नेशनलिस्ट सिटिज़न्स पार्टी ऑफ इंडिया, जिसमें टीएमसी के बाग़ी सांसद शामिल हुए हैं, के संगठन संचिव शांतनु डे ने द वायर से कहा कि वह नारदा और सारदा घोटालों में संलिप्त, भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे तृणमूल कांग्रेस सांसदों के साथ पार्टी के विलय के क़दम का विरोध करते हैं. वहीं, पार्टी के दूसरे नेताओं ने हाल ही में बंगाल में भाजपा की जीत का जश्न मनाया था.
कभी-कभार | अशोक वाजपेयी: कॉकरोच जनता पार्टी को तरह-तरह से व्याख्यायित, संदेहास्पद बताने की कोशिशें हो रही हैं. यह होना ऐसे पिछले आंदोलन आदि के हश्र के अनुभव की रोशनी में, अस्वाभाविक और अतर्किक नहीं है. लेकिन भारत के युवाओं की निष्क्रियता और राजनीतिक दृष्टि के अभाव से क्षुब्ध-असंतुष्ट हम जैसे कुछ बूढ़ों को इस पहल से कुछ उम्मीद बंध रही है.
द वायर उर्दू के संपादक फ़ैयाज़ अहमद वजीह मक़बूल शायर बशीर बद्र को याद करते हुए लिखते हैं कि 'सादा लफ़्ज़ों की मीनाकारी उनके यहां इस क़दर है कि उन्हें उर्दू शायरी का ‘गोल्डस्मिथ’ और ‘ज़रगर’ कहते हुए मेरे सामने उस कुम्हार की सूरत आ जाती है जो कच्ची मिट्टी के साथ रक्स करते हुए अपनी आंखों के सुनहरे जादू जगाता है. बशीर बद्र इसी जादू के शायर हैं.'
राम मंदिर चढ़ावा विवाद को लेकर अयोध्या में आम तौर पर लोग एक ही सवाल पूछ रहे हैं - यह कि जो कुछ कहा-सुना या किया जा रहा है, उसमें नया क्या है? उसकी शुरुआत तो 22-23 दिसंबर, 1949 को बाबरी मस्जिद में मूर्ति रखे जाने के बाद तभी हो गई थी, जब वहां चढ़ावे के तौर पर अकूत धन आना शुरू हुआ था.
नोएडा मज़दूर आंदोलन से जुड़े मामले में बीते महीने डीयू के एक छात्र कार्यकर्ता योगेश मीणा की गिरफ़्तारी हुई और मीडिया में आई ख़बरों में पुलिस ने योगेश के ख़िलाफ़ कार्रवाई का एक आधार इसी मामले में गिरफ़्तार एक व्यक्ति अनिल कुमार के साथ उनके कथित संबंध से जोड़ा था. अब एक स्थानीय कोर्ट ने अनिल को ज़मानत देते हुए कहा है कि हिंसक घटनाओं में उनकी प्रत्यक्ष संलिप्तता दिखा सके, ऐसा कोई साक्ष्य उसके समक्ष पेश नहीं किया गया.
13 अप्रैल के विरोध प्रदर्शनों के कुछ ही घंटों के भीतर मज़दूरी बढ़ाने की मांग कर रहे मजदूरों को हिंसक भीड़, विदेशी साज़िश का हिस्सा और संभावित ‘अर्बन नक्सल’ के रूप में पेश किया जाने लगा.
प्रयागराज विकास प्राधिकरण ने फायर सेफ्टी नियमों का पालन न करने के आरोप में शहर के तीन कोचिंग संस्थानों के परिसरों को सील कर दिया. हालांकि, वहां के शिक्षकों को लगता है कि मामला इससे कहीं ज़्यादा है. तीनों कोचिंग संस्थानों के मालिकों का आरोप है कि यह कार्रवाई जान-बूझकर, और यह लेखपाल परीक्षा में कथित पेपर लीक के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों का समर्थन करने के जवाब में की गई थी.
मालवीय नगर में लगी आग के बाद नियमों की अनदेखी पर होटल के मालिक ने कहा कि 'दिल्ली में सब चलता है!' गौर करें कि ऐसा सिर्फ दिल्ली नहीं, दूसरी जगहों पर भी चल रहा है, इसीलिए लापरवाहियों का सिलसिला अनंत है. 'चलता है' के कारण स्थिति यह है कि किसी को पता नहीं होता कि अचानक कोई आवासीय क्षेत्र व्यावसायिक क्षेत्र में कैसे बदल गया? कैसे किसी नामी अस्पताल के खुलने के बाद हर घर में होटल, रेस्तरां या
फैक्ट चेक: केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने मोदी सरकार के 12 साल पूरे होने के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में भारत में धार्मिक अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न को विपक्ष द्वारा फैलाया गया ‘प्रोपगैंडा’ कहकर ख़ारिज कर दिया. हालांकि भाजपा राज के पिछले एक दशक में भारत के अल्पसंख्यकों, ख़ासकर मुसलमानों और ईसाइयों को हिंदुत्व चरमपंथियों के हमलों का सबसे ज़्यादा सामना करना पड़ा है.
अप्रैल 2026 में नोएडा के हज़ारों मज़दूर अपनी रोज़ी-रोटी बचाने की मांग को लेकर आख़िर क्यों और कैसे फैक्ट्रियों से बाहर निकलकर सड़कों पर उतर आए?
मौलाना मोहम्मद बरकतउल्लाह भोपाली भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के उन अग्रणी क्रांतिकारियों में से थे, जिन्होंने देश के बाहर रहकर ब्रिटिश शासन के ख़िलाफ़ अभियान चलाया. अब उनके नाम वाले बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय का नाम बदलकर 'मां वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय' किए जाने की प्रक्रिया शुरू हो चली है, जिसे लेकर स्थानीय लोगों में नाराज़गी है.
मनरेगा केवल कागज पर लिखा कानून नहीं था, बल्कि हर गांव में लोकतंत्र का जीवंत उदाहरण बन गया. नई व्यवस्था (वीबी-ग्रामजी योजना) में काम केवल उन्हीं गांवों में उपलब्ध होगा जिन्हें केंद्र सरकार चुनेगी. इस तरह अधिकार प्राप्त नागरिक को निर्भर लाभार्थी में बदल दिया गया. लाखों मजदूरों के लिए जो पहले एक कानूनी अधिकार था, वह अब नौकरशाही की कृपा पर निर्भर हो गया.
कभी कभार | अशोक वाजपेयी: हमारे यहां हुए विउपनिवेशीकरण के अध्ययन में उपनिवेशवाद के भाषाई साम्राज्य का विश्लेषण बहुत कम है. सारी उत्तर-आधुनिकता के बावजूद पश्चिम अपने विचारों को सारे संसार में मनवाने में सफल हुआ है. विडंबना यह है कि हिंदुत्व के नाम पर जो राजनीतिक विचारधारा आज परंपरा के पुनर्वास और भारतीय आत्मबोध के नवजागरण का दावा कर रही है वह अपनी समझ में पूरी तरह औपनिवेशिक है.
दिल्ली यूनिवर्सिटी से एलएलबी कर रहे छात्र योगेश मीणा को नोएडा मज़दूर आंदोलन से जुड़े मामले में गिरफ़्तार किया गया है. उनके साथियों का आरोप है कि उन्हें श्रमिक आंदोलन मामले में गिरफ़्तार कार्यकर्ताओं के पक्ष में अभियान चलाने की वजह से निशाना बनाया गया है.
नीट परीक्षा और सीबीएसई में हुई अनियमिताओं को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर में कॉकरोच जनता पार्टी के समर्थक विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं.