एनएमसी द्वारा वैष्णोदेवी मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस पाठ्यक्रम चलाने की अनुमति वापस लिए जाने के बाद संस्थान में दाख़िला ले चुके 50 एमबीबीएस छात्र बिना कॉलेज के रह गए हैं. वहीं, राज्य बोर्ड ने शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए नई काउंसलिंग कराने से इनकार करते हुए सरकार से कहा है कि वह अपने स्तर पर इन छात्रों को अन्य मेडिकल कॉलेजों में अतिरिक्त सीटों पर दाख़िला दिलाए.
मुंबई की एक अदालत टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज के उन छात्रों के ख़िलाफ़ दर्ज मामला सुन रही है. छात्रों पर आरोप है कि उन्होंने दिवंगत प्रोफेसर जीएन साईबाबा की पहली पुण्यतिथि पर एकत्रित होकर कार्यक्रम आयोजित किया था. कोर्ट ने उनकी अग्रिम ज़मानत याचिकाओं पर सुनवाई को इस महीने के अंत तक के लिए स्थगित करते हुए पहले दी गई अंतरिम सुरक्षा को बढ़ा दिया है.
गुजरात के बनासकांठा जिले में संभावित दूषित खाने या पानी से एक स्कूल के 43 विद्यार्थी बीमार पड़ गए. ये छात्र जगाणा गांव स्थित एकलव्य मॉडल आवासीय स्कूल के छात्रवास में रह रहे थे, जहां मिड-डे मील खाने के बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई.
जामिया मिल्लिया इस्लामिया के पॉलिटेक्निक में एक शिक्षक पर एक लिपिक के साथ मारपीट करने और जातिसूचक गाली देने का आरोप लगा है. वायरल वीडियो और कर्मचारी की शिकायत के आधार पर दिल्ली पुलिस ने एससी-एसटी एक्ट और बीएनएस की धाराओं में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.
यूजीसी द्वारा संसदीय समिति और सुप्रीम कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत आंकड़ों से पता चला है कि देशभर के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में जाति आधारित भेदभाव की शिकायतों में पिछले पांच वर्षों में 118.4% की वृद्धि हुई है. इस संबंध में दर्ज की गई घटनाओं की संख्या 2019-20 में 173 से बढ़कर 2023-24 में 378 हो गई.
मध्य प्रदेश के अनूपपुर ज़िले में अमरकंटक स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय के छात्रावास में असम के 22 वर्षीय पोस्ट ग्रेजुएट छात्र के साथ कथित तौर पर नस्लीय भेदभाव के चलते मारपीट की गई. यह घटना ऐसे समय सामने आई है, जब पिछले महीने ही नस्लीय घृणा के कारण उत्तराखंड के देहरादून में त्रिपुरा के छात्र एंजेल चकमा की हत्या कर दी गई थी.
कटरा में श्री माता वैष्णो देवी इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस का पंजीकरण रद्द किए जाने के बाद भाजपा और उसके सहयोगी दलों अब केंद्र शासित प्रदेश में आगामी राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (एनएलयू) को कश्मीर घाटी से जम्मू स्थानांतरित करने की मांग कर रहे हैं.
कोई व्यक्ति जब एक लोकतांत्रिक परिवेश में बोलता है, वह यह शर्त कैसे लगा सकता कि उसे सुना ही जाए. आप बोलिए, मगर सुनने का अधिकार श्रोताओं के पास सुरक्षित रहता है: यह अधिकार संवैधानिक है. न सुनना भी इक तरह की अभिव्यक्ति ही है. मनोज रूपड़ा भी कुलपति के विषय से भटके हुए भाषण को न सुनकर अपनी अभिव्यक्ति के अधिकार का ही उपयोग कर रहे थे.
छत्तीसगढ़ के एक सरकारी स्कूल की प्रधानाध्यापिका को कक्षा चार के अंग्रेजी प्रश्न पत्र में कथित तौर पर एक सवाल में 'राम' नाम के उल्लेख को लेकर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के आरोप में निलंबित कर दिया गया है. साथ ही, संविदा पर कार्यरत एक अन्य सहायक शिक्षिका, जो पेपर मॉडरेटर थीं, उनकी सेवाएं समाप्त करने की कार्यवाही चल रही है.
केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय के अधीन कार्यरत संस्था नेशनल एजुकेशन सोसायटी फॉर ट्राइबल स्टूडेंट्स, जो एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों की देखरेख करती है, ने स्कूलों को अपने आयोजनों में सांसदों और विधायकों को आमंत्रित करने की सलाह दी है. शिक्षाविदों ने इस क़दम को स्कूलों के राजनीतिकरण क़रार देते हुए आलोचना की है.
जम्मू-कश्मीर के श्री माता वैष्णो देवी इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस से एमबीबीएस में दाख़िले की अनुमति वापस लेने की सूबे के राजनीतिक दलों द्वारा आलोचना की जा रही है. सीएम उमर अब्दुल्ला ने कहा है कि देश के अन्य हिस्सों में लोग अपने इलाके में मेडिकल कॉलेज लाने के लिए संघर्ष करते हैं, लेकिन यहां मेडिकल कॉलेज बंद कराने के लिए लड़ाई लड़ी गई.
आज जो कहानी गढ़ी जा रही है, वह एक ख़तरनाक भ्रम पर टिकी है. सत्ताधारी पार्टी भाजपा और उसके वैचारिक संरक्षक आरएसएस को 'राष्ट्र' के बराबर रखकर, मीडिया सरकार को आलोचना से बचाने की कोशिश कर रहा है. यह एक धोखा है. आरएसएस एक ग़ैर-सरकारी संगठन है, भाजपा राजनीतिक दल है. नरेंद्र मोदी संविधान के एक निर्वाचित सेवक हैं. इनमें से कोई भी 'देश' नहीं है.
राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग ने जम्मू-कश्मीर के श्री माता वैष्णो देवी इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस को एमबीबीएस में दाख़िले की अनुमति को वापस ले लिया है. पिछले साल नीट रैंकिंग के आधार पर पहले बैच में दाख़िला पाने वाले 50 छात्रों में से 47 मुस्लिम थे, जिसके बाद हिंदुत्व संगठनों और भाजपा के नेताओं ने मेरिट लिस्ट का विरोध करना शुरू कर दिया था.
सुप्रीम कोर्ट ने लिंगदोह समिति की रिपोर्ट को लागू करने की मांग करने वाली एक याचिका को ख़ारिज करते हुए कहा कि इसमें कोई दम नहीं है. शीर्ष अदालत के निर्देश पर केंद्र सरकार ने लिंगदोह समिति का गठन किया था. समिति की रिपोर्ट का उद्देश्य कैंपस राजनीति से 'धन और बाहुबल' को खत्म करना और साथ ही शैक्षणिक मानकों को बनाए रखना था.
इस साल पश्चिम बंगाल से लेकर महाराष्ट्र तक देशभर के कई शैक्षणिक परिसरों में यौन शोषण, उत्पीड़न की ख़बरें सुर्ख़ियों में रहीं. यह दर्ज करना भी महत्वपूर्ण है कि इनमें से कई मामलों में छात्रों के लगातार प्रदर्शनों के बाद शासन-प्रशासन हरकत में आया.