पुस्तक अंश: एक अर्थ में हुसेन की ज़बान समकालीन भारतीय चित्रकार की ज़बान है. इस ज़बान का, अपने पूर्ववर्ती और मौजूदा बोलियों से रिश्ता स्पष्ट देखा जा सकता है. हुसेन ने आज़ाद हिन्दुस्तान की कला को एक नया स्वतन्त्र स्वरूप प्रदान किया है. पढ़िए अखिलेश द्वारा लिखित मक़बूल फ़िदा हुसैन: जीवनी और विचार' का अंश.
पुस्तक समीक्षा: लब्ध चित्रकार-गद्यकार अखिलेश लिखते हैं, 'अम्बर पाण्डेय का 'मतलब हिन्दू' उपन्यास अपने कथ्य-कहानी और उसके प्रवाह के साथ ही अपनी भाषा के कारण मुझे अद्वितीय लगा. कहानी एक युवक की है जो ब्राह्मण है और उसके जीवन में आए उन लम्हों की है, जब उसने निस्संकोच अपना ब्राह्मणत्व त्यागा. जो मुझे भाया वह उपन्यास की हिंदी भाषा है, जो अपने में लोक समेटे है.'
रामचंद्र गुहा लिखते हैं कि स्वामीनाथन को वेरियर एल्विन की पुस्तक ‘द ट्राइबल आर्ट ऑफ मिडल इण्डिया’ ने प्रेरित किया था. दरअसल, एल्विन को पढ़ने से बहुत पहले स्वामी आदिवासी जीवन को समझ चुके थे.