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रवीश कुमार

क्या नागरिकता क़ानून को लेकर गांधी के नाम पर प्रधानमंत्री और गृहमंत्री दोनों ही झूठ बोल रहे हैं?

बीते दिनों एक रैली में गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि महात्मा गांधी ने 1947 में कहा था कि पाकिस्तान में रहने वाला हिंदू, सिख हर नज़रिये से भारत आ सकता है. इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी बताया था कि गांधी जी ने कहा था कि पाकिस्तान में रहने वाले हिंदू और सिख साथियों को जब लगे कि उन्हें भारत आना चाहिए तो उनका स्वागत है. क्या वाकई महात्मा गांधी ने ऐसा कहा था जैसा प्रधानमंत्री और गृहमंत्री कह रहे हैं

मीडिया ब्रेकडाउन: मीडिया उनके हाथों में है जिनका काम पत्रकारिता नहीं रहा

जिस वक्त रिपोर्टिंग की ज़रूरत है, जाकर देखने की ज़रूरत है कि फील्ड में पुलिस किस तरह की हिंसा कर रही है, पुलिस की बातों में कितनी सत्यता है, उस वक्त मीडिया अपने स्टूडियो में बंद है. वह सिर्फ पुलिस की बातों को चला रहा है, उसे सत्य मान ले रहा है.

95000 करोड़ रुपये के आरोपी को मोदी ने बना दिया महाराष्ट्र का उप मुख्यमंत्री

अगर कोई भ्रष्टाचारी है, लुटेरा है तो वो मुख्यमंत्री है, उप मुख्यमंत्री है. ऐसे राजनेताओं से हम जनता की भलाई की उम्मीद करते हैं. सचमुच जनता भोली है. 95,000 करोड़ के घोटाले के आरोपी को बीजेपी उप मुख्यमंत्री बना सकती है. इससे पता चलता है कि यह दौर उसी का है.

कश्मीर आंतरिक मसला है तो विदेशी सांसदों को बुलाने की तैयारी पिछले दरवाज़े से क्यों हुई?

भारत को एक इंटरनेशनल बिज़नेस ब्रोकर के ज़रिये विदेशी सांसदों के कश्मीर आने की भूमिका तैयार करने की ज़रूरत क्यों पड़ी? जो सांसद बुलाए गए हैं वे धुर दक्षिणपंथी दलों के हैं. इनमें से कोई ऐसी पार्टी से नहीं है जिनकी सरकार हो या प्रमुख आवाज़ रखते हों. तो भारत ने कश्मीर पर एक कमज़ोर पक्ष को क्यों चुना? क्या प्रमुख दलों से मनमुताबिक साथ नहीं मिला?

घोर आर्थिक असफलता के बाद भी मोदी सरकार की राजनीतिक सफलता शानदार है

सरकार के पास कोई आइडिया नहीं है. वह हर आर्थिक फैसले को एक इवेंट के रूप में लॉन्च करती है. तमाशा होता है, उम्मीदें बंटती हैं और नतीजा ज़ीरो होता है.

रात भर पेड़ों की हत्या होती रही, रात भर जागने वाली मुंबई सोती रही

यह न्याय के बुनियादी सिद्धांतों के ख़िलाफ़ है. मामला सुप्रीम कोर्ट में था तो कैसे पेड़ काटे गए? नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में मामला था तो पेड़ कैसे काटे गए? क्या अब से फांसी की सज़ा हाईकोर्ट के बाद ही दे दी जाएगी. सुप्रीम कोर्ट में अपील का कोई मतलब नहीं रहेगा? वहां चल रही सुनवाई का इंतज़ार नहीं होगा?

गर्व है कि वीसी ने रोमिला थापर को बुलाकर कोरे कागज पर नाम लिख के दिखाने को नहीं कहा

किसी यूनिवर्सिटी के बर्बाद होने का जितना सामाजिक और राजनीतिक समर्थन भारत में मिलता है, उतना कहीं नहीं मिलेगा. हम बगैर गुरुओं के भारत को विश्व गुरु बना रहे हैं. रोमिला थापर को भारत को विश्व गुरु बनाने के प्रोजेक्ट में सहयोग करना चाहिए. बस इतनी गुज़ारिश है कि सीवी में अंग्रेज़ी थोड़ी हल्की लिखें वरना उन पर संस्कृत की उपेक्षा का इल्ज़ाम लग सकता है.

ताले में बंद कश्मीर की कोई ख़बर नहीं, पर जश्न में डूबे शेष भारत को इससे मतलब नहीं

सदन में अमित शाह ने कहा कि नेहरू कश्मीर हैंडल कर रहे थे, सरदार पटेल नहीं. यह इतिहास नहीं है मगर अब इतिहास हो जाएगा क्योंकि अमित शाह ने कहा है. उनसे बड़ा कोई इतिहासकार नहीं है.

राजनीतिक समाज का नया हथियार बनता जय श्री राम

क़ानून का राज होने के बाद भी भीड़ का राज क़ायम है. इस भीड़ को धर्म, जाति और परंपरा के नाम पर छूट मिली है. किसी औरत को डायन बताकर मार देती है, जाति तोड़कर शादी करने वालों की हत्या कर देती है. इसी कड़ी में अब यह शामिल हो गया है कि अपराध करने वाला या झगड़े की ज़द में आ जाने वाले मुसलमान को जय श्री राम के नाम पर मार दिया जाएगा.

New Delhi: Prime Minister Narendra Modi with BJP President Amit Shah during a press conference at the party headquarter in New Delhi, Friday, May 17, 2019. (PTI Photo/Manvender Vashist) (PTI5_17_2019_000094B)

कॉन्फ्रेंस हॉल में प्रधानमंत्री का दिखना ही अब प्रेस कॉन्फ्रेंस कहलाएगा

मोदी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं की. यह तथ्य है. यह भी एक तथ्य है कि मोदी से पूछने वाला प्रेस ही नहीं है. होता तो उसे प्रेस कॉन्फ्रेंस की ज़रूरत नहीं होती. वह अपनी ख़बरों से मोदी को जवाब के लिए मजबूर कर देता.

लहर और अंडरकरंट के बीच फंसा पत्रकार अभी-अभी यूपी से लौटा है

पत्रकार टेंशन में है. लहर खोजने आया था. अंडरकरंट मिल रहा है. तभी मोदी-मोदी करती हुए एक जीप गुज़रती है. आज शाम अमित शाह की रैली होने वाली है. दिल्ली से यूपी आया पत्रकार ट्वीट करता है कि राहुल गांधी सो रहे हैं. अखिलेश यादव खो गए हैं. मायावती मिल नहीं रही हैं. चुनाव सिर्फ मोदी लड़ रहे हैं. पत्रकार इंतज़ार नहीं कर सकता है. वह यूपी आया है दिल्ली जाकर ट्वीट करने के लिए.

टाटा समूह का चुनावी चंदा 25 करोड़ से 500 करोड़ हुआ, किसे चंदा दे रहे हैं औद्योगिक घराने?

देश के ग़रीब प्रधानमंत्री ने चुनावी ख़र्चे का इतिहास ही बदल दिया है, इसलिए कॉरपोरेट को भी ज्यादा चंदा देना होगा. कॉरपोरेट नहीं बताना चाहते हैं कि वे किसे और कितना चंदा दे रहे हैं. उनकी सुविधा के लिए प्रधानमंत्री ने इलेक्टोरल बॉन्ड जारी करने का चतुर क़ानून बनाया और बड़ी आसानी से जनता को बेच दिया कि चुनावी प्रक्रिया को क्लीन किया जा रहा है.

क्या अक्षय कुमार को दिया प्रधानमंत्री मोदी का इंटरव्यू पेड न्यूज़ नहीं है?

अक्षय कुमार के साथ प्रधानमंत्री मोदी के ग़ैर-राजनीतिक इंटरव्यू की तैयारी ज़ी न्यूज़ की संपादकीय टीम ने कराई. ज़ी की टीम ने शूट और पोस्ट प्रोडक्शन यानी एडिटिंग की. यह सीधा-सीधा पॉलिटिकल प्रोपेगैंडा है. ज़ी न्यूज़ के तैयार कंटेंट को एएनआई से जारी करवाकर सारे चैनलों पर चलवाया गया. क्या इन चैनलों को नहीं बताना था कि यह कटेंट किसका है?

2014 में मोदी ने सपना बेचा था, 2019 में अपनी असफलता बेच रहे हैं

मोदी की बची-खुची राजनीतिक कामयाबी यही है कि विपक्ष के नेता और उनकी सरकारें भी फेल रही हैं. फेल होने वाला हमेशा घर में बताता है कि सब फेल हुए हैं मगर मोहल्ले को बताता है कि वह पास हुआ है, पर रिज़ल्ट किसी को नहीं दिखाता. देश के 50 फीसदी से अधिक छात्रों की यही कहानी आज नरेंद्र मोदी की भी कहानी है.