देश की पहली कोविड-19 वैक्सीन को मानव परीक्षण की अनुमति मिली

‘कोवैक्सिन’ नामक टीके को भारत बायोटेक ने भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद और राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान के साथ मिलकर विकसित किया है.

होम्योपैथी के ज़रिये कोविड-19 से बचाव का दावा राहत नहीं चिंता की बात है

देश में कोविड-19 महामारी के शुरुआती दौर में आयुष मंत्रालय द्वारा जारी एक परामर्श में आर्सेनिकम एल्बम 30 C नाम की होम्योपैथिक दवा को दिन में तीन बार लेने की सलाह दी गई थी. लेकिन शोध बताते हैं कि ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिलता कि होम्योपैथी कोविड या किसी भी अन्य मर्ज़ के ख़िलाफ़ कोई सुरक्षा प्रदान करती है.

कोरोना को काबू में करने के लिए सभी राज्य परीक्षण क्षमता में इज़ाफ़ा करें: आईसीएमआर

आईसीएमआर की ओर से कहा गया है कि राज्य परीक्षण क्षमता बढ़ाने के लिए आवश्यक क़दम उठाएं, ताकि लक्षण वाले हर व्यक्ति की जांच संभव हो पाए. इससे संक्रमण का जल्द पता लगाने और इसे रोकने में मदद मिलेगी और लोगों की ज़िंदगी बच पाएगी.

क्या वजह है कि कोरोना वायरस की वैक्सीन बनाना मुश्किल साबित हो रहा है

अमूमन वायरस का डीएनए ऐसा होता है कि अनेक वायरस बनाते समय उनके ब्लू-प्रिंट में कोई ग़लती नहीं होती, इसीलिए वे ज़्यादा स्थिर रहते हैं और ब्लू प्रिंट में आसानी से बदलाव नहीं आते. पर कोरोना वायरस का ब्लू-प्रिंट डीएनए नहीं आरएनए है. बावजूद इसके ये अपने ब्लू-प्रिंट में कुछ हद तक ग़लतियां रोकने में सक्षम है, इसी कारण से हम नहीं जानते कि अगर कोई एक वैक्सीन विकसित की जाए, तो वह सब तरह के कोविड-19 वायरस पर असर

कोरोना: हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन को लेकर मेडिकल पत्रिका- लांसेट और एनईजेएम ने अध्ययन वापस लिए

विश्व के क़रीब 100 से अधिक वैज्ञानिकों ने दोनों पत्रिकाओं के संपादकों को लिखे गए खुले पत्र में दोनों अध्ययनों में इस्तेमाल डेटा की गुणवत्ता में विसंगति का मुद्दा उठाया था. पत्र में डेटा की सत्यता और अध्ययन में इससे जिस तरह का विश्लेषण किया गया, उन सबको लेकर चिंता जताई गई थी.

शारीरिक दूरी, मास्क और आंखों की रक्षा से हो सकता है कोविड-19 से बचाव: लांसेट

कोरोना वायरस को लेकर एक समीक्षा मेडिकल जर्नल लांसेट में प्रकाशित हुई है. अनुसंधानकर्ताओं ने बताया कि मौजूदा सबूतों की यह व्यवस्थित समीक्षा विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा कराई गई है.

कोरोना वायरस: हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन के दुष्प्रभावों पर अमेरिकी प्रशासन ने दी चेतावनी

अमेरिका के खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने कहा कि हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन और क्लोरोक्वीन दवाओं का इस्तेमाल केवल अस्पतालों या क्लिनिकल परीक्षणों में किया जाना चाहिए.

देश में कोरोना के 80 फीसदी मामलों में नहीं दिखे लक्षण: आईसीएमआर वैज्ञानिक

आईसीएमआर के वरिष्ठ वैज्ञानिक रमन आर गंगाखेड़कर का कहना है कि ऐसे मामलों की पहचान करना मुश्किल है, जिनमें कोरोना वायरस के लक्षण नहीं दिखते हों और सभी लोगों का टेस्ट कर पाना संभव नहीं है.

कोरोना वायरस के टीके की खोज में एक-दो साल और: वैज्ञानिक

वीडियो: बीते जनवरी में चीन के वैज्ञानिकों ने कोरोना वायरस के लिए टीके के विकास का प्रसार करने के लिए दुनिया भर के वैज्ञानिकों को इसका एक जेनेटिक कोड जारी किया. समाचार वेबसाइट डीडब्ल्यू ने हांगकांग, बेल्जियम और जर्मनी के वैज्ञानिकों से बात की, ताकि वे ये समझ सकें कि वे टीका विकसित करने की अपनी यात्रा में कहां तक पहुंचे हैं.

कोरोना जांच किट बनाने की मंज़ूरी पाने वाली पहली भारतीय कंपनी ने पहला लॉट सप्लाई के लिए भेजा

भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद ने कोरोना वायरस की जांच के लिए प्राइवेट लैब और नॉन-यूएसएफडीए/यूरोपियन सीई किट को मंज़ूरी देने का काम तेज़ कर दिया है. परिषद ने अब तक इस तरह के कुल तीन किट को मंज़ूरी दी है, जिसमें ‘माईलैब’ नाम की एक भारतीय कंपनी शामिल है.

क्या है हंटा वायरस, जिसने चीन में एक व्यक्ति की जान ले ली?

अमेरिका के सेंटर फॉर डिसीज़ कंट्रोल के अनुसार, हंटा वायरस नया नहीं है और इसका पहला मामला 1993 में आया था. यह चीज़ों को कुतरने वाले जीवों जैसे कि चूहे, गिलहरी इत्यादि से फैलता है.

भारत में कोरोना वायरस के 28 मामलों की पुष्टि, भारत ने दवाओं के निर्यात पर लगाया प्रतिबंध

कोरोना वायरस से अब तक दुनियाभर में तीन हज़ार से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि अब तक भारत में कोरोना के 28 मामले सामने आ चुके हैं. ये मामले केरल, तेलंगाना, जयपुर और दिल्ली में मिले हैं.

सरकार से क्यों नाराज़ हैं पुलवामा हमले के शहीदों के परिवार

विशेष रिपोर्ट: 14 फरवरी 2019 को जम्मू कश्मीर के पुलवामा जिले में हुए आतंकी हमले में बिहार के रहने वाले दो सीआरपीएफ जवान भी शहीद हुए थे. हमले के एक साल बाद इनके परिजनों का कहना है कि शहादत के बाद सरकार की तरफ से बड़े-बड़े वादे किए गए थे, लेकिन सारे कागज़ी निकले.

उपग्रह से निगरानी के बावजूद जंगल में आग लगने की घटनाओं में तीन गुना की बढ़ोतरी: सरकार

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक पिछले तीन साल के दौरान जंगल में आग लगने की घटनाओं में सर्वाधिक बढ़ोतरी ओडिशा और आंध्र प्रदेश में हुई है. उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, राजस्थान और मणिपुर में भी जंगल में आग लगने की घटनाएं बढ़ी हैं.

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