जबलपुर ज़िले में हिंदू संगठनों से जुड़े प्रदर्शनकारियों के एक समूह ने एक स्कूल प्रिंसिपल के वॉट्सऐप स्टेटस पोस्ट में कथित तौर पर भगवान राम के ख़िलाफ़ टिप्पणी को लेकर स्कूल में तोड़फोड़ की. प्रदर्शनकारियों ने पुलिस और स्टाफ की मौजूदगी में स्कूल में कीचड़ फेंका और काला पेंट भी पोत दिया.
हैदराबाद विश्वविद्यालय के पास स्थित 400 एकड़ ज़मीन की नीलामी के ख़िलाफ़ छात्रों का विरोध तेज़ हो गया है. छात्र और पर्यावरण कार्यकर्ता सरकार के इस कदम को पारिस्थितिकी तंत्र के लिए ख़तरे के रूप में देख रहे हैं.
पुलिस के अनुसार, कोटा के जवाहर नगर इलाके में बिहार के एक 17 वर्षीय छात्र ने अपने छात्रावास के कमरे में कथित तौर पर फांसी लगा ली. इससे पहले इसी दिन जोधपुर के एक हॉस्टल में नीट की तैयारी कर रहे छात्र ने कथित तौर पर ख़ुदकुशी की थी. इस साल राज्य में ऐसे मामलों की संख्या 10 हो गई है.
शिमला के एक निजी स्कूल ने छात्रों से ईद-उल-फितर से पहले जुमा अलविदा के दिन जश्न मनाने के लिए अच्छे कपड़े पहनने और खाने-पीने का सामान लाने को कहा था. स्थानीय दक्षिणपंथी संगठन देव भूमि संघर्ष समिति के विरोध प्रदर्शन की चेतावनी के बाद स्कूल ने यह निर्णय वापस ले लिया.
दिल्ली के आंबेडकर विश्वविद्यालय में एमए फाइनल की छात्रा ने इस वर्ष गणतंत्र दिवस पर दिए विश्वविद्यालय की कुलपति अनु सिंह लाठर के भाषण की कथित आलोचना की थी. निलंबन को लेकर छात्रा ने आरोप लगाया कि उनकी मुस्लिम पहचान के चलते उन्हें निशाना बनाया जा रहा है.
एनआईटी, सिलचर के एक सहायक प्रोफेसर को एक छात्रा द्वारा यौन उत्पीड़न की शिकायत के बाद शुक्रवार को कछार पुलिस ने गिरफ़्तार कर लिया. छात्रा ने आरोप लगाया है कि प्रोफेसर ने उन्हें उनके अंकों पर चर्चा के बहाने क्लास के बाद अपने कमरे में बुलाया और दरवाजा बंद कर अनुचित तरीके से छुआ.
सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो में मेरठ के आईआईएमटी विश्वविद्यालय के लगभग 50 छात्र परिसर में एक खुले मैदान में नमाज़ करते हुए दिख रहे थे, जिसके बाद हिंदुत्व समूहों ने क़ानूनी कार्रवाई की मांग की थी. इसे लेकर एक छात्र को हिरासत में लिया गया, जिसका अन्य छात्र विरोध कर रहे हैं.
हैदराबाद स्थित उस्मानिया विश्वविद्यालय ने यूनिवर्सिटी परिसर के साथ-साथ इसके विभिन्न घटक कॉलेजों और उनके प्रशासनिक भवनों में विरोध प्रदर्शन और धरने पर प्रतिबंध लगा दिया है. लोगों की नाराज़गी के बाद संस्थान ने कहा कि यह पूर्ण प्रतिबंध नहीं है. वहीं, विपक्ष ने इसे लोकतंत्र की हत्या क़रार दिया है.
विश्वविद्यालय के अधिकारी जब मानदंडों का उल्लंघन करते हैं, तो अध्यापक समुदाय पर इसका भयानक असर होता है. नौजवान अध्यापकों को विशेष रूप से यह डर रहने लगेगा कि उन्हें उनकी स्वतंत्र राय के लिए दंडित किया जा सकता है.
दिल्ली विश्वविद्यालय की यह घटना उन शिक्षाविदों से सामूहिक प्रतिक्रिया की मांग करती है जो निष्पक्षता, बौद्धिक स्वायत्तता और शैक्षणिक स्वतंत्रता के मूलभूत मूल्यों में विश्वास जताते हैं. विश्वविद्यालय कॉरपोरेट संस्थाएं नहीं हैं जहां बिना जवाबदेही के सत्ता का प्रयोग किया जा सके. वे विश्वास, संवाद और प्रशासन की साझा भागीदारी पर आधारित संस्थाएं हैं.
कोलकाता पुलिस ने जादवपुर विश्वविद्यालय परिसर में 'आज़ाद कश्मीर' और 'फ्री फिलिस्तीन' वाले ग्राफिटी और पोस्टर लगाने के मामले में छात्र संगठन पीडीएसएफ के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज की है. पुलिस के अनुसार, ये पोस्टर नफ़रत फैलाने और सार्वजनिक शांति भंग करने के उद्देश्य से लगाए गए थे.
गोवा स्थित बिट्स पिलानी में तीन महीनों के भीतर दूसरी आत्महत्या का मामला सामने आया है. 20 वर्षीय अथर्व देसाई हॉस्टल के कमरे में मृत पाए गए हैं. इससे पहले दिसंबर 2024 में भी एक छात्र ने अपनी जान ले ली थी. एक छात्र की मां ने संस्थान पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि इस मसले पर सिर्फ एक ईमेल कर देना पर्याप्त नहीं है.
किसी भी व्यक्ति या पाठ को अध्ययन का विषय बनाने का मतलब है उसकी आलोचनात्मक पड़ताल. पढ़ाने का मतलब प्रचार नहीं है. धर्म के अध्ययन को लेकर संकट पैदा होता है क्योंकि धार्मिक लोग धर्म को आलोचना नहीं आस्था का विषय मानते हैं. पर श्रद्धा,आवेश से मुक्त होना कक्षा में प्रवेश की पहली शर्त है.
दिल्ली हाईकोर्ट ने जामिया मिलिया इस्लामिया द्वारा उन छात्रों के निलंबन आदेश पर अस्थायी रूप से रोक लगा दी है, जिन्होंने 2019 में परिसर में हुए सीएए विरोधी प्रदर्शनों पर पुलिस की कार्रवाई के ख़िलाफ़ विरोध जताया था. 12 फरवरी को यूनिवर्सिटी ने प्रदर्शन कर रहे 17 छात्रों को निलंबित कर दिया था.
असम माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की कक्षा 10 की सामाजिक विज्ञान परीक्षा में प्रश्न पूछा गया था कि 'मान लें सरकार किसी गांव में अस्पताल बनाती है, जहां हिंदुओं का मुफ्त इलाज हो और दूसरे धर्मों के लोगों को खर्च खुद उठाना पड़े. क्या भारत जैसे देश में सरकार ऐसा कर सकती है. अपनी राय दें.' इसे कई लोगों ने विभाजनकारी बताया है.