कोरोना वायरस को लेकर पूरी आबादी के टीकाकरण से जुड़े एक सवाल के जवाब में केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने कहा कि महत्वपूर्ण ये है कि इस संबंध में तथ्यात्मक जानकारी ली जाए. आईसीएमआर के महानिदेशक ने कहा कि यह सवाल वैक्सीन की प्रभावशीलता पर निर्भर करेगा. अभी हमारा उद्देश्य संक्रमण के प्रसार की शृंखला को तोड़ना है.
कोरोना वायरस के संभावित टीके कोविडशील्ड के परीक्षण में चेन्नई में भाग लेने वाले एक व्यक्ति ने आरोप लगाया है कि ट्रायल के कारण उन्हें गंभीर न्यूरोलॉजिकल और मनोवैज्ञानिक लक्षण संबंधी समस्या समेत गंभीर दुष्प्रभावों का सामना करना पड़ा है. उन्होंने पांच करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति की भी मांग की है.
केंद्र सरकार ने आयुर्वेद के स्नातकोत्तर डॉक्टरों को सामान्य सर्जरी प्रक्रिया को अंजाम देने के लिए प्रशिक्षित किए जाने की अनुमति दे दी है. इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने सरकार की इस पहल पर चिंता जताते हुए इसे आधुनिक चिकित्सा प्रणाली को पीछे ले जाने वाला क़दम क़रार दिया है.
जर्मनी के मैक्स प्लांक रसायन विज्ञान संस्थान के अध्ययन में कहा गया है कि वायु प्रदूषण और कोविड-19 मृत्यु दर के बीच सीधे जुड़ाव को नहीं दिखता, लेकिन वायु प्रदूषण के कारण इस बीमारी की गंभीरता बढ़ने और स्वास्थ्य संबंधी अन्य जोखिमों के बीच प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष संबंध देखा गया है.
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद के निदेशक बलराम भार्गव ने बताया कि कोरोना वायरस संक्रमण से ठीक होने के बाद अगर पांच महीने के अंदर किसी शख़्स के शरीर में एंटीबॉडीज़ कम होती हैं तो उसके फिर से कोविड-19 से संक्रमित होने की आशंका है.
मीडिया में आई एक रिपोर्ट के मुताबिक, आईसीएमआर के महानिदेशक बलराम भार्गव ने कोविड-19 की व्यापकता का अनुमान लगाने के लिए भारत के पहले राष्ट्रीय सीरो-प्रीवलेंस सर्वेक्षण के शोधकर्ताओं से 11 मई और 4 जून के बीच 10 शहरों के हॉटस्पॉट से एकत्र किए गए डेटा को शोध-पत्र से हटाने के लिए कहा था.
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) द्वारा वित्त पोषित एक अध्ययन के लिए कुल 464 मरीज़ों को शामिल किया गया था. इस दौरान प्लाज़्मा थेरेपी वाले 235 मरीज़ों में से 34 और स्टैंडर्ड ट्रीटमेंट लेने वाले 229 मरीज़ों में से 31 की मौत हुई थी.
महाराष्ट्र के पुणे स्थित भारती विद्यापीठ मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में कोरोना वैक्सीन का इंसानों पर दूसरे चरण का परीक्षण शुरू हुआ है. कोविड-19 और एंटीबॉडी परीक्षण की रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद दो लोगों को वैक्सीन की खुराक दी गई है, उन पर निगरानी रखी जा रही है.
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और चीन में बनाए गए वैक्सीन के अब तक किए गए मानव परीक्षणों में इम्यून सिस्टम के बेहतर होने के संकेत मिले हैं. अब अगले ट्रायल में ये पता लगाया जाएगा कि इससे कोरोना वायरस को रोका जा सकता है या नहीं.
एम्स की एथिक्स कमेटी ने स्वदेशी तौर पर विकसित टीके ‘कोवैक्सीन’ के मानव परीक्षण की अनुमति दी है. इसके लिए 20 जुलाई से रजिस्ट्रेशन शुरू किया जाएगा.
शुक्रवार को संसद में वरिष्ठ कांग्रेस नेता जयराम रमेश की अध्यक्षता वाले पैनल की बैठक में वैज्ञानिकों ने बताया कि कोविड-19 की वैक्सीन विकसित करने में भारत की अहम भूमिका रहेगी, पर अगले साल से पहले इसके बनने की संभावना बहुत कम है.
डॉ. गगनदीप कांग पहली भारतीय महिला हैं, जिन्हें रॉयल सोसायटी लंदन का फेलो बनाया गया. उनका इस्तीफा ऐसे समय में आया है, जब दो महीने पहले ही उनके नेतृत्व में कोरोना वायरस वैक्सीन पर काम कर रही समिति को भंग कर दिया गया था.
आईसीएमआर द्वारा 15 अगस्त तक कोविड-19 वैक्सीन उपलब्ध कराने की समयसीमा पर देश की सबसे बड़ी विज्ञान अकादमी ने कहा है कि संक्रमण से लड़ने के लिए मानव शरीर में एंटीबॉडी बनने, उसके असर, डाटा रिपोर्टिंग आदि के लिए एक लंबा समय चाहिए होता है. अगर इसमें किसी तरह की कोताही बरती गई तो बड़ा नुकसान हो सकता है.
आईसीएमआर की ओर से कहा गया है कि कोरोना वायरस का टीका तेजी से बनाने का उद्देश्य अनावश्यक लालफीताशाही कम करना है. हालांकि आईसीएमआर द्वारा 15 अगस्त तक वैक्सीन बनाने के दावों पर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सवाल खड़े किए हैं. यहां तक कि टीका विकसित कर रही कंपनी भी अक्टूबर से पहले इसका ट्रायल पूरा करने से इनकार कर रही है.
आईसीएमआर ने कोविड-19 की स्वदेशी वैक्सीन के लॉन्च के लिए 15 अगस्त की समयसीमा निर्धारित की है, जिसे लेकर डॉक्टर्स और वैज्ञानिक संशय में हैं. वैक्सीन बनाने वाली कंपनी भारत बायोटेक का भी मानना है कि ट्रायल पूरे होने में अक्टूबर तक का समय लग सकता है.