हिंदी पत्रकारिता के दो सौ साल: ‘मुख्य’ धारा की पतन गाथा!

एक समय कहा जाता था कि मीडिया प्रायः ऊंचा सुनने वाली दिल्ली को जनता की आवाज़ सुनने के लिए मजबूर कर देती है, लेकिन अब इसने इस प्रवाह को पूरी तरह पलट दिया है. अब यह सत्ताओं को आम लोगों की तकलीफ़े बताने के 'जोखिम' तो नहीं ही उठाती, उलटे सरकारों के हुक्म व फरमान उन तक इस रूप में ले आती है कि 'बुलडोजर जस्टिस' जैसा शब्द 'लोकतांत्रिक' हो जाता है.

एम्स देवघर: आधी क्षमता पर काम कर रहा आईसीयू, बंद पड़ी क्रिटिकल केयर यूनिट; संस्थान की शीर्ष समिति बेपरवाह

झारखंड के देवघर स्थित एम्स में 80 बेड वाला क्रिटिकल केयर यूनिट अब तक शुरू नहीं हो सका है. वहीं, आईसीयू भी अपनी आधी क्षमता पर चल रहा है. हैरानी की बात यह है कि संस्थान की सर्वोच्च निर्णयकारी निकाय ने 2025-26 में इन गंभीर कमियों पर चर्चा तक नहीं की.

नेहरू-मोदी संवाद: बीते समय को कठघरे में खड़ा कर आज के सवालों से नहीं बचा जा सकता

'इतिहास को पढ़िए, उसकी आलोचना कीजिए, उससे सीखिए भी. लेकिन वर्तमान की समस्याओं का समाधान इतिहास के कब्रिस्तान में नहीं मिलेगा. बेरोज़गार युवा को नौकरी चाहिए, इतिहास का अभियुक्त नहीं. महंगाई से परेशान परिवार को राहत चाहिए, सत्तर साल पुरानी बहस नहीं.'

उत्तर प्रदेश: विधानसभा चुनाव से पहले की सुगबुगाहट क्या कह रही है?

अगले साल देश की सबसे ज्यादा जनसंख्या और लोकसभा व विधानसभा सीटों वाले राज्य उत्तर प्रदेश में चुनाव होने हैं. भले ही तब भाजपा का उत्तर प्रदेश में पहली बार कमल खिलाने की पश्चिम बंगाल जैसी चुनौती से सामना नहीं होगा, पर चूंकि वह नरेंद्र मोदी सरकार और 18वीं लोकसभा के कार्यकाल के लगभग मध्य का समय होगा, इसलिए प्रेक्षक चुनाव नतीजों को अगले लोकसभा चुनावों के सेमीफाइनल के रूप में देखेंगे.

बशीर बद्र: तमाम लोग फ़रिश्ते हैं आदमी हूं मैं…

स्मृति शेष: बशीर साहब मानते थे कि कविता का जीवन उसके लिखे जाने के साथ समाप्त नहीं हो जाता, बल्कि वह तो शुरू ही तब होता है जब वह पाठकों तक पहुंचती है. एक बार रचना, अस्तित्व में आ जाए तो उसके अर्थ, उसकी ग्राह्यता केवल लेखक के अधिकार में नहीं रहते. हर पाठक उसे अपने अनुभवों, स्मृतियों, संवेदनाओं और जीवन-दृष्टि के आलोक में पढ़ता है.

कविता और सत्ता का सहकार

कभी-कभार | अशोक वाजपेयी: आज की भारतीय सत्ता को कविता की कोई ख़बर ही नहीं है. शायद उसे पता है कि आज की अधिकांश कविता इस सत्ता द्वारा फैलाए जा रहे झूठों-घृणा-हिंसा आदि से सहमत नहीं और ज़्यादातर उसके विरोध में है. कवि अल्पसंख्यक भी हैं. इसलिए उनकी उपेक्षा इस सत्ता के अल्पसंख्यक विरोधी रुख़ का भी नतीजा है.

मिर्ज़ापुर: थर्मल परियोजना की पर्यावरण मंज़ूरी को लेकर अडानी पावर, केंद्र और यूपी सरकार को एनजीटी का नोटिस

एनजीटी ने उत्तर प्रदेश के मिर्ज़ापुर जिले में अडानी पावर की प्रस्तावित 1600 मेगावाट कोयला आधारित मिर्जापुर ताप विद्युत परियोजना को दी गई पर्यावरण मंज़ूरी के मामले में अडानी पावर, केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार के संबंधित विभागों को नोटिस जारी किया है. परियोजना का स्थानीय नागरिकों द्वारा विरोध किया जा रहा है.

आपकी मौत के बाद आपके डिजिटल डेटा का मालिक कौन होगा?

डिजिटल दुनिया में हमारी यादें अब सिर्फ तस्वीरों और संदेशों तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि एक विशाल ‘डेटा विरासत’ बन चुकी हैं. यह लेख बताता है कि मृत्यु के बाद हमारा डिजिटल डेटा, एआई क्लोन्स और ऑनलाइन अकाउंट्स कैसे कानूनी, नैतिक और पर्यावरणीय संकट पैदा कर रहे हैं, और ‘डिजिटल अमरता’ का सच क्या है.

बशीर बद्र का गांव: ‘…जो छोड़ दिया फिर उसे मुड़कर नहीं देखा!’

बशीर बद्र के गुज़रने के बाद उनके जन्मस्थान के तौर पर कहीं अयोध्या तो कहीं कानपुर का नाम दर्ज हो रहा है, मगर उनके पैतृक गांव बुकिया (ज़िला अंबेडकर नगर) से दुनिया अनजान ही है. बात यह भी है कि देश-दुनिया में बशीर बद्र और उनकी शायरी को कितनी भी शोहरत हासिल क्यों न हुई हो, अपने गांव के लिए वे कई मायनों में जीवन भर अजनबी से ही बने रहे.

मुंबई: मीरा रोड सोसाइटी में बकरे के विरोध में सुअर लेकर पहुंचे हिंदुत्ववादी समूह, वायरल वीडियो की असल कहानी

मुंबई के मीरा रोड स्थित रिहायशी इलाके में बकरीद की तैयारियों को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश के तहत ईद की कुर्बानी से पहले सोसाइटी की मैनेजिंग कमेटी द्वारा निर्धारित जगह पर बकरे रखने के विरोध में हिंदुत्ववादी समूह सुअर लेकर पहुंचे. इस घटना का वीडियो भी वायरल हुआ, जिसमें अफ़रातफ़री के बीच पुलिस, पत्रकारों और लोगों की भीड़ को देखा जा सकता है.

एआई से नौकरियां जाएंगी, मगर इसलिए नहीं कि वह इंसानों से तेज़ और सस्ता काम कर सकता है

ज़्यादातर लोगों को लगता है कि आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस इतना ताक़तवर हो जाएगा कि हमारी नौकरियां खा जाएगा, क्योंकि वह इंसान का काम इंसान से ज़्यादा तेज़ और सस्ता कर देगा. जबकि यह आधी सच्चाई है, और आधा प्रोपगैंडा है, जो एआई के असली आर्थिक ख़तरे को छिपाने में मदद करता है.

नेहरू की उत्तरजीविता: साठ से अधिक बरस बाद भी वे आधुनिक भारत की नींव बने हुए हैं

जब भी भारत के अतीत और भविष्य पर बात होगी तो नेहरू के वैचारिक खुलेपन की याद आएगी. देश को उस दिशा में बढ़ना होगा जिसकी तरफ़ नेहरू जाना चाहते थे- समावेशी और उदार भारत की तरफ़.

महंगाई झेलिए, मुस्कुराइए और राष्ट्रनिर्माण में योगदान दीजिए

सरकार ने जनता को समझाने का अद्भुत तरीका खोज लिया है. अब यदि पेट्रोल महंगा हो तो समझिए विदेश नीति मजबूत हो रही है. डीज़ल और महंगा हो जाए तो मान लीजिए भारत विश्वगुरु बनने की दिशा में निर्णायक कदम उठा चुका है.

आरएसएस से जुड़े आदिवासी सम्मेलन के लिए दिल्ली के सरकारी स्कूलों में ठहराए गए प्रतिनिधि

आरएसएस से जुड़े संगठनों द्वारा लाल किले के मैदान में आयोजित एक आदिवासी सम्मेलन में शामिल होने आए प्रतिनिधियों के ठहराने के लिए राजधानी के कम-से-कम 72 सरकारी स्कूलों को सम्मेलन की अवधि के दौरान आवासीय केंद्रों में बदलने के आदेश दिए गए. शिक्षकों ने इस फैसले पर सवाल उठाए हैं, क्योंकि यह कार्यक्रम एक गैर-सरकारी संगठन द्वारा आयोजित किया गया था.

यूसीसी पर अमित शाह का बयान: आश्वासन और आशंकाओं के बीच आदिवासी अधिकारों का सवाल

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि समान नागरिक संहिता (यूसीसी) का कोई प्रावधान आदिवासी समुदायों पर लागू नहीं होगा. हालांकि, आदिवासी संगठनों के बीच इस क़ानून को लेकर लंबे समय से आशंकाएं बनी हुई हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या केवल राजनीतिक आश्वासन पर्याप्त हैं, या आदिवासी अधिकारों की संवैधानिक और क़ानूनी सुरक्षा को लेकर स्पष्ट गारंटी की आवश्यकता है.

1 2 3 540