अमेरिका ने लॉरेंस बिश्नोई पर हरदीप निज्जर की हत्या का आदेश देने का आरोप लगाया

अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा सार्वजनिक किए गए आरोपपत्र कहता है कि भारत की एक जेल में बंद गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई ने जून 2023 में कनाडा में खालिस्तानी अलगाववादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या का आदेश दिया था. आरोपपत्र कहता है कि बिश्नोई का गिरोह अक्सर प्रमुख धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक नेताओं को निशाना बनाता था और इनका इस्तेमाल डर का माहौल बनाने और विदेशों में रहने वाले भारतीयों से जबरन वसूली करने के लिए करता था.

लॉरेंस बिश्नोई (फोटो साभार: सोशल मीडिया)

नई दिल्ली: भारत की एक जेल में बंद गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के खिलाफ अमेरिका में आरोपपत्र दायर किया गया है. उन पर आरोप है कि उन्होंने जून 2023 में कनाडा में खालिस्तानी अलगाववादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या का आदेश दिया था.

यह पहली बार है जब भारत-आधारित बिश्नोई गिरोह पर उस हत्या के सिलसिले में आपराधिक आरोप लगाए गए हैं, जिसने भारत और कनाडा के बीच अभूतपूर्व कूटनीतिक विवाद पैदा कर दिया था.

यह आरोप अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा मंगलवार को सार्वजनिक किए गए तीन आरोपपत्रों का हिस्सा है. ये आरोपपत्र भारत-आधारित कई अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध नेटवर्क के खिलाफ संयुक्त कार्रवाई के तहत जारी किए गए हैं.

ऑपरेशन हार्ड बॉल’ नामक इस अभियान में अमेरिका, कनाडा और स्पेन की कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने मिलकर कार्रवाई की. इस दौरान तीन देशों में 24 लोगों को गिरफ्तारी, दक्षिणी और पूर्वी कैलिफोर्निया में 42 सर्च वॉरंट पर कार्रवाई की गई और 37 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए गए.

बिश्नोई वर्तमान में अहमदाबाद की साबरमती जेल में बंद है.

बिश्नोई और गोल्डी बरार ने निज्जर की हत्या का आदेश दिया था: आरोप पत्र

रैकेटियरिंग (संगठित आपराधिक गतिविधियों) से जुड़े आरोपपत्र के अनुसार, लॉरेंस बिश्नोई और उसके उत्तरी अमेरिका स्थित कथित सहयोगी सतिंदरजीत सिंह उर्फ गोल्डी बरार ने हरदीप सिंह निज्जर की हत्या का आदेश दिया था. अदालत में दाखिल दस्तावेजों में निज्जर की पहचान केवल उनके शुरुआती अक्षरों ‘एच.एस.एन.’ (H.S.N.) से की गई है और उन्हें ‘भारत के पंजाब राज्य के एक प्रमुख धार्मिक और राजनीतिक नेता बताया गया है, जो ब्रिटिश कोलंबिया में रह रहे थे.’

ज्ञात हो कि भारत सरकार ने हरदीप सिंह निज्जर को आतंकवादी घोषित किया हुआ था.

आरोपपत्र के अनुसार, लॉरेंस बिश्नोई ने कथित तौर पर सह-साजिशकर्ताओं में से एक, जिसकी पहचान केवल ‘सह-साजिशकर्ता-1’ (Co-Conspirator 1) के रूप में की गई है, को हरदीप सिंह निज्जर की एक तस्वीर और उनसे जुड़े कई पते उपलब्ध कराए थे, ताकि हत्या की साजिश को अंजाम दिया जा सके.

दस्तावेज़ में कहा गया है कि इसके बाद सह-साजिशकर्ता-1 और एक अन्य सह-साजिशकर्ता ने 18 जून 2023 को कनाडा के सरे (ब्रिटिश कोलंबिया) स्थित गुरु नानक सिख गुरुद्वारे से बाहर निकल रहे हरदीप सिंह निज्जर की गोली मारकर हत्या कर दी.

घोषणा में शामिल माइक डुहेम ने इस मामले के सबसे अहम पहलू पर अधिक स्पष्ट टिप्पणी की. रॉयल कनाडा माउंटेड पुलिस (आरसीएमपी) द्वारा जारी एक अलग बयान में उन्होंने कहा कि जिन तीन आपराधिक नेटवर्कों के खिलाफ आरोप लगाए गए हैं, वे कनाडा और अमेरिका में जबरन वसूली, ड्रग तस्करी, अपहरण और व्यापक हिंसा – खासकर हरदीप सिंह निज्जर की हत्या – जैसी आपराधिक गतिविधियों में शामिल रहे हैं.

इस बीच, कनाडा के अधिकारियों ने ज़ोर देकर कहा कि इन आरोपों में भारतीय सरकारी अधिकारियों की किसी भी तरह की भूमिका का ज़िक्र नहीं है. उन्होंने यह भी कहा कि संगठित अपराध की जिस जांच के बाद मंगलवार को ये आरोप लगाए गए, उसमें भारत सरकार ने सहयोग किया था.

बिश्नोई पर जेल की कोठरी से अंतरराष्ट्रीय आपराधिक गिरोह चलाने का आरोप

आरोपपत्र में बिश्नोई को सोशल मीडिया और मीडिया इंटरव्यू के ज़रिए एक ‘देशभक्त’, ‘राष्ट्रवादी’ और ‘बहुत धार्मिक व्यक्ति’ के तौर पर अपनी छवि बनाने वाला बताया गया है. अभियोजन पक्ष का आरोप है कि उसने इस छवि का इस्तेमाल भारत, अमेरिका और दूसरी जगहों पर अपने गिरोह के लिए सदस्य और सहयोगी भर्ती करने में किया.

इसमें यह भी आरोप लगाया गया है कि इस ग्रुप ने पंजाब के गरीब इलाकों से नाबालिगों को भर्ती किया था. सरकारी वकीलों का कहना है कि ऐसा इसलिए किया गया ताकि ग्रुप की तरफ से किए गए हिंसक अपराधों के लिए मिलने वाली सज़ा को कम किया जा सके.

अभियोजन पक्ष का आरोप है कि इस सार्वजनिक छवि के पीछे बिश्नोई जेल के भीतर से अवैध मोबाइल फोन और इंटरनेट आधारित संचार उपकरणों का उपयोग कर अंतरराष्ट्रीय आपराधिक गिरोह चलाता था.

आरोपपत्र में इस गिरोह का नाम ‘लॉरेंस बिश्नोई ऑर्गेनाइज्ड क्राइम ग्रुप’ बताया गया है और इसमें बरार को उत्तरी अमेरिका का प्रमुख, रोहित गोदारा को यूरोप-स्थित प्रमुख और सुखराज सिंह कांग को भारत में तैनात गिरोह का वरिष्ठ सहयोगी बताया गया है.

बरार अभी भी फरार है, इसलिए संघीय जांच ब्यूरो (एफबीआई) ने उसकी गिरफ्तारी और प्रत्यर्पण तक पहुंचाने वाली सूचना देने पर 50,000 अमेरिकी डॉलर के इनाम की घोषणा की है.

आरोपपत्र में तीन अन्य आरोपियों की पहचान केवल उनके उपनामों – राजन भट्टी, भुलवान और सुमित – से की गई है. इनके अलावा कमल और केस्टुटिस बाउज़ा नाम के दो और लोग भी हैं जिन पर आरोप है कि उन्होंने ग्रुप के लिए जबरन वसूली का रकम इकट्ठा करते थे.

आरोपपत्र में कुल नौ आरोपियों में से सात – लॉरेंस बिश्नोई, गोल्डी बरार, रोहित गोदारा, सुखराज सिंह कांग, राजन भट्टी, भुलवान और सुमित – पर अमेरिका के रिको (RICO) अधिनियम के तहत संगठित आपराधिक साजिश (Racketeering Conspiracy) का आरोप लगाया गया है.

सभी नौ आरोपियों पर हॉब्स एक्ट (Hobbs Act) के तहत जबरन वसूली की साजिश रचने का अलग आरोप भी लगाया गया है.

इनमें से सुखराज सिंह कांग, राजन भट्टी, रोहित गोदारा, भुलवान और गोल्डी बरार पर अतिरिक्त हॉब्स अधिनियम के तहत व्यक्तिगत आरोप भी लगाए गए हैं. ये आरोप लॉस एंजिल्स में एक अंडरकवर कानून-प्रवर्तन अधिकारी, जिसकी पहचान आरोपपत्र में केवल ‘यूसी-1’ (UC-1) के रूप में की गई है, से कथित रूप से जबरन वसूली करने के मामले से जुड़े हैं.

इसके अलावा लॉरेंस बिश्नोई, गोल्डी बरार और सुखराज सिंह कांग पर कोकीन और मेथामफेटामाइन जैसे ड्रग्स बांटने की साजिश रचने का आरोप भी लगाया गया है.

आरोपपत्र के अनुसार, यह आपराधिक गिरोह अपनी हिंसक छवि स्थापित करने और उसका इस्तेमाल जबरन वसूली के लिए करने के उद्देश्य से हत्याओं में अपनी भूमिका का नियमित रूप से प्रचार-प्रसार करता था.

सिद्धू मूसेवाला की हत्या और सलमान खान को दी गई धमकियों का ज़िक्र

आरोपपत्र में कहा गया है कि 29 मई 2022 को पंजाब के मानसा जिले में ‘एस.एस.एस.’ की हत्या के बाद गोल्डी बरार और उसके गिरोह ने एक मीडिया इंटरव्यू और फेसबुक पोस्ट के ज़रिए इस हत्या की जिम्मेदारी ली थी. ‘एस.एस.एस.’ का मतलब पंजाबी गायक और रैपर सिद्धू मूसेवाला है, जिनकी हत्या की जिम्मेदारी गोल्डी बरार पहले भी सार्वजनिक रूप से ली थी.

आरोपपत्र में अलग से यह भी आरोप लगाया गया है कि लॉरेंस बिश्नोई ने वर्ष 2022 से 2026 के बीच कई मौकों पर ‘एस.के.’ (अभिनेता सलमान खान) को मारने की अपनी मंशा ज़ाहिर की थी. खान को लंबे समय से बिश्नोई गैंग से धमकियां मिलती रही हैं, जिनका संबंध 1998 के काले हिरण के शिकार के मामले से है.

इससे पहले अमेरिकी अभियोजक खालिस्तानी अलगाववादी गुरपतवंत सिंह पन्नू से जुड़े एक अलग ‘मर्डर-फॉर-हायर’ (पैसे लेकर हत्या करने) की साजिश मामले में भी निज्जर हत्या का जिक्र किया था.

अक्टूबर 2024 में दायर आरोपपत्र में आरोप लगाया गया था कि निज्जर की हत्या के अगले दिन आरोपी निखिल गुप्ता ने एक अंडरकवर अमेरिकी एजेंट से कहा था कि ‘निज्जर भी एक टारगेट था’ और ‘हमारे पास ऐसे बहुत सारे टारगेट हैं’, साथ ही अब पन्नू की हत्या के लिए इंतजार करने की जरूरत नहीं है.

उस आरोपपत्र में यह भी आरोप लगाया गया कि भारतीय खुफिया एजेंसी के पूर्व अधिकारी विकास यादव ने बाद में निखिल गुप्ता से कहा कि पन्नू अब ‘प्राथमिकता’ बन गया है. निखिल गुप्ता अपराध स्वीकार कर चुके हैं और न्यूयॉर्क की अदालत में सजा सुनाए जाने का इंतजार कर रहे हैं.

भारतीय सरकारी अधिकारियों की कोई भूमिका नहीं

हालांकि, अमेरिका के ताजा आरोपपत्र में भारतीय सरकारी अधिकारियों की किसी भी भूमिका का ज़िक्र नहीं है, और न ही अमेरिकी अधिकारियों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसका कोई ज़िक्र किया.

सीबीसी न्यूज़ को दिए एक इंटरव्यू में आरसीएमपी की डिप्टी कमिश्नर लिसा मोरलैंड मंगलवार को घोषित संगठित अपराध से जुड़े मामले और हरदीप सिंह निज्जर की हत्या की अलग से चल रही कनाडाई जांच के बीच स्पष्ट अंतर बताया.

जब उनसे पूछा गया कि क्या नए आरोपपत्र पूर्व कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के उस आरोप पर कोई नई रोशनी डालते हैं, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारतीय सरकार के एजेंट निज्जर की हत्या में शामिल थे, तो मोरलैंड ने चल रही कनाडाई जांच पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया.

उन्होंने कहा, ‘कनाडा में इस मामले में कुछ लोगों के खिलाफ पहले से आरोप तय किए जा चुके हैं, इसलिए मैं उस जांच के संबंध में कोई टिप्पणी नहीं कर सकती.’

हालांकि, मंगलवार को घोषित संगठित अपराध से जुड़े मामले का विशेष रूप से जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, ‘इस संगठित अपराध जांच और आरोपपत्र में लगाए गए आरोपों के आधार पर ऐसा कोई सबूत नहीं है, जिससे यह संकेत मिले कि भारतीय अधिकारियों पर आरोप लगाए गए हैं या वे इस जांच में शामिल थे.’

उन्होंने बाद में दोहराया कि ‘आज सामने आई किसी भी जानकारी से भारतीय सरकार का कोई संबंध स्थापित नहीं होता.’

मोरलैंड ने यह भी कहा कि भारत सरकार ने जांच में सहयोग किया. उन्होंने बताया कि आरसीएमपी के जांचकर्ताओं ने संघीय जांच ब्यूरो (एफबीआई) और अन्य जांच एजेंसियों के साथ ‘कंधे से कंधा मिलाकर’ काम किया.

उल्लेखनीय है कि सितंबर 2023 में निज्जर की हत्या एक अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक विवाद का मुद्दा बन गई थी, जब तत्कालीन कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने संसद को बताया था कि सुरक्षा एजेंसियां ​​इस हत्या में भारत सरकार के एजेंटों के शामिल होने के ‘विश्वसनीय आरोपों’ की जांच कर रही हैं.

भारत ने इन आरोपों को ‘बेतुका’ बताते हुए खारिज कर दिया था, जिसके बाद दोनों देशों ने एक-दूसरे के राजनयिकों को निष्कासित किया.

आरसीएमपी ने पहले कहा था कि उसके पास भारत सरकार के जुड़ाव के सबूत

एक साल बाद अक्टूबर 2024 में संबंध और बिगड़ गए, जब आरसीएमपी ने आरोप लगाया कि जांचकर्ताओं के पास ऐसे सबूत हैं जो कनाडा में हत्याओं, जबरन वसूली और डराने-धमकाने की घटनाओं में भारतीय सरकार के एजेंटों की भूमिका की ओर इशारा करते हैं; इन घटनाओं में बिश्नोई गिरोह जैसे संगठित अपराध समूहों का कथित इस्तेमाल भी शामिल है.

एक प्रेस ब्रीफिंग में आरसीएमपी कमिश्नर माइक डुहेम ने कहा था कि जांचकर्ताओं के पास ‘स्पष्ट और ठोस सबूत’ हैं कि भारतीय सरकारी एजेंट कनाडा में गंभीर आपराधिक गतिविधियों में शामिल थे. उन्होंने आरोप लगाया कि इन एजेंटों ने दक्षिण एशियाई समुदाय के लोगों को निशाना बनाने के लिए संगठित अपराध समूहों का इस्तेमाल किया था.

वहीं, सहायक आयुक्त ब्रिजिट गॉविन ने कहा था कि आरसीएमपी का मानना है कि बिश्नोई गिरोह भारत सरकार के एजेंटों के साथ मिलकर काम कर रहा है.

कनाडा ने छह भारतीय राजनयिकों (जिनमें तत्कालीन उच्चायुक्त संजय कुमार वर्मा भी शामिल थे) को निष्कासित कर दिया था, क्योंकि नई दिल्ली ने कनाडा के उस अनुरोध को ठुकरा दिया था, जिसमें राजनयिक प्रतिरक्षा (डिप्लोमैटिक इम्यूनिटी) हटाने की मांग की गई थी ताकि आरसीएमपी के जांचकर्ता उनसे पूछताछ कर सकें.

इसके जवाब में भारत ने भी छह कनाडाई राजनयिकों को निष्कासित कर दिया और संजय कुमार वर्मा को वापस बुला लिया, साथ ही कनाडा के आरोपों को निराधार बताया.

14 अक्टूबर 2024 की उसी प्रेस कॉन्फ्रेंस में डुहेम ने कहा कि कनाडा के वरिष्ठ अधिकारियों – जिनमें राष्ट्रीय सुरक्षा और खुफिया सलाहकार नताली ड्रोइन और उप विदेश मंत्री डेविड मॉरिसन शामिल थे – ने दो दिन पहले सिंगापुर में भारत सरकार के अधिकारियों से मुलाकात की थी.

बाद में द वॉशिंगटन पोस्ट ने कनाडाई अधिकारियों के हवाले से रिपोर्ट दी कि उस बैठक में भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल मौजूद थे. उन अधिकारियों ने अखबार को बताया कि डोभाल ने पहले तो यह कहा कि उन्हें नहीं पता कि बिश्नोई कौन है, लेकिन बाद में माना कि वह गैंगस्टर अपनी जेल की कोठरी से हिंसा की साजिश रचने में सक्षम है.

साथ ही, उन्होंने यह भी साफ किया कि चाहे कोई भी सबूत पेश किया जाए, भारत हत्या से किसी भी तरह के संबंध से इनकार करेगा.

कुछ दिनों बाद डेविड मॉरिसन ने कनाडाई संसदीय समिति को बताया कि उन्होंने खुद द वॉशिंगटन पोस्ट को पुष्टि की थी कि निकाले गए राजनयिकों के बीच इंटरसेप्ट की गई बातचीत में जिस वरिष्ठ भारतीय अधिकारी का जिक्र था, वह गृह मंत्री अमित शाह थे.

खालिस्तान-समर्थक समूहों ने कार्नी सरकार पर बिश्नोई गैंग के सरकारी संबंधों को कम करके दिखाने का आरोप लगाया

उसी समिति की सुनवाई में नताली ड्रोइन ने कहा कि भारत सरकार के ‘उच्च स्तर’ के अधिकारियों ने इंडो-कनाडाई समुदाय के खिलाफ गंभीर आपराधिक गतिविधियों को अंजाम देने के लिए लॉरेंस बिश्नोई के संगठित अपराध नेटवर्क की ‘हिंसक’ ताकत का इस्तेमाल करने के निर्देश दिए थे.

हालांकि 2025 की पहली छमाही में जस्टिन ट्रूडो के पद छोड़ने और मार्क कार्नी के सत्ता संभालने के बाद दोनों देशों के संबंध धीरे-धीरे सामान्य होने लगे. राजनयिकों की बहाली और उच्च-स्तरीय द्विपक्षीय यात्राएं फिर शुरू हुईं.

इसी दौरान कुछ खालिस्तान-समर्थक सिख संगठनों ने आरोप लगाया कि कनाडा सरकार भारत के साथ संबंध सुधारने के लिए बिश्नोई गिरोह और सरकार के कथित संबंधों को कम करके आंका.

यह ताजा आरोपपत्र ऐसे समय आया है, जब कुछ महीने पहले कनाडाई ब्रॉडकास्टर ‘ग्लोबल न्यूज’ ने सूचना के अधिकार कानून के तहत प्राप्त आरसीएमपी के एक आंतरिक आकलन के आधार पर रिपोर्ट प्रकाशित की थी, जिसमें कहा गया था कि बिश्नोई गिरोह कथित तौर पर ‘भारत सरकार के इशारे पर काम कर रहा था.’

भारत ने इन खबरों को खारिज करते हुए कनाडा की धरती पर किसी भी आपराधिक गतिविधि में अपनी भूमिका से लगातार इनकार किया है.

सितंबर 2025 में कनाडा सरकार ने अपने आपराधिक कानून के तहत बिश्नोई गिरोह को आधिकारिक रूप से आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया. अधिसूचना में कहा गया कि यह गिरोह ‘जबरन वसूली और धमकी के जरिए आतंक फैलाता है’, खासकर उन क्षेत्रों में जहां भारतीय मूल के लोगों की बड़ी आबादी रहती है. हालांकि इसमें भारत सरकार का कोई जिक्र नहीं किया गया था.

‘भारत कार्रवाई का स्वागत करता है’

भारत सरकार की ओर से इस नए अमेरिकी आरोपपत्र पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है. हालांकि, एक भारतीय सरकारी अधिकारी ने द वायर से कहा कि भारत इस कार्रवाई का स्वागत करेगा, क्योंकि नई दिल्ली लंबे समय से संगठित आपराधिक गिरोहों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करती रही है.

अधिकारी ने कहा कि भारत का लंबे समय से यही रुख रहा है कि हरदीप सिंह निज्जर की हत्या सरकारी साजिश नहीं बल्कि आपराधिक गिरोहों के बीच प्रतिद्वंद्विता का परिणाम थी. उन्होंने कहा, ‘निज्जर की हत्या आपराधिक गिरोहों के बीच हुई कार्रवाई थी.’

हालांकि अधिकारी ने यह भी जोड़ा कि कानूनी प्रक्रिया अभी शुरू ही हुई है, इसलिए मुकदमे के आगे बढ़ने के साथ नए आरोप या तथ्य सामने आ सकते हैं.

यह आरोपपत्र लॉस एंजिल्स में पांच महीने तक चले एक अंडरकवर ऑपरेशन पर आधारित है, जिसमें एफबीआई एक एजेंट ने कर्जदार का रूप धरा था. आरोप है कि कांग और भट्टी, और उनके बाद बरार, गोदारा, भुलवान और सुमित ने यूसी-1 नाम के एजेंट को धमकाया और जनवरी से मई 2025 के बीच वॉट्सऐप और सिग्नल पर पेमेंट के लिए बातचीत की.

आरोपपत्र में कई धमकियों का ज़िक्र है, जिनमें भट्टी की पंजाबी में दी गई चेतावनी भी शामिल है कि ‘अगर तुमने मुझे पैसे नहीं दिए, तो मैं तुम्हें मार डालूंगा’ और बरार का यूसी-1 से यह कहना कि वह ‘मेक्सिकन लोगों से तुम्हारे कान कटवा देगा.’ आरोप-पत्र के अनुसार, यह ऑपरेशन दो पेमेंट के साथ खत्म हुआ – 20,000 डॉलर और 15,000 डॉलर – जिन्हें लॉस एंजिल्स इलाके की पार्किंग में कमल और बाउज़ा ने प्राप्त किया था.

कोर्ट के दस्तावेज़ में बिश्नोई, बरार और कांग पर पूरे अमेरिका में मादक पदार्थों (ड्रग्स) की खेप की देखरेख करने का भी आरोप है, जिसमें नवंबर 2024 में कैलिफोर्निया के फोंटाना से कनाडाई सीमा की ओर ले जाई गई लगभग 49 किलोग्राम कोकीन भी शामिल है. इसमें यह भी आरोप लगाया गया है कि इस ग्रुप ने लॉस एंजिल्स इलाके में विरोधी तस्करी संगठनों से भारी मात्रा में ड्रग्स चुराए, जिनमें मार्च 2024 में लगभग 220 किलोग्राम कोकीन और अप्रैल 2024 में लगभग 500 किलोग्राम मेथामफेटामाइन शामिल है.

बिश्नोई का प्रत्यर्पण करना चाहते हैं अमेरिकी अधिकारी

अमेरिकी न्याय विभाग के अनुसार, 13 आरोपियों को अमेरिका, तीन को कनाडा और एक को स्पेन में गिरफ्तार किया गया, जबकि सात आरोपी पहले से हिरासत में हैं. दस अन्य फरार आरोपियों की तलाश जारी है, जिनमें दो के भारत में होने की आशंका है. लॉरेंस बिश्नोई भी उन लोगों में शामिल हैं, जिन्हें अमेरिकी अधिकारी प्रत्यर्पित करवाना चाहते हैं.

हालांकि अमेरिका द्वारा बिश्नोई के प्रत्यर्पण की मांग किए जाने की उम्मीद है, लेकिन भारतीय कानून प्रत्यर्पण की इजाज़त तब तक नहीं देता जब तक कि उस व्यक्ति के खिलाफ देश में मुकदमा चल रहा हो.

अन्य दो आरोपपत्र भारत में मौजूद संगठित अपराध करने वाले उन प्रतिद्वंद्वी गिरोहों के खिलाफ हैं, जिन्हें जेल में बंद गैंगस्टर जग्गू भगवानपुरिया और कनाडा में रहने वाला ड्रग तस्कर रविंदर सिंह धांडा चलाते हैं.

अभियोजकों का आरोप है कि भगवानपुरिया का गिरोह कई देशों में सुपारी लेकर हत्या, ड्रग तस्करी, अपहरण, जबरन वसूली और हथियारों की तस्करी जैसे अपराधों में शामिल था. साथ ही, वे अपने प्रतिद्वंद्वियों को निशाना बनाने और पीड़ितों से जबरन वसूली करने के लिए भारत में कानून लागू करने वाले अधिकारियों को भी भ्रष्ट करते थे.

तीसरे आरोपपत्र में रविंदर सिंह धांडा और उसके सहयोगियों पर दक्षिणी कैलिफ़ोर्निया से कनाडा तक सैकड़ों किलोग्राम कोकीन और मेथामफेटामाइन की तस्करी करने वाले अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स नेटवर्क के संचालन का आरोप लगाया गया है.

इसमें यह भी आरोप लगाया गया है कि नेटवर्क के एक सदस्य ने तस्करी के काम में मदद के लिए ‘कनाडा बॉर्डर सर्विसेज़ एजेंसी’ के एक कर्मचारी से बॉर्डर पर होने वाली जांच के समय और जगह के बारे में जानकारी जुटाई थी.

धांडा और उनके दो साथियों – जसकर्ण बागरी और गुरतेज सिंह समाघ – को ब्रिटिश कोलंबिया में गिरफ़्तार किया गया था. मंगलवार को उन्हें प्रांत की सुप्रीम कोर्ट में पेश किया गया, जहां जज ने उनके प्रत्यर्पण की सुनवाई के दौरान दी गई दलीलों को सार्वजनिक करने पर रोक लगा दी.