टॉक्सिक मैस्कुलिनिटी महज़ नारीवादियों का मुद्दा नहीं रहा, वैश्विक संकट का रूप ले चुका है

टॉक्सिक मैस्कुलिनिटी पुरुषों पर कोई व्यक्तिगत आक्षेप नहीं है बल्कि उस सामाजिक व्यवस्था के बारे में है जो शक्ति के विनाशकारी रूप को बढ़ावा देती है. जेफ़्री एपस्टीन से जुड़े नेटवर्क ने उजागर किया कि किस तरह एंटाइटलमेंट, शोषण और सज़ा से छूट जाने की संस्कृति काम करती है. ये घटनाएं छिटपुट नहीं थीं. इन्हें उन व्यवस्थाओं ने संभव बनाया जो सत्ता की जवाबदेही को सुनिश्चित नहीं करतीं.

आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई की हत्या को नारीवादी जीत बताना भ्रामक क्यों है?

कुछ हलकों में ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई की हत्या को पितृसत्ता पर प्रहार और नारीवादी जीत बताया जा रहा है, लेकिन बाहरी सैन्य हिंसा को महिला मुक्ति से जोड़ना भ्रामक है. नारीवाद सामाजिक बदलाव, संस्थागत सुधार और भीतर से उभरने वाले संघर्ष पर आधारित है, न कि युद्ध और भू-राजनीतिक शक्ति पर.