ट्रांस संशोधन क़ानून ट्रांस अधिकारों की सुरक्षा के नाम पर ‘वास्तविक पीड़ित’ ट्रांस लोगों की एक नई श्रेणी बनाता है. हालांकि, आलोचकों का कहना है कि यह क़ानून ट्रांस पहचान को संकीर्ण जैविक और सामाजिक-सांस्कृतिक दायरों में बांधते हुए निगरानी, अपराधीकरण और राज्य नियंत्रण को वैधता देता है.