अरावली पहाड़ियों की परिभाषा को लेकर जारी विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को सुनवाई करते हुए अपने पुराने फैसले पर लगाई रोक को बरक़रार रखा है, जिसमें पर्यावरण मंत्रालय द्वारा 100 मीटर से अधिक ऊंचाई वाली पहाड़ियों को ही अरावली मानने की सिफ़ारिश की गई थी.
1 से 19 दिसंबर तक चले दिल्ली की ख़राब वायु गुणवत्ता के बीच चले संसद के शीतकालीन सत्र में वायु प्रदूषण को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई. वहीं पर्यावरण मंत्रालय के राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने लोकसभा में कहा कि उच्च एक्यूआई स्तर और फेफड़ों की बीमारियों के बीच सीधा संबंध स्थापित करने के लिए कोई पुख़्ता आंकड़े मौजूद नहीं हैं. उनका यह दावा सही नहीं हैं.
अंबानी परिवार के जामनगर स्थित चिड़ियाघर और रेस्क्यू सेंटर वनतारा, जिस पर जंगली जानवरों को खरीदने, अवैध रूप से लाने और अवैध वन्यजीव व्यापार को बढ़ावा देने जैसे विवादास्पद आरोप लगते रहे हैं- ने तेलंगाना की कांग्रेस सरकार के साथ समझौता किया है, जिसके तहत राज्य में एक ‘विश्वस्तरीय’ वन्यजीव संरक्षण केंद्र और नाइट सफारी स्थापित की जाएगी.
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में 18-21 अक्टूबर तक सख़्त नियमों के साथ ग्रीन पटाखे फोड़ने की अनुमति दी है. हालांकि विशेषज्ञों ने चेताया कि इससे प्रदूषण पर नगण्य प्रभाव पड़ेगा. पिछले साल इसी कोर्ट ने पटाखों को वायु गुणवत्ता के लिए हानिकारक माना था, पराली जलाने पर वही कोर्ट अब भी सख़्त है. लेकिन ग्रीन पटाखों की अनुमति दी गई है.
छत्तीसगढ़ के वन विभाग ने राज्य भर में हुए व्यापक विरोध के बाद अपने उस विवादित आदेश को वापस लिया है जिसमें कहा गया था कि वन अधिकार अधिनियम के क्रियान्वयन के लिए ‘नोडल एजेंसी’ आदिवासी कल्याण विभाग नहीं, बल्कि वन विभाग होगा.
छत्तीसगढ़ में रायगढ़ ज़िले की तमनार तहसील के मुड़ागांव और सरायटोला गांवों में कोयला खदान स्थापित करने के लिए ग्रामीणों के विरोध के बीच 26-27 जून को कम से कम 5,000 पेड़ काटे गए. यह खदान महाराष्ट्र राज्य विद्युत उत्पादन कंपनी लिमिटेड के लिए अडानी समूह द्वारा संचालित की जाएगी.
2001 से 2019 के बीच भारत में हीटवेव से क़रीब 20,000 लोगों की मौत हुई. अध्ययन में पाया गया कि पुरुषों और हाशिए पर मौजूद जातियों से आने वाले लोग सबसे ज़्यादा प्रभावित हुए. शोधकर्ताओं ने जाति को ध्यान में रखकर तैयार की गई सामाजिक सुरक्षा नीति की सिफारिश की है.
3 फरवरी को एनजीटी को सौंपी गई रिपोर्ट में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जल गुणवत्ता परीक्षणों का हवाला देते हुए कहा था कि इलाहाबाद सहित कई स्थानों पर गंगा का जल स्नान के लिए उपयुक्त नहीं है. नवीनतम रिपोर्ट में इसने 12 जनवरी से 22 फरवरी तक गंगा-यमुना में कई स्थानों के जल को स्नान योग्य बताया है.
सीपीसीबी द्वारा एनजीटी को सौंपी गई एक रिपोर्ट बताती है कि में गंगा नदी का जल इतना दूषित हो गया है कि ये अब डुबकी लगाने योग्य बचा ही नहीं है. इसका खंडन करते हुए योगी आदित्यनाथ का बयान तथ्यों की रौशनी में सही नहीं ठहरते.
दिल्ली के प्रदूषण में पराली जलाना एक बड़ा कारण है, लेकिन लगभग 75% प्रदूषण दिल्ली के भीतर परिवहन, कचरा जलाना और निर्माण से उत्पन्न होता है. इसके साथ ही बिजली संयंत्र, हरियाणा-पंजाब क्षेत्र में भारी उद्योग से बढ़ते उत्सर्जन को रोकने में विफलता भी बढ़ते वायु प्रदूषण के महत्वपूर्ण कारण हैं.
बुधवार को रात दस बजे भारी सुरक्षा बलों की तैनाती के बीच दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिए गए जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक और अन्य पदयात्रियों को रिहा कर दिया. राजघाट पर वांगचुक ने कहा कि उनकी मांगों पर गृह मंत्रालय ने उन्हें गारंटी दी है कि वे प्रधानमंत्री सहित नेताओं से मिल सकेंगे. इसलिए वे इस गारंटी पर अपना उपवास तोड़ रहे हैं.
लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने, छठी अनुसूची में शामिल करने और नाज़ुक हिमालयी पारिस्थितिकी की सुरक्षा के लिए विरोध कर रहे एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने कहा कि उन्हें मिले एक गुमनाम पत्र में कहा गया कि ‘एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग विभाग’ ने उनके संस्थान की बैंक डिटेल्स ली हैं, साथ ही ख़ुद को सोनम का 'शुभचिंतक' बताने वाले एक अन्य शख़्स ने उन्हें जान के संभावित ख़तरों को लेकर चेताया.
जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक और लद्दाख के नागरिक रविवार को लेह से चांगथंग तक के लिए एक मार्च निकालने वाले थे, जिसे 'पश्मीना मार्च' नाम दिया गया था. हालांकि, इसे मोदी सरकार द्वारा धारा 144 लगाने समेत अन्य कड़े कदम उठाए जाने के चलते रद्द कर दिया गया.
शीर्ष अदालत ने 2011 के एक फैसले में इस बात पर ज़ोर दिया गया था कि वन संबंधी 1996 के उसके फैसले का पालन किया जाए और राज्य 1980 के वन संरक्षण अधिनियम के तहत सभी वनों का दस्तावेज़ीकरण करने के लिए ‘भू-संदर्भित जिला वन-मानचित्र’ तैयार करें. हालांकि केंद्र सरकार द्वारा इन दोनों निर्णयों का पालन नहीं किया गया है.
ग्रेट निकोबार द्वीप में 72,000 करोड़ रुपये की मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना के लिए दी गई वन और पर्यावरण मंज़ूरी में हस्तक्षेप करने से राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण ने इनकार कर दिया है. परियोजना के विरोध में पर्यावरणविदों का कहना है कि यह स्थानीय समुदायों को प्रभावित करेगी और द्वीप की नाज़ुक पारिस्थितिकी एवं जैव विविधता को नुकसान पहुंचाएगी.