हिंदी पत्रकारिता पर सेलेब्रिटी एंकर का, टीवी-यूट्यूब के दमकते चेहरों का वर्चस्व है. यह पत्रकारिता पाठक नहीं, दर्शक को संबोधित है. हमने अपने लिये एक भिन्न राह चुनी है. हम खोजी और दस्तावेज़ी पत्रकारिता के ज़रिये पाठक तक पहुंचना चाहते हैं.
महात्मा गांधी का कहना था कि पत्रकारिता की स्वतंत्रता एक बहुमूल्य विशेषाधिकार है, जिसे कोई भी देश त्याग नहीं सकता. अफ़सोस कि आज हिंदी पत्रकारिता का बड़ा हिस्सा यह सब भूलकर प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से स्वतंत्र सोच को ख़त्म कर चुका है.
न्यूज़लॉन्ड्री की महिला कर्मचारियों ने दिल्ली हाईकोर्ट में अभिजीत अय्यर मित्रा के ख़िलाफ़ मानहानि का मुकदमा दायर कर आरोप लगाया था कि मित्रा ने उनके विरुद्ध अपमानजनक पोस्ट किए जो यौन दुर्व्यवहार की श्रेणी में आते हैं. अदालत ने मित्रा को इसे तत्काल प्रभाव से हटाने को कहा था.
यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों का सामना कर रहे पूर्व केंद्रीय मंत्री एमजे अकबर ऑपरेशन सिंदूर को लेकर भारत का पक्ष रखने के लिए विदेश भेजे जा रहे सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा हैं. महिला पत्रकारों के समूह- नेटवर्क ऑफ वीमेन इन मीडिया, इंडिया ने इसका विरोध किया है.
दो साल पहले जौनपुर में एक गौशाला की बदहाल हालत पर ख़बर प्रकाशित होने के बाद ग्राम प्रधान ने पत्रकारों के ख़िलाफ़ केस दर्ज करवाया था. 2024 में हाईकोर्ट ने एफआईआर रद्द करते हुए यूपी पुलिस को फटकार लगाई थी. अब जाकर एससी-एसटी कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेशानुसार केस ख़त्म करने का आदेश दिया है.
बीते 7 मई को नागपुर पुलिस ने ऑपरेशन सिंदूर का विरोध करने के लिए केरल के 26 वर्षीय पत्रकार रेजाज एम. शीबा सिद्दीक को गिरफ्तार किया. तीन बार पुलिस रिमांड में लिए जाने के बाद, उनकी हिरासत के कारण लगातार बदलते रहे हैं. उन पर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी), जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) और हिज़्बुल मुजाहिदीन सहित कई प्रतिबंधित संगठनों के साथ कथित संपर्क रखने का आरोप लगाए गए हैं.
गुजरात में ईडी ने राज्य के एक प्रमुख समाचार पत्र गुजरात समाचार के एक मालिक को वित्तीय धोखाधड़ी के आरोप में गिरफ़्तार किया है. गुजरात कांग्रेस अध्यक्ष शक्तिसिंह गोहिल ने कहा है कि गिरफ़्तारी की असली वजह अख़बार का प्रधानमंत्री और सरकार के ख़िलाफ़ आलोचनात्मक लेख लिखना है.
एक हालिया रिपोर्ट बताती है कि भारत में पत्रकारों के ख़िलाफ़ आपराधिक मामलों में क़ानूनी प्रक्रिया ही सज़ा बन गई है. अधिकांश मामलों में जांच या सुनवाई पूरी नहीं होती, जिससे पत्रकारों को, खासकर छोटे शहरों में, आर्थिक तंगी, मानसिक तनाव और करिअर पर गंभीर असर झेलना पड़ता है.
अंतरराष्ट्रीय प्रकाशन- ग्लोबल टाइम्स, शिन्हुआ न्यूज़ और टीआरटी वर्ल्ड समेत चीनी और तुर्की मीडिया की प्रमुख न्यूज़ वेबसाइट के एक्स हैंडल भारत में ब्लॉक कर दिए गए हैं. चीन में भारतीय दूतावास ने पहले दावा किया था कि ग्लोबल टाइम्स भारत-पाकिस्तान तनाव के बीच लोगों को ग़लत जानकारी दे रहा है.
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नौ मई 2025 को द वायर के कई पाठकों ने यह सूचना दी कि वे वायर की मूल अंग्रेज़ी वेबसाइट thewire.in नहीं देख पा रहे हैं. इस बारे में द वायर का बयान.
मंगलवार को पाकिस्तान की ओर से की गई गोलीबारी में पुंछ के मौलवी कारी मोहम्मद इकबाल की मौत हो गई. कई राष्ट्रीय समाचार चैनलों ने उनकी तस्वीर का इस्तेमाल करते हुए उन्हें 'आतंकवादी' बताया था. पुंछ पुलिस ने इस झूठे नैरेटिव का खंडन करते हुए ख़बरों को 'निराधार और भ्रामक' बताया है.
सीपीआई नेता डी. राजा ने सूचना एवं प्रसारण मंत्री को लिखे पत्र में कहा है कि द वायर जैसी जिम्मेदार वेबसाइट को ब्लॉक करना गलत है. डिजिटल न्यूज़ संस्थाओं के संगठन डिजीपब ने भी इस कदम की निंदा की है.
भारत सरकार ने 8,000 से अधिक एक्स (ट्विटर) एकाउंट्स को ब्लॉक करने का आदेश दिया है. इनमें कई पत्रकारों, मीडिया संस्थानों और मानवाधिकारों पर रिपोर्टिंग करने वालों के एकाउंट शामिल हैं.
रक्षा मंत्रालय ने सभी मीडिया चैनलों, डिजिटल प्लेटफॉर्म और व्यक्तियों को सख्त एडवाइज़री जारी कर कहा कि रक्षा अभियानों और सुरक्षा बलों की आवाजाही की लाइव कवरेज या रियल टाइम रिपोर्टिंग से परहेज़ करें.