युवाओं के आंदोलन पर बोलीं गीतांजलि श्री- मंत्री, नौकरशाह और पुलिस भगवान नहीं, जनता के सेवक हैं

अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार जीतने वाली मशहूर लेखक गीतांजलि श्री ने 20 जुलाई को आंदोलनरत छात्रों और युवाओं के ख़िलाफ़ पुलिस द्वारा की गई बर्बर कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि शीर्ष बैठे ये लोग- मंत्री, नौकरशाह और पुलिस- जनता के प्रतिनिधि और जनता के सेवक हैं. वे भगवान नहीं हैं.

गीतांजलि श्री. (फोटो: विकिमीडिया कॉमन्स)

नई दिल्ली: साल 2022 में अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार जीतने वाली मशहूर लेखक गीतांजलि श्री ने द वायर से बातचीत में कहा कि सत्ता के शीर्ष पर बैठे लोग – चाहे वे मंत्री हों, नौकरशाह हों या पुलिस अधिकारी – भगवान नहीं हैं, बल्कि जनता के सेवक हैं.

गीतांजलि श्री 20 जुलाई से छात्रों और युवाओं के खिलाफ पुलिस द्वारा की गई बर्बर कार्रवाई पर प्रतिक्रिया दे रही थीं. उस दिन कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संसद मार्च के आह्वान पर हजारों लोग दिल्ली के जंतर-मंतर पर एकत्र हुए थे.

यह आंदोलन शुरुआत में नीट (नीट) पेपर लीक के विरोध और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर शुरू हुआ था, लेकिन बाद में यह देशभर में युवाओं के गुस्से और असंतोष की व्यापक अभिव्यक्ति बन गया.

गीतांजलि श्री ने कहा, ‘युवा अपनी बात कह रहे हैं. वे भारतीय हैं और अपने ही देश में हैं. यह उनका घर है.’

उन्होंने आगे कहा, ‘जब हम अपने घर में दरारें और रिसाव देखते हैं, तो क्या हम चिंतित नहीं होते? क्या हमें यह डर नहीं सताता कि कहीं हमारा घर ढह न जाए? ये युवा उसी घर की मरम्मत और समस्याओं के समाधान की मांग कर रहे हैं. वे अधिकारियों से अपनी चिंताओं को दूर करने, अपने भविष्य की रक्षा करने और अपने घर व देश को बचाने की अपील कर रहे हैं.’

उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सहित केंद्र सरकार के शीर्ष नेतृत्व ने अब तक दिल्ली पुलिस और अन्य सुरक्षा बलों द्वारा प्रदर्शनकारियों के साथ किए गए कथित दुर्व्यवहार पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है. ऐसी ख़बरें आई हैं कि इस दौरान कई प्रदर्शनकारियों को पैलेट जैसे चोटें आई हैं, पुलिस लाठीचार्ज में बड़ी संख्या में लोगों के घायल होने और पुलिस पर यौन उत्पीड़न के आरोप भी लगे हैं.

गीतांजलि श्री ने कहा, ‘ऊपर बैठे ये लोग- मंत्री, नौकरशाह और पुलिस – जनता के प्रतिनिधि और जनता के सेवक हैं. वे भगवान नहीं हैं.’

उन्होंने देश को लोकतंत्र की याद दिलाने के लिए युवाओं का शुक्रिया अदा किया.

उन्होंने कहा, ‘आप सभी युवाओं का शुक्रिया, जिन्होंने हमें लोकतंत्र की याद दिलाई. आपको सलाम. और सत्ता में बैठे लोगों से मेरी अपील है कि वे अपने कर्तव्यों का निर्वहन समझदारी और जिम्मेदारी के साथ करें.’

गौरतलब है कि गीतांजलि श्री लंबे समय से सामाजिक और राजनीतिक अन्याय के मुद्दों पर मुखर रही हैं. साल 2022 में उन्हें उनके उपन्यास ‘रेत समाधि’ (जिसका अंग्रेज़ी अनुवाद Tomb of Sand शीर्षक से प्रकाशित हुआ) के लिए इंटरनेशनल बुकर पुरस्कार मिला था. यह उपन्यास इस प्रतिष्ठित पुरस्कार से सम्मानित होने वाला हिंदी और किसी भारतीय भाषा का पहला उपन्यास था.

साल 2022 में उत्तर प्रदेश के एक निवासी ने गीतांजलि श्री के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी. शिकायत में आरोप लगाया गया था कि उनकी पुस्तक ‘रेत समाधि’ से हिंदू धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं. इसके बाद आगरा में उनके सम्मान में आयोजित किया जाने वाला एक कार्यक्रम रद्द कर दिया गया था, जिसकी साहित्यिक और सांस्कृतिक जगत में व्यापक आलोचना हुई थी.