कैग की एक रिपोर्ट में मोदी सरकार की प्रमुख योजना, प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के क्रियान्वयन में गंभीर ख़ामियां सामने आई हैं. योजना के तहत 94.53% लाभार्थियों के बैंक खाते विवरण अमान्य या अनुपलब्ध मिले, साथ ही कई जगह किसी उम्मीदवार की एक तस्वीर की कई जगह लगी मिली, साथ ही फ़र्ज़ी मोबाइल नंबर जैसी गंभीर अनियमितताएं भी सामने आईं.
पंजाब के मुख्यमंत्री की ग़ैर-मौजूदगी में उनके हेलीकॉप्टर के कथित दुरुपयोग को लेकर दर्ज एफआईआर के ख़िलाफ़ तीन पत्रकारों और एक आरटीआई कार्यकर्ता ने हाईकोर्ट का रुख़ किया है. इस बीच, प्रेस क्लब ऑफ इंडिया ने इस मामले में पुलिस कार्रवाई की निंदा की है.
कर्नाटक मंत्रिमंडल द्वारा पारित प्रस्ताव में कहा गया कि वीबी- जी राम जी अधिनियम को स्वीकार नहीं किया जाएगा और इसे अदालत में चुनौती दी जाएगी. नया क़ानून भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत निहित काम के अधिकार का उल्लंघन करता है, संविधान द्वारा पंचायतों को प्रदत्त वैध अधिकारों को रौंदता है और 73वें तथा 74वें संवैधानिक संशोधनों की भावना के ख़िलाफ़ है.
केकड़ी सदर थाने में तैनात एक पुलिसकर्मी राजेश मीणा के निलंबन मामले को जहां शासन-प्रशासन उनके ख़िलाफ़ दर्ज मारपीट और पिस्तौल लहराने के आरोपों से जोड़ रहा है, तो वहीं विपक्षी दल कांग्रेस और खुद कॉन्स्टेबल मीणा इसे अवैध खनन गतिविधियों को लेकर उनके द्वारा की गई कार्रवाई के बाद स्थानीय विधायक के दबाव में उठाया गया क़दम बता रहे हैं.
जयपुर में अर्बन कंपनी से जुड़ी महिला कामगार बीते दो दिनों से धरने पर हैं. इन कामगारों का आरोप है कि कंपनी उन्हें जबरन मज़दूरी जैसी परिस्थितियों में काम करने को मजबूर कर रही है, आईडी ब्लॉक की जा रही हैं और शिकायतों पर कोई सुनवाई नहीं हो रही.
केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2024 में गुजरात के 50 प्रतिशत से भी कम घरों को नल के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण पानी मिला, जबकि राष्ट्रीय औसत 76 प्रतिशत है. यह ऐसे समय सामने आई है जब गांधीनगर में पीने के पानी में बड़े पैमाने पर दूषण के चलते गांधीनगर के कुछ हिस्सों में टायफाइड फैला है.
केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा ज़िले में स्थित बैलाडीला आरक्षित वन के भीतर राज्य-स्वामित्व वाली एनएमडीसी को लौह अयस्क खनन के विस्तार के लिए 874.924 हेक्टेयर वन भूमि के डायवर्ज़न को पर्यावरणीय मंज़ूरी देने की सिफारिश की है. स्थानीय लोग खनन विस्तार का विरोध कर रहे हैं.
इंदौर के भागीरथपुरा में 24 दिसंबर से 6 जनवरी के बीच गंभीर उल्टी और दस्त के कारण कई लोगों की मौत हो गई थी, जबकि कई अन्य को अस्पताल में भर्ती कराया गया. इस मामले में प्रशासन की ओर से 18 परिवारों को मुआवज़ा दिया जा चुका है, जबकि मध्य प्रदेश सरकार का कहना है कि मरने वालों की संख्या आठ है.
सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात हाईकोर्ट के 2019 के फैसले को पलटते हुए कहा कि विशेष आर्थिक जोन (सेज़) से डोमेस्टिक टैरिफ एरिया (डीटीए) को आपूर्ति की गई बिजली पर सीमा शुल्क (कस्टम ड्यूटी) नहीं लगाई जा सकती. साथ ही कोर्ट ने अडानी के मुंद्रा पावर प्लांट से वसूले गए शुल्क को वापस करने का निर्देश दिया.
पाकिस्तान के झंडे और हथियारों से जुड़ी तस्वीरें व वीडियो ऑनलाइन पोस्ट करने के आरोप में गिरफ़्तार व्यक्ति को ज़मानत देते हुए हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा है कि भारत और पाकिस्तान के बीच शत्रुता समाप्त करने और शांति बहाल करने की इच्छा को ‘राजद्रोह’ नहीं माना जा सकता.
‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद भारत सरकार ने 32 देशों में सात बहुदलीय प्रतिनिधिमंडल भेजने पर 13 करोड़ रुपये से अधिक ख़र्च किए. लेकिन सवाल यह है कि क्या इस महंगे कूटनीतिक अभियान से भारत को कोई ठोस अंतरराष्ट्रीय समर्थन या रणनीतिक लाभ मिला?
ईडी का कहना है कि जलवायु कार्यकर्ता हरजीत सिंह के संगठन सतत संपदा प्राइवेट लिमिटेड को प्राप्त कथित छह करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी धन की जांच कर रहा है. आरोप है कि इन पैसों का उपयोग ऊर्जा क्षेत्र में सरकारी नीतियों को प्रभावित करने के लिए नैरेटिव गढ़ने में किया गया.
लद्दाख के पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को पिछले वर्ष 26 सितंबर को हिरासत में लिया गया था. उनके वकील ने पूछते हैं कि उनका अपराध क्या है? यह कि सरकार को उसके ही वादे की याद दिलाना कि लद्दाख के लोगों को छठी अनुसूची के तहत संरक्षण और संवैधानिक अधिकार देने का वादा किया था.
हाईकोर्ट ने इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों को बेहद गंभीर बताया और कहा कि स्वच्छता में नंबर वन बताए जाने वाले शहर में ऐसी घटना होना अपने आप में चौंकाने वाली है. अदालत ने जोड़ा कि वह यह फैसला करेगी कि इस घटना को सिर्फ लापरवाही माना जाए या फिर किसी पर आपराधिक ज़िम्मेदारी तय की जाए.
उत्तराखंड में हज़ारों हेक्टेयर वन भूमि पर अवैध कब्जे़ के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्य में कार्यकारी पद पर आसीन प्रत्येक व्यक्ति इस लापरवाही के लिए जवाबदेह है. सुनवाई के दौरान अदालत ने सरकार को फटकार लगाते हुए पूछा कि आपको अवैध कब्ज़े का पता लगाने में 23 साल का समय लग गया.