‘निर्मल जी कभी नहीं चाहते थे कि कोई भी युवा लेखक उनके लेखन का अनुसरण करें’

साहित्यकार उदयन वाजपेयी निर्मल वर्मा को गुरु की पदवी देते हैं, पर मानते हैं कि उनका अपना लेखन निर्मल के प्रभाव से मुक्त है. मनोज मोहन को दिए एक साक्षात्कार में वे कहते हैं कि 'ज़्यादातर लेखक उनके पास जाकर उनसे चमत्कृत होकर लौट आते थे. संभवतः उन्होंने उनके भीतर बैठे उस अप्रतिम उस्ताद की झलक तक नहीं देखी, जिसके साथ बैठकर मैंने बहुत कुछ सीखा.'

स्मृति में महादेवी

महादेवी ने कहा था कि 'साहित्य जीवन के विकास का ऐसा साथी रहा है कि उसका अभाव बर्बरता या असभ्यता का पर्याय माना जाएगा’. ज्ञानपीठ पुरस्कार ग्रहण करते हुए उन्होंने कहा था कि 'यदि मनुष्य में संवेदनशीलता की रागात्मकता नहीं रहेगी तो ध्वंस के कगार पर बैठी मानवजाति किसी भी क्षण समाप्त हो सकती है.'

आदिवासी और वनवासी: जनजातीय क्षेत्र में आरएसएस के कामों का एक वृहद और सिलसिलेवार दस्तावेज़

पुस्तक समीक्षा: गहन शोध पर आधारित कमल नयन चौबे की 'आदिवासी और वनवासी' एक ऐसी पुस्तक है, जिससे आधुनिक भारत के इतिहास, राजनीति तथा भारतीय समाज के बदलते हुए स्वरूप को समझने में मदद मिलती है. इसके साथ ही हिंदुत्ववादी विचारधारा की संगठनात्मक विविधता और जनजातीय भारत के बीच की विसंगतियों का गहन अध्ययन भी इस किताब में मौजूद है.