जून 2025 में छत्तीसगढ़ के कांकेर ज़िले के कई आदिवासी इलाक़ों के गांवों में ग्राम सभा में पारित एक प्रस्ताव का हवाला देते हुए ईसाई पादरियों और ‘धर्मांतरित ईसाइयों’ के प्रवेश पर रोक लगाने वाले होर्डिंग लगाए गए थे. हाईकोर्ट ने इस रोक को असंवैधानिक नहीं माना. बीते हफ्ते सुप्रीम कोर्ट ने भी इस फ़ैसले को चुनौती देने वाली याचिका ख़ारिज करते हुए याचिकाकर्ता को पेसा नियमों के तहत सक्षम प्राधिकरण के पास जाने की सलाह दी.
केंद्रीय विश्वविद्यालय गुजरात के एक दलित छात्र ने कुछ छात्रों, जिनमें कई एबीवीपी से जुड़े बताए जा रहे हैं, पर जातीय हिंसा और जातिसूचक गालियां देने का आरोप लगाया है. विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसे दो गुटों की झड़प बताया है, जबकि पीड़ित छात्र ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर पक्षपात करने का आरोप लगाते हुए, यूजीसी की नई गाइडलाइन को लागू करना जरूरी बताया है.
इलाहाबाद विश्वविद्यालय परिसर में यूजीसी की नई गाइडलाइन पर चर्चा के दौरान हिंसा की ख़बरें सामने आई हैं. दिशा छात्र संगठन के छात्रों ने आरोप लगाया है कि 3 फरवरी को हुई चर्चा के दौरान एबीवीपी और अन्य दक्षिणपंथी संगठनों के सदस्यों ने उनके साथ मारपीट की तथा जातिसूचक गालियां दीं. एक छात्रा ने कहा, ‘जिस वजह से यूजीसी की नई गाइडलाइन लाई गई थी, यह घटना उसी का उदाहरण है,’
इंडिया हेट लैब की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक़, साल 2025 में धार्मिक अल्पसंख्यकों को निशाना बनाकर हेट स्पीच की कुल 1318 घटनाएं दर्ज की गईं, जो की 2024 की तुलना में 13 प्रतिशत और 2023 के मुक़ाबले 97 प्रतिशत अधिक है. कुल दर्ज भाषणों में से 98 प्रतिशत मुसलमानों को निशाना बनाते हुए दिए गए. वहीं, भाजपा शासित राज्यों में सबसे अधिक हेट स्पीच दी गई.
संभल हिंसा के दौरान हुई गोलीबारी में घायल एक युवक के पिता की याचिका सुनते हुए चंदौसी की एक अदालत ने तत्कालीन सीओ अनुज चौधरी समेत 12 पुलिसकर्मियों के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है. हालांकि संभल पुलिस ने इस आदेश को ‘अवैध’ बताते हुए इसके ख़िलाफ़ अपील करने का ऐलान किया है.
देश के कई राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में जारी एसआईआर के बीच, दिल्ली भाजपा के सोशल मीडिया अकाउंट पर इस प्रक्रिया की आड़ में इस्लामोफोबिक पोस्ट साझा करने के आरोप लग रहे हैं. ज़मीनी स्तर पर एसआईआर से जुड़ी मानवीय और प्रशासनिक समस्याएं लगातार सामने आ रही हैं, लेकिन भाजपा पूरी प्रक्रिया को केवल ‘घुसपैठियों को हटाने’ के अभियान के रूप में पेश कर रही है.
पाकिस्तान का विवादित 27वां संवैधानिक संशोधन विधेयक पारित हो गया है. सेना को अतिरिक्त प्रभावी बनाने के साथ इस संशोधन ने देश की स्वतंत्र न्यायपालिका को कार्यपालिका के अधीन एक विभाग में बदल दिया है. साथ ही इस विधेयक ने सेना प्रमुख आसिम मुनीर को बेहिसाब अधिकार और शक्तियां दे दी हैं.
बिहार विधानसभा चुनाव में राजद ने 2010 के अपवाद को छोड़कर इतिहास का अपना सबसे ख़राब प्रदर्शन किया है. 143 सीटों पर चुनाव लड़ते हुए पार्टी ने केवेल 25 सीट पर जीत दर्ज की है. ऐसे में सवाल के घेरे में पार्टी नेता और महागठबंधन की ओर से मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार तेजस्वी यादव हैं.
नीतीश कुमार लगातार पांचवी बार मुख्यमंत्री बनने की कगार पर हैं. इसकी सबसे बड़ी वजह हैं बिहार की महिलाएं. साइलेंट वोटर कही जाने वाली महिलाएं नीतीश कुमार की सबसे बड़ी समर्थक हैं. वे खुलकर बाहर आईं और नीतीश कुमार के पक्ष में वोट डाला.
बिहार में मुसलमान की आबादी करीब 18 फ़ीसदी हैं, लेकिन राजनीति में उनकी हिस्सेदारी बेहद सीमित है, ख़ासकर मुस्लिम महिलाओं की. विधानसभा चुनाव में प्रमुख पार्टियों ने मिलकर केवल दो मुस्लिम महिलाओं को टिकट दिया है- जदयू की शगुफ़्ता अज़ीम और राजद की इशरत परवीन.
रणनीतिक विशेषज्ञ एश्ले टेलिस पर चीन को गोपनीय जानकारी देने के आरोप लगे हैं. कभी भारत-अमेरिका साझेदारी के समर्थक रहे टेलिस को सत्तारूढ़ भाजपा के समर्थक ‘भारत-विरोधी’ कह रहे हैं, जबकि कुछ विशेषज्ञ इस गिरफ़्तारी को वॉशिंगटन और नई दिल्ली के बीच बढ़ते तनावों की पृष्ठभूमि में देख रहे हैं. इस पूरे घटनाक्रम को जानने के लिए पढ़ें यह लेख.
भारत तालिबान की दोस्ती का हाथ बढ़ा रहा है, वैश्विक राजनीति में पुराने समीकरण बदल रहे हैं. अफ़ग़ानिस्तान के साथ भारत की नजदीकी महत्वपूर्ण है. लेकिन क्या मजबूरी है कि सरकार तालिबान को अपनी महिला-विरोधी नीतिओं का भारत में भी पालन करने की इजाज़त दे रही है?
तालिबान शासित अफ़ग़ानिस्तान के विदेश मंत्री आमिर ख़ान मुत्ताक़ी आठ दिनों की भारत यात्रा पर हैं. साल 2021 में तालिबान के सत्ता में आने के बाद से यह तालिबान की भारत की सबसे उच्च स्तरीय यात्रा है. भारत के लिए यह सही समय है कि वह अफ़ग़ानिस्तान में अपने निवेश और सुरक्षा हितों को साध सके.
केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण ने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2022 के नतीजों को लेकर भ्रामक विज्ञापन प्रकाशित करने के लिए प्रसिद्ध कोचिंग संस्थान दृष्टि आईएएस पर 5 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है. प्राधिकरण के अनुसार संस्थान ने विज्ञापन में दावा किया था कि उसके कोचिंग से ‘216+’ उम्मीदवारों का चयन हुआ है, लेकिन उनमें से 162 छात्रों ने केवल संस्थान का मुफ़्त इंटरव्यू गाइडेंस प्रोग्राम लिया था.
पिछले वर्षों में हिंदी पत्रकारिता अमूमन यूट्यूब और वायरल वीडियो तक सिमट गई है. ज़मीनी पत्रकार की जगह 'सेलेब्रिटी एंकर' ने ली है. क्या यूट्यूब के भड़काऊ मोनोलॉग खोजी पत्रकारिता का गला घोंट रहे हैं? हिंदी के प्रख्यात नाम वीडियो तक क्यों सिमट गए हैं? उन्होंने गद्य का रास्ता क्यों त्याग दिया है?
इस विषय पर द वायर हिंदी की परिचर्चा.