'आज़ादी के मायने' श्रृंखला: हमारी पीढ़ी के सामने चुनौती यही है कि हम स्त्री को अबला कहकर उसकी रक्षा करने वाली व्यवस्था न बनाएं, बल्कि उसे इतना सक्षम और स्वतंत्र बनाएं कि उसे किसी संरक्षक की आवश्यकता ही न पड़े. क्योंकि पितृसत्ता का सबसे उदार चेहरा भी अंततः संरक्षण देता है, बराबरी नहीं.