Caste Politics

भाजपा ने पांच साल तक सिर्फ़ संघ का एजेंडा लागू किया, अब आर-पार की लड़ाई होगी: स्वामी प्रसाद मौर्य

वीडियो: उत्तर प्रदेश में चुनाव की तारीख़ का ऐलान होते ही भाजपा को बड़ा झटका लगा था. कद्दावर ओबीसी नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने मंत्रिपरिषद और पार्टी से इस्तीफा दे दिया. मौर्य भाजपा से समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए. मौर्य ने द वायर से अपने इस्तीफे की वजह और आगे की रणनीति के बारे में बात की.

‘यहां दलित रहते हैं, अगर ब्राह्मण, ठाकुर या ऊंची जाति के लोग रहते तो कब का विकास हो गया होता’

वीडियो: विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र ज़मीनी हाल जानने द वायर की टीम उत्तर प्रदेश के आगरा के सिरोली गांव पहुंची थी. यहां सड़क पर जमा हो रहे पानी को हटाने के उपाय करने की मांग को लेकर नागरिक पिछले 100 दिनों से धरने पर बैठे हैं. ग्रामीणों का कहना है कि वे दलित हैं, इसलिए उनके साथ भेदभाव किया जा रहा है.

उत्तर प्रदेश: बसपा की भाजपा से हिंदुत्व का एजेंडा छीनने की कोशिशें क्या रंग लाएंगी

जब भी धर्मनिरपेक्षता को चुनाव मैदान से बाहर का रास्ता दिखाकर मुकाबले को असली-नकली, सच्चे-झूठे, सॉफ्ट या हार्ड हिंदुत्व के बीच सीमित किया जाता है, उसका कट्टर स्वरूप ही जीतता है. उत्तर प्रदेश में बसपा को इस एजेंडा पर आगे बढ़ने से पहले पिछले उदाहरणों को देखना चाहिए.

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आरक्षण पर पक्ष और विपक्ष वालों के बीच सौहार्दपूर्ण माहौल में बातचीत होनी चाहिए: मोहन भागवत

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत के आरक्षण पर दिए बयान पर कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि ग़रीबों के अधिकारों पर हमला, संविधान सम्मत अधिकारों को कुचलना, दलितों-पिछड़ों के अधिकार छीनना…यही असली भाजपाई एजेंडा है.

Bhopal: Union Home Minister Rajnath Singh with Madhya Pradesh Chief Minister Shivraj Singh Chouhan addresses a press conference on completion of four years of BJP government at the centre, in Bhopal, Thursday, May 31, 2018. (PTI Photo)(PTI5_31_2018_000066B)

क्या सवर्ण आंदोलन ​के बाद पलटी हवा से मध्य प्रदेश में शिवराज का दम फूल रहा है?

एससी/एसटी एक्ट में हुए संशोधन का विरोध देश के कई हिस्सों में हो रहा है लेकिन चुनावी मुहाने पर खड़े मध्य प्रदेश में इसकी व्यापकता अधिक है. भाजपा-कांग्रेस दोनों ही दलों के नेताओं को राज्य में जगह-जगह विरोध का सामना करना पड़ रहा है.

जातिगत राजनीति इसलिए होती है, क्योंकि लोग जाति के नाम पर वोट देते हैं: भागवत

संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि नेता एक निश्चित सीमा तक चीज़ों में सुधार कर सकते हैं और चीज़ों में सुधार के लिए अपने हितों के त्याग करने की ज़रूरत होती है.