घुमंतू समुदाय की पीड़ा: ‘जीने को ठिकाना नहीं, मरने के बाद दो गज ज़मीन नहीं’ घुमंतू मुक्ति दिवस पर विशेष: 31 अगस्त इसलिए केवल ‘विमुक्ति’ की ऐतिहासिक तारीख नहीं, बल्कि अधूरी मुक्ति को पूरा करने का संकल्प है. क़ानून ने अपराधी होने का कलंक हटाया था. अब समाज और राज्य की जिम्मेदारी है कि वह उस कलंक की बची हुई छाया भी मिटाए. 31/08/2026