आज़ादी के 80 साल बाद भी अपनी स्वतंत्रता, अधिकारों को लेकर संघर्षरत हैं आदिवासी समुदाय

देश के नक़्शे से धीरे-धीरे आदिवासी गांव ही पूरे के पूरे विस्थापित हो रहे हैं. आज़ादी की 79वें वर्षगांठ के अवसर पर एक अहम प्रश्न यह है कि आदिवासी-किसान तबक़ों की स्वाधीनता के क्या मायने हैं? क्या बाहरी उपनिवेशवादी ताक़तों का मात्र स्थानांतरण हुआ है और अब आंतरिक उपनिवेशवादी ताक़तें इन तबक़ों का शोषण कर रही हैं?