ज़मीन की तलाश में आसमान नापती ‘कोई एक सईदा’

पुस्तक समीक्षा: पत्रकार नेहा दीक्षित की 'द मैनी लाइव्स ऑफ सईदा एक्स' का हिंदी अनुवाद असल में सईदा के क़रीब की भाषा में किताब का फिर से लौटना है. दीक्षित सईदा के जीवन के ज़रिये मेहनत की लूट से चल रहे वैश्विक बाज़ार के दूसरे ध्रुव की कहानी कहती हैं. तमाम दुखों के बाद भी लोग कैसे ख़ुद को जीवित रखते हैं, सब खो देने के बाद कैसे जीवन शुरू करते हैं, और कई बार व्यवस्था के ख़िलाफ़ साझा संघर्ष

प्रिय द वायर हिंदी, मैं प्रोफ़ेसर अपूर्वानंद से असहमत हूं…

करीब साल भर पहले प्रोफ़ेसर अपूर्वानंद ने 'द वायर हिंदी' में 'कविता में जनतंत्र' नामक एक श्रृंखला प्रकाशित की थी. युवा लेखक विभांशु कल्ला प्रस्तावित करते हैं कि अपूर्वानंद ने भारत पर मंडराते जनतांत्रिक संकट और उसके लक्षणों की पहचान तो की, लेकिन उनके आग्रह इस संकट की उत्पत्ति और विकास को समझने में बाधा बन गये.