज़ल रिपोर्ट या 360-डिग्री रिपोर्ट पहले से उपलब्ध नहीं कराई गईं. बैठक के दौरान उन्हें 69 उम्मीदवारों का ब्योरा दिया गया.
गांधी के असहमति नोट में कहा गया, ‘मुझे 360-डिग्री रिपोर्ट देने से पूरी तरह इनकार कर दिया गया. प्रत्येक उम्मीदवार के इतिहास और प्रदर्शन का आकलन करने के लिए इन दस्तावेज़ों की विस्तृत समीक्षा बेहद ज़रूरी है. बिना किसी कानूनी आधार के जानकारी देने से जानबूझकर इनकार करना चयन प्रक्रिया का मज़ाक बनाता है और यह सुनिश्चित करता है कि केवल आपका पहले से तय उम्मीदवार ही चुना जाए.’
गांधी ने कहा कि उन्होंने पिछले साल 5 मई को हुई बैठक में भी अपनी असहमति दर्ज कराई थी और 21 अक्टूबर को समिति को पत्र लिखकर पारदर्शी प्रक्रिया के लिए सुझाव भी दिए थे, लेकिन उन्हें कोई जवाब नहीं मिला.
उन्होंने कहा, ‘चयन समिति को महत्वपूर्ण जानकारी से वंचित करके सरकार ने इसे महज़ एक औपचारिकता बना दिया है. विपक्ष का नेता कोई रबर स्टैम्प नहीं है. मैं इस पक्षपातपूर्ण प्रक्रिया में हिस्सा लेकर अपने संवैधानिक कर्तव्य से पीछे नहीं हट सकता.’
अपने नोट में गांधी ने यह भी कहा कि मोदी सरकार ने ‘बार-बार’ सीबीआई का इस्तेमाल ‘राजनीतिक विरोधियों, पत्रकारों और आलोचकों को निशाना बनाने’ के लिए किया है. उन्होंने कहा कि चयन समिति में विपक्ष के नेता को शामिल करने का उद्देश्य ‘संस्थागत कब्ज़े को रोकना’ है.
उन्होंने कहा, ‘दुर्भाग्य से आपने मुझे इस प्रक्रिया में कोई सार्थक भूमिका देने से लगातार इनकार किया है.’
