मस्क द्वारा अधिग्रहण के बाद सेंसरशिप या निगरानी संबंधी सभी सरकारी आदेश ट्विटर ने माने: रिपोर्ट

ट्विटर का अधिग्रहण करने के बाद एलन मस्क ने अभिव्यक्ति की आज़ादी के एक नए युग की शुरुआत और सोशल मीडिया पर राजनीतिक हस्तक्षेप को अस्वीकार करने का वादा किया था. एक रिपोर्ट के अनुसार, 27 अक्टूबर 2022 से 27 अप्रैल 2023 तक ट्विटर को भारत से 971 अनुरोध प्राप्त हुए हैं, जिसमें से उनसे 808 का पूरी तरह से पालन किया है.

भारत में सोशल मीडिया संबंधी नियम काफ़ी सख़्त, जेल जाने से बेहतर हम क़ानून मानेंगे: मस्क

ट्विटर के प्रमुख एलन मस्क ने बीबीसी को दिए एक इंटरव्यू के दौरान कहा कि वह संभवत: भारत सरकार द्वारा जारी ब्लॉकिंग आदेशों का पालन करते हैं, क्योंकि वह ऐसे हालात का सामना करना नहीं चाहते हैं, जहां ट्विटर के कर्मचारियों को जेल भेजा जा रहा हो.

जेएनयू में धरना देने पर 20 हज़ार रुपये के जुर्माने वाला नया नियम कुलपति ने वापस लिया

जेएनयू के नए नियमों के तहत कहा गया था कि छात्रों पर धरना देने को लेकर 20,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है और उनका प्रवेश रद्द किया जा सकता है या यदि वे घेराव करते हैं तो 30,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है या वे हिंसा के आरोपी ठहराए जा सकते हैं.

लालू यादव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को टक्कर दे सकते थे: अरुंधति रॉय

बुकर पुरस्कार विजेता लेखक और सामाजिक कार्यकर्ता अरुंधति रॉय ने कहा कि विपक्ष प्रधानमंत्री को रोक सकता है. वाम दल अकेले भाजपा को नहीं हरा सकते हैं. इसका मुक़ाबला करने के लिए कांग्रेस और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जदयू जैसी अन्य पार्टियों को 2024 के लोकसभा चुनाव में एक साथ आना ज़रूरी है.

भारत विरोधी ताक़तें सुप्रीम कोर्ट का इस्तेमाल औजार के तौर पर कर रही हैं: आरएसएस मुखपत्र

आरएसएस के मुखपत्र पाञ्चजन्य के संपादकीय में संपादक हितेश शंकर ने सुप्रीम कोर्ट पर निशाना साधते हुए लिखा है कि सर्वोच्च न्यायालय भारत का है, जो भारत के करदाताओं की राशि से चलता है. इस सुविधा का सृजन और रखरखाव हमने अपने देश के हितों के लिए किया है, लेकिन वह भारत विरोधियों के अपना मार्ग साफ करने के प्रयासों में एक औजार की तरह प्रयुक्त हो रहा है.

मोदी सरकार के नौ साल में प्रति भारतीय क़र्ज़ 2.53 गुना बढ़ा: कांग्रेस

कांग्रेस प्रवक्ता गौरव वल्लभ ने कहा कि ‘मोदीनॉमिक्स’ के कारण सरकार के क़र्ज़ में भारी वृद्धि ने आम लोगों को कुचल दिया है. उन्होंने कहा कि आज़ादी से लेकर 2014 तक देश पर 55 लाख करोड़ रुपये का क़र्ज़ था. 2014 से 2023 के बीच यह बढ़कर 155 लाख करोड़ रुपये हो गया. आज हर नागरिक पर 1 लाख 9 हज़ार रुपये का क़र्ज़ है.

कोविड-19 संकट के दौरान मिसाल बनकर उभरा क्यूबा

एक ऐसे समय में जब विकसित कहे जाने वाले देशों में कोरोना संक्रमितों की तादाद बढ़ती जा रही है, अस्पतालों से महज़ मरीज़ों की ही नहीं बल्कि डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के गुजरने ख़बर आना अपवाद नहीं रहा, क्यूबा सरीखे छोटे-से मुल्क़ ने इससे निपटने में अपनी गहरी छाप छोड़ी है.

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